Wednesday, 26 April 2023

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है
स्वीकारो गुरुदेव चरण में वंदन है

जब-जब भी प्रभु तुमने पुकारा
आ ना सका मैं द्वार तिहारा
बंधन है गुरुदेव, जगत का बंधन है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

जब-जब भी मैंने तुमको पुकारा
तरह-तरह का लिया सहारा
चंचल है गुरुदेव, ये मन बड़ा चंचल है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

रोम रोम में नाम सुमिरता
एक पल भी प्रभु तुम्हें न बिसरता
गदगद है गुरुदेव ये मन बड़ा गदगद है

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

संकलनकर्ता एवं रचनाकार: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Tuesday, 25 April 2023

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा
मैं कितना बड़भागा कि मेरा, राम चरण मन लागा

राम नाम का ओढ़ दुशाला, मन मंदिर कर लिया उजाला
अब अँधियारा ना करना प्रभु, सोया मन अब जागा रे जागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

हे प्रभु सुन लो अर्जी हमारी, हम आये हैं शरण तुम्हारी
अपनी शरण ठिकाना देना, हर पल ये वर माँगा रे माँगा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

ऐसा वर दो मुझ को सियावर, लहर-लहर गूंजे मेरा स्वर
कोयल जैसा गीत सुनाये, तुम्हरी कृपा से कागा रे कागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

प्रीत का बंधन तोड़ ना देना, बीच राह में छोड़ ना देना
मुख मोड़ा तो टूट जायेगा, सांसों वाला धागा रे धागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

जो आ जाये हैं उनकी भी, जो ना आ पाए उनकी भी
मनोकामना पूरी करना, मंगल मन अनुरागा रे लागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना
प्रभु के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

लोक शिक्षण हेतु प्रभु अवतार होत
जिनकी करुणा से भूमि दुखवार होत
सह सकत न दीनन करुण क्रंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

रोम-रोम काम कोटिक गुलाम है
सिया प्राणप्रिया प्रियतम श्री राम हैं
जिनकी समता में कोटिक रवि चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

सारी दुनिया में अप्रतिम प्रभाव है
किन्तु कोमल अति सरल स्वभाव है
जिनको द्वार है काहू के हित वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

राजगद्दी मिले या वनवास हो
जिनके हिय में हरष ना हरास हो
होय दिव्य मुख चंद्रकाहू अनंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिनका दीनन के प्रति सहज प्यार है
ऐसो और कौन जग में उदार है
करे दीनन के दुःख को निकंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

नाथ पतित को पावन बनावते
दीन दुर्बल प्रभु के मन भावते
जिन्हें भावे ना कपट छल छंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

दीन शबरी को माँ तुल्य मानते
गीध को भी पिता सा सनमानते
जिन्हें व्यापे जगत के दुःख वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिन्हें सेवक हैं पुकारते सुहावते
भक्त प्रेमी हैं जिन्हें भावते
जिन्हें आलस प्रमाद है पसंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

अपने शत्रु का करते जो भी हित हैं
भालू वानर निषाद जिनके मित्र हैं
तपत हिय हित है शीतल जिन चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Saturday, 1 April 2023

प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा

प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

केसर के तिलक लगाए मेरे राम जी,
लाल सिन्दूर हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

ऊँचे सिंघासन पे बैठे मेरे राम जी,
चरनो में बैठे हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

पीला पीताम्बर पहने मेरे रामजी ,
लाल लंगोट हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

मेवा और मिश्री का भोग मेरे राम जी,
लड्डूअन का भोग हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"



Twitter: @abhimaitrey

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

काल सदा अपने रस डोले,
ना जाने कब सर चढ़ बोले।
हर का नाम जपो निसवासर,
अगले समय पर समय ही ना॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

भूषन से सब अंग सजावे,
रसना पर हरी नाम ना लावे।
देह पड़ी रह जावे यही पर,
फिर कुंडल और नगीना क्या॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

तीरथ है हरि नाम तुम्हारा,
फिर क्यूँ फिरता मारा मारा।
अंत समय हरि नाम ना आवे,
फिर काशी और मदीना क्या॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई,
जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है l

पता जब लगा मेरी हस्ती का मुझको,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

सभी में सभी में फकत मैं ही मैं हूँ,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

ना दुःख है ना सुख है ना शोक है कुछ भी,
अजब है यह मस्ती पीया कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

अरे मैं हूँ आनंद आनंद मेरा
मस्ती ही मस्ती और कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

भ्रम है द्वन्द है जो तुमको हुआ है
हटाया जो उसको खफा कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...


संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey