Saturday, 3 May 2025

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 4

 नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

जो कुछ दीखता है रहेगा ना सब दिन 
कहाँ तक यहाँ मन फंसाते रहेंगे 
गुरु चरणों में ही ये मन को लगाकर 
सदा शांति आनंद पाते रहेंगे 

बड़े से बड़ा अब यही काम करना 
चपल मन को आधीन रख कर विचारना 
दुखों से ना डरना अटल धैर्य रखना 
कहीं भी नहीं पाप पथ पर उतरना 

उठो शीघ्र ममता से मुख मोड़ करके 
बढ़ो कामना जाल को तोड़ करके 
जो कुछ मन से पकड़ा उसे छोड़ करके 
जियो एक हरि से लगन जोड़ करके 

शुभेक्षु,
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 3

 नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

तुम्हें पाके हमने जहाँ पा लिया है 
जमीं तो जमीं आसमां पा लिया है 
अब मन में गुरु नाम की ही रटन हो 
ह्रदय में धरें ध्यान गुरुवर तुम्हारा 

कृपासिंधु गुरुवर जो कुछ कह रहे हैं 
वो वाणी भुलाने के काबिल नहीं है 
बड़े भाग्य से ऐसा अवसर मिला है 
निरर्थक बिताने के काबिल नहीं है 

मेरे बिगड़े जीवन को तुमने बनाया 
मेरे सब विकारों को तुमने मिटाया 
ये कैसा है जादू समझ में ना आया 
तेरे प्यार ने हमको जीना सिखाया 

किरपा तुम्हारी जो पाते रहेंगे 
विवेकी स्वयं को बनाते रहेंगे 
मिलेगी नहीं शांति उनको कहीं भी 
जो परमात्मा को भुलाते रहेंगे 

कहीं तुच्छ अभिमान आने ना पाए 
असत्य दृश्य सत्य से डिगाने ना पाए 
ये सुख दुःख मन को भुलाने ना पाए 
कहीं भी समय व्यर्थ जाने ना पाए 

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 2

नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

मेरे मन के मंदिर में गुरुवर तुम्हारी 
कृपानाथ ज्योति सदा जगमगाये 
तेरे दर पे आये हैं बन के पुजारी 
नहीं भाव भक्ति का कम होने पाए 

अब प्रभु कृपा करहुं एही भांति 
सब तजि भजन करहुं दिनु राति 
हमें देना अनुराग अर्जुन की भांति 
शयन में भी जिव्हा रहे गुनगुनाती 

सेवा की महिमा समझ हमको आये 
ये जीवन सदा सेवा में ही बिताये 
कभी भूल कर भूल होने ना पाए 
कभी भाव सेवा का मन से ना जाये 

मन में कभी ना अहंकार आये 
तेरे चरणों का ध्यान खोने ना पाए 
रहे श्वाश चलती तन में तभी तक 
हर एक श्वाश गुणगान तेरा ही गाये 

विश्वास मन का ये जाने ना पाए 
गुरुवर के हम हैं गुरुवर हमारे  
तुम्हारे अलावा गुरूजी जगत में 
नहीं कोई नैया हमारी उतारे 



Thursday, 1 May 2025

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 1

नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

बनाई है किस्मत तेरे पास आके
मुझे तुमने दे दी नयी जिंदगानी
तेरे नाम का आसरा मिल गया है
है करतार तेरी बड़ी मेहरबानी

तुम्हीं को मैं आनंदघन चाहता हूँ
जगत का नहीं कोई धन चाहता हूँ
ना रह जाये मुझमें कोई मोह माया
प्रभु तुममें तल्लीन मन चाहता हूँ

करूँ अब वही जोकि तुम चाहते हो
मैं चाहों का अपनी दमन चाहता हूँ
जहाँ चित्त हो चंचल जगत के सुखों में
वहां पर में उसका शमन चाहता हूँ

ना पूछो ये मुझसे मैं क्या देखता हूँ
मैं तेरी नजर में हरि देखता हूँ
ख़ुशी और गमी सब बराबर है मुझको
मैं सबमें ही तेरी रजा देखता हूँ

मिटे जिस तरह से ये भवदुःख बंधन 
मैं ऐसा ही साधन भजन चाहता हूँ 
नहीं दिख रहा है कोई अब किनारा 
गुरु अब तुम्हारी शरण चाहता हूँ