Mere kanha ter dar pe aaun
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं,
आके गाऊं वहां पे राधा-राधा
जब भक्तों ने कान्हा पुकारा --- कान्हा.....
तुमने आकर दिया है सहारा --- सहारा
अब बारी भी आयी है मेरी -2
काटो मेरी सकल भवबाधा
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....
यूँ तो बने तुम गोकुल के ग्वाले --- ग्वाले.....
हर जिंदगी थी तेरे हवाले --- हवाले
सब छोड़ के तुमको जपूँ मैं
अब हरि से मिला दो हे राधा - 2
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....
तेरे नाम की दीवानी थी मीरा --- मीरा.....
उसकी काटी थी हर एक पीड़ा --- पीड़ा
"शुभ" झुमाया उसने जगत को - 2
गाती फिरती थी कृष्ण-राधा
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"