नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण
जो कुछ दीखता है रहेगा ना सब दिन
कहाँ तक यहाँ मन फंसाते रहेंगे
गुरु चरणों में ही ये मन को लगाकर
सदा शांति आनंद पाते रहेंगे
बड़े से बड़ा अब यही काम करना
चपल मन को आधीन रख कर विचारना
दुखों से ना डरना अटल धैर्य रखना
कहीं भी नहीं पाप पथ पर उतरना
उठो शीघ्र ममता से मुख मोड़ करके
बढ़ो कामना जाल को तोड़ करके
जो कुछ मन से पकड़ा उसे छोड़ करके
जियो एक हरि से लगन जोड़ करके
शुभेक्षु,
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"