Thursday, 18 December 2025

जन्मदिन पर बधाई

आओ मिल गाएं देवें बधाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

दादा दादी देखो लाड लड़ावैं
मन ही मन राजी हुए जावैं
गीत गवाएं बांटें मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

नाना नानी का मन हर्षाया
सुंदर सा उपहार दिलाया
दिया उपहार बांटें मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

मात पिता फूले ना समावैं
घर में भगवत कीर्तन करावैं
बांटें प्रसाद में फल और मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

उज्ज्वल भविष्य हो बालक का
ध्यान धरे नित जग पालक का
प्रभु पथ का "शुभ" बने अनुयायी
खुशियां मनाएं देवें बधाई

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Sunday, 14 December 2025

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

चाहे तीरथ में जाकर दर्शन करो
मनचाही से जितना सुमिरन करो
प्रभु आये नहीं चिंतन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

लाख गंगा नहा तन साफ़ किये
मात गंगा ने पाप सब माफ़ किये
जब  मन ना लगेगा सुमिरन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

धन दौलत कमाना बुरी बात नहीं
रिश्तों को निभाना बुरी बात नहीं
आये अहंकार जिस मन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

जिसने सत्संग का नित्य सहारा लिया
हरि चरणों में उसे आसरा मिल गया
प्रभु वास करें "शुभ" मन में
उसका ही मन लगेगा भजन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Wednesday, 10 December 2025

काहे को इतना करे अभिमान

अपना अहम् तज बन इंसान
काहे को इतना करे अभिमान
तेरी करनी को देख रहे भगवान
काहे को इतना करे अभिमान

समय चक्र चलता जायेगा
रोके से ना रुक पायेगा
अच्छा बुरा जैसा कर्म करेगा
प्रभु से ना कुछ छुप पायेगा
जान के खुद ना बन नादान
काहे को इतना करे अभिमान

जिनके लिए सब बंधन पाले
सुख उनको खुद खाये निवाले
धर्म कर्म सब ताक पे रखकर
बिन भय कर्म करे मतवाले
संग चले ना दुकान ना मकान
काहे को इतना करे अभिमान

रावण ने अभिमान था पाला
सीता माँ को था हर डाला
प्रभु राम से बैर था पाला
लंका को धूमिल कर डाला
राज मिटा और गया सम्मान
काहे को इतना करे अभिमान

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 6 December 2025

आ राम की शरण में और राम राम कर

आराम यदि चाहता तो एक काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

बंधन यदि लगे दुनिया के लोक लाज
इतिहास देख ले क्या देता ये समाज
सेवा को ध्येय बनाकर निष्काम काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

जीवन है ये उधारी देना पड़े हिसाब
इच्छाएं पूरी करने को देखे बड़े ख्वाब
ना काम आये दौलत हरि नाम जाप कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

कर गर्व अपने ऊपर तू जन्मा सनातन
देवों की संस्कृति है ये सबसे पुरातन
गुरुओं के "शुभ" वचनों को आत्मसात कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

अक्सर जो हम चाहते वो होता नहीं है
होता है जो अक्सर वो भाता नहीं है
भा जाए जो प्रभु को "शुभ" वही काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"


Tuesday, 2 December 2025

ऐसी कृपा करो गुरु मेरे

ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मैं बालक हूँ तुम मेरे दाता 
मैं नादान तुम हो विधाता
तेरा साया रहे सर पे मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मेरे जीवन में था जब अँधेरा
तब पाया सहारा मैंने तेरा
करके रौशनी मिटाये अँधेरे 
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

कई जन्मों से सुध बुध खोई
अपनी पहचान मैंने थी खोई 
आके बंधन तुम्हीं काटो मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

चरणों का दास रहूँ मैं
प्रभु सदा तेरे पास रहूँ मैं
"शुभ" रहे गुरुवर के चेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

इस जग में कोई नहीं अपना
ये जीवन तो है एक सपना
झूठी माया ने डाले डेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मिले संतों का संग हमेशा
नहीं पनपे काम क्रोध क्लेशा 
इसने कष्ट दिए बहुतेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

पूजन मंत्र


नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम्।
प्रणामो दुःख शमनः तम नमामि हरिं परम्।।

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावर दण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकर प्रभृतिभिर्देंवै: सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।स्वस्ति नो ब्रिहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Saturday, 22 November 2025

मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले
नाम जपने की आदत बना ले

कौन धड़कन को तेरी चलाये रे मन
कौन सोये हुए को जगाये रे मन
कौन खाये हुए को पचाये
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

पुण्य तेरा बढे जब सत्संग मिले
राम रहमत करे तब सतगुरु मिले
रब से मिलने की रीति सिखाले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

भक्ति करके भी कुछ ना मिलेगा रे मन
जो तू मनमानी अपनी करेगा रे मन
आके सत्संग में संशय मिटा ले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

पूज्य बापू को सतगुरु बना ले रे मन
गुरु चरणों में मस्तक झुका ले रे मन
जो खोया उसी को तू पाले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले
कीर्तन श्रंखला

1. राघनंदन राघव राम हरे सियाराम हरे सियाराम हरे

2. 

गुरु कहने से तर जायेगा - Part 2

गुरु कहने से तर जायेगा, गुरु रहमत से रब पायेगा
गुरु शरणी अगर आएगा, पार भव से उतर जायेगा

गुरु वाणी को घर-घर पहुंचा, ज्ञान गंगा में सबको नहला
तभी खुद से तू मिल जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

जरा इस दर पे आकर तो देख, कभी सर को झुका कर तो देख
तेरा जीवन संवर जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

इनके दर्शन की महिमा बड़ी, इतनी "शुभ" होती वो घडी
तेरा दिल भी यही गाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

तू तमन्ना किसी की ना कर, बस ह्रदय में गुरु ध्यान कर
बिन मांगे तू सब पाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

ये दयालु है दाता मेरे, ये तो सबके दिलो में बसे
इनके दर पे तू सब पाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

इनकी करुणा का वर्णन नहीं, ऐसी शांति ना मिलती कहीं
जो भी आया संवर जाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

खुश रहने की आदत बना, सब जीवो का कर तू भला,
हर कोई तुझको ही चाहेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

पधारो भोग लगाओ सरकार


पधारो भोग लगाओ सरकार -2
हे अविनाशी घट-घट वासी
भोग करो स्वीकार  
पधारो भोग लगाओ सरकार -2

भक्तों ने "शुभ" भाव से परोसा
मन में सबके है पूर्ण भरोसा
प्रभु विनती करोगे स्वीकार
पधारो भोग लगाओ सरकार

राम रूप आना श्याम रूप आना
शिव रूप आना ब्रह्म रूप आना
प्रभु जीमों संग परिवार
पधारो भोग लगाओ सरकार

माता रूप आना भ्राता रूप आना
बन्धु रूप आना बाल रूप आना
चाहे निराकार साकार
पधारो भोग लगाओ सरकार

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 17 November 2025

निर्वाण षट्कम

मनोबुद्ध्यहङ्कार चित्तानि नाहं
न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे ।
न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥१॥

न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुः
न वा सप्तधातुः न वा पञ्चकोशः ।
न वाक्पाणिपादं न चोपस्थपायु
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥२॥

न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ
मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः ।
न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥३॥

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं
न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञाः ।
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥४॥

न मृत्युर्न शङ्का न मे जातिभेदः
पिता नैव मे नैव माता न जन्मः ।
न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्यं
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥५॥

अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो
विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् ।
न चासङ्गतं नैव मुक्तिर्न मेयः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥६॥

Saturday, 15 November 2025

समय का पहिया चलता है

समय समय पर होत है, समय समय की बात
एक समय का दिन बड़ा, और एक समय की रात
सदा रंक नहीं रहे सदा, मृदंग ना बाजे ताल
सदा धूप नहीं छाँव, और सदा इंद्र नहीं गाज
सदा यौवन नहीं धीर नहीं, सदा ना काला केश
बेताल कहे विक्रम सुनो, सदा ना राजा देश

समय का पहिया चलता है
इस पहिये के साथ किसी का भाग्य बदलता है
समय का पहिया चलता है

लख घोडा लख पालकी लख, सिर पर छतर धरे
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र देखो, नीच घर नीर भरे
उस राजा का लाल भी देखो .....
बिन कफ़न के जलता है
समय का पहिया चलता है

भरी सभा में द्रुपत सुता को लाया अभिमानी
भीष्म द्रोण लाखो समझाए, एक नहीं मानी
वह दुर्योधन समर भूमि में .....
तिल तिल मरता है
समय का पहिया चलता है

तुलसी नर की क्या बड़ाई, समय बड़ा बलवान
समय के चलते अवध छोड़ खुद, वन वन भटके राम
चार चार सुत पर दशरथ खुद .....
विरह में मरता है
समय का पहिया चलता है

Sunday, 12 October 2025

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 5

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

सर्व कला भरपूर हो स्वामी, सकल घटा के अंतर्यामी
तू ही घट-घट में बसने वाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

मित्र सुदामा को गले लगाया, नयन नीर से चरण धुलाया
तूने दिव्य उदाहरण रच डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

राम जनम जब तुमने लिया था, हनुमत अपना सेवक किया था
तूने रावन को ही मिटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 4

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

भक्त नरसी का भात भराया, भक्त के कारन दौड़ा आया
तू भाई बना भात लाया रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

विश्वगुरु तुझे ये जग कहता, सच्चिदानंद तेरे नाम को जपता
तू ही हम सबका है रखवाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

अनगिन तेरे उपकार कन्हैया, कौन सका है उतार कन्हैया?
तुझे भक्तों ने वश में कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

“शुभ” को अपना दास बना लो, अन्तः करण में वास बना लो
तुझे अर्पण करूँ भाव माला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 3

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

भरी सभा द्रोपदी पुकारे, लाज बचाओ भ्राता प्यारे
तूने चीर अनंत बढ़ा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रणभेरी जब बजने लगी थी, कौरव-पांडव सेना लड़ी थी
तूने गीता अमृत दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

ध्रुव की कथा विलक्षण भारी, देती शिक्षा भक्ति की न्यारी
तूने नभ स्थान ही दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

पुष्प-कुञ्ज चरणों में चढ़ाएं, "शुभ" दर्शन तेरे प्रभु हम पायें
करो इतनी कृपा हे जगपाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 2

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

सखियन की आँखों के तारे, मात यशोदा नन्द दुलारे
बड़े लाड-प्यार से है पाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

छछियन भरी मटकी पे नाचे, छोटे पग में नुपुर साजे
तूने हर एक मन को हर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

ज़हर का प्याला राणा जी ने भेजा, पिया ज़हर मीरा ने ना सोचा
तूने विष को अमृत कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

शिशुपाल दिए जा रहा गाली, गिनती सौ तक गिन रहे खाली
फिर धड से शीश हटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 3

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥

हरि नाम का खजाना, भीतर दिखा रहे हो
जिसे ढूंढते हैं बाहर, ख़ुद में बता रहे हो
बिन सदगुरु के बन्दे, इसको ना साध पाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

तेरे दरश का प्यासा, मनवा ये रो रहा है
कैसे संभालूँ इसको, सुध अपनी खो रहा है
नैनों से बहते मोती, छुपते नहीं छुपाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

"शुभ" दोनों हाथ फैले, सदगुरु तुम्हारे आगे
नश्वर की नाही इच्छा, भक्ति प्रभु की मांगे
ऐसी अवस्था ला दो, हम ब्रह्मज्ञान पायें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

मेरी हैसियत ही क्या थी, जो तुम ना साथ होते
जीवन ये जा रहा था, कभी हँसते कभी रोते
समता के पाठ तुमने, अदभुत दिए सिखाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 2

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥

हमने तो है ये माना, तुझमे मेरी रजा है
जिस हाल में तू राखे, उसमे हमें मजा है
तकलीफ छोटी देकर, बड़े कष्टों से बचाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

तेरी करूँ मैं सेवा, अब आस ये ही रखता
मुक्ति मिले कुछ ऐसा, दिखला दो "शुभ" रस्ता
जीवन-मरण का झंझट, अब रास नाही आये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

मेरी चपल गति को, गुरुवर विराम दे दो
सब वासना मिटा कर, अपना ही ध्यान दे दो
मेरा मन मेरे ही, वश में नाही आए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

प्रभु प्रीत का ये मीठा, अनुभव हुआ है प्यारा
बेकार जाता जीवन, तुमने प्रभु संवारा
अन्तर का तम मिटाकर, जगमग ज्योत जगाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 3 May 2025

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 4

 नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

जो कुछ दीखता है रहेगा ना सब दिन 
कहाँ तक यहाँ मन फंसाते रहेंगे 
गुरु चरणों में ही ये मन को लगाकर 
सदा शांति आनंद पाते रहेंगे 

बड़े से बड़ा अब यही काम करना 
चपल मन को आधीन रख कर विचारना 
दुखों से ना डरना अटल धैर्य रखना 
कहीं भी नहीं पाप पथ पर उतरना 

उठो शीघ्र ममता से मुख मोड़ करके 
बढ़ो कामना जाल को तोड़ करके 
जो कुछ मन से पकड़ा उसे छोड़ करके 
जियो एक हरि से लगन जोड़ करके 

शुभेक्षु,
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 3

 नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

तुम्हें पाके हमने जहाँ पा लिया है 
जमीं तो जमीं आसमां पा लिया है 
अब मन में गुरु नाम की ही रटन हो 
ह्रदय में धरें ध्यान गुरुवर तुम्हारा 

कृपासिंधु गुरुवर जो कुछ कह रहे हैं 
वो वाणी भुलाने के काबिल नहीं है 
बड़े भाग्य से ऐसा अवसर मिला है 
निरर्थक बिताने के काबिल नहीं है 

मेरे बिगड़े जीवन को तुमने बनाया 
मेरे सब विकारों को तुमने मिटाया 
ये कैसा है जादू समझ में ना आया 
तेरे प्यार ने हमको जीना सिखाया 

किरपा तुम्हारी जो पाते रहेंगे 
विवेकी स्वयं को बनाते रहेंगे 
मिलेगी नहीं शांति उनको कहीं भी 
जो परमात्मा को भुलाते रहेंगे 

कहीं तुच्छ अभिमान आने ना पाए 
असत्य दृश्य सत्य से डिगाने ना पाए 
ये सुख दुःख मन को भुलाने ना पाए 
कहीं भी समय व्यर्थ जाने ना पाए 

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 2

नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

मेरे मन के मंदिर में गुरुवर तुम्हारी 
कृपानाथ ज्योति सदा जगमगाये 
तेरे दर पे आये हैं बन के पुजारी 
नहीं भाव भक्ति का कम होने पाए 

अब प्रभु कृपा करहुं एही भांति 
सब तजि भजन करहुं दिनु राति 
हमें देना अनुराग अर्जुन की भांति 
शयन में भी जिव्हा रहे गुनगुनाती 

सेवा की महिमा समझ हमको आये 
ये जीवन सदा सेवा में ही बिताये 
कभी भूल कर भूल होने ना पाए 
कभी भाव सेवा का मन से ना जाये 

मन में कभी ना अहंकार आये 
तेरे चरणों का ध्यान खोने ना पाए 
रहे श्वाश चलती तन में तभी तक 
हर एक श्वाश गुणगान तेरा ही गाये 

विश्वास मन का ये जाने ना पाए 
गुरुवर के हम हैं गुरुवर हमारे  
तुम्हारे अलावा गुरूजी जगत में 
नहीं कोई नैया हमारी उतारे 



Thursday, 1 May 2025

श्री मन्न नारायण नारायण - Part 1

नारायण नारायण श्री मन्न नारायण नारायण नारायण

बनाई है किस्मत तेरे पास आके
मुझे तुमने दे दी नयी जिंदगानी
तेरे नाम का आसरा मिल गया है
है करतार तेरी बड़ी मेहरबानी

तुम्हीं को मैं आनंदघन चाहता हूँ
जगत का नहीं कोई धन चाहता हूँ
ना रह जाये मुझमें कोई मोह माया
प्रभु तुममें तल्लीन मन चाहता हूँ

करूँ अब वही जोकि तुम चाहते हो
मैं चाहों का अपनी दमन चाहता हूँ
जहाँ चित्त हो चंचल जगत के सुखों में
वहां पर में उसका शमन चाहता हूँ

ना पूछो ये मुझसे मैं क्या देखता हूँ
मैं तेरी नजर में हरि देखता हूँ
ख़ुशी और गमी सब बराबर है मुझको
मैं सबमें ही तेरी रजा देखता हूँ

मिटे जिस तरह से ये भवदुःख बंधन 
मैं ऐसा ही साधन भजन चाहता हूँ 
नहीं दिख रहा है कोई अब किनारा 
गुरु अब तुम्हारी शरण चाहता हूँ 

Monday, 28 April 2025

पूजन मंत्र

आचमन:
पूजा शुरू करने से पहले आचमन करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। आचमन में जल से शुद्धि की जाती है, जिससे मन और शरीर को शुद्ध किया जा सके.

मंत्र:
आचमन करते समय, "ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ हृषीकेशाय नम:" मंत्रों का उच्चारण किया जाता है.

आचमन के बाद, "ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा" मंत्र बोला जाता है.

पूजा शुरू करने से पहले, भगवान गणेश को प्रणाम करने और "ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्रीमन्यहा गणाधिपतये नम:" मंत्र का जाप करने की भी सलाह दी जाती है.


मीठे रस से भरीयो री

मीठे रस से भरीयो री, राधा रानी लागे
मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे

यमुना मैया कारी कारी, राधा गोरी गोरी
वृन्दावन में धूम मचावे, बरसाने की छोरी
ब्रजधाम राधा जु की, रजधानी लागे
मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे

ना भावे अब माखन मिसरी, और ना कोई मिठाई
जीबड़या ने भावे अब तो, राधा नाम मलाई
वृषभानु की लली तो, गुड़धानी लागे
मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे

कान्हा नित मुरली मे टेरे, सुमरे बारम्बार
कोटिन रूप धरे मनमोहन, कोई ना पावे पार
राधा रूप की अनोखी, पटरानी लागे
मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे

राधा राधा नाम रटत है, जो नर आठों याम
उनकी बाधा दूर करत है, राधा राधा नाम,
राधा नाम में सफल, जिंदगानी लागे
मने कारो कारो, जमुना जी रो पानी लागे

प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना - Part 3

प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 
अपने चरणों में हमको रख लो ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

माना तेरी राह पे चलना है मुश्किल 
चलता रहा जो पाई है मंजिल 
हमें बीच राह मत छोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

साधु संतों की संगत देना 
अपने नाम की रंगत देना 
हमें सत्संगति से जोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना  

तुम चन्दन मैं विष से भरा हूँ 
याचक बन कर दर पे खड़ा हूँ 
मुझमें नहीं विष छोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

तुम अनादि अनंत अविनाशी 
धाम अयोध्या मथुरा काशी 
मेरे मन को धाम बनाओ ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" 

Friday, 21 March 2025

जब सर पे गुरु का हाथ

जब सर पे गुरु का हाथ हो हाथ, मन अब तोहै चिंता काहे की
मन अब तोहै चिंता काहे की, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ ...........

वे अपनी शरण में लगा लेंगे, चरणों में तुझे बिठा लेंगे
सदगुरु जी कृपानिधान हो निधान, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ ...........

मेरे सदगुरु जी ब्रहमा विष्णु हैं ,मेरे गुरु जी राम और कृष्ण जी है
सदगुरु जी शिव नटराज नटराज, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ ...........

मेरे सदगुरु जी मथुरा काशी है, मेरे बाबा संत अविनासी है
मेरे गुरु हैं तीरथराज हो राज, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ...........

मेरे गुरु जी बड़े दयालु है मेरे गुरुवर बड़े कृपालु है
तेरे बन जाये बिगड़े काज हो काज, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ..............

क्यों इधर उधर तू भटक रहा, अब मान ले प्यारे गुरु का कहा
गुरु भव सागर के जहाज हो जहाज, मन अब तोहै चिंता काहे की
जब सर पे गुरु का हाथ ...........

मैं तो जपूँ सदा तेरा नाम सदगुरु

मैं तो जपूँ सदा तेरा नाम सदगुरु दया करो
दया करो कृपा करो, कृपा करो रहम करो

द्वार पे आये भक्त तुम्हारे, अपनी दया के खोलो द्वारे
मेरे पूरण हो सब काम, सदगुरु दया करो

भजन कीर्तन गाऊं तेरा, निशदिन पाऊं दर्शन तेरा
मेरे कृष्ण कृष्ण मेरे राम, सदगुरु दया करो

मन मन्दिर में ज्योत जगा दो, मुझको अपना तुम रूप दिखा दो
मुझे पंहुचा दो निज धाम, सदगुरु दया करो

साधु सन्त की संगति देना, अपने नाम की रंगति देना
मुझे अपना बना लो मेरे राम, सदगुरु दया करो

रब मेरा सतगुरु बन के आया

रब मेरा सतगुरु बन के आया, मैनू वेख लेण दे।
मैनू वेख लेण दे, मथ्था टेक लेण दे॥

बूटे बूटे पानी पावे, सूखे बूटे हरे बनावे।
नी ओ आया माली बन के, मैनू वेख लेण दे॥

जिथ्थे वी ओह चरण छुआवे, पत्थर वी ओथे पिघलावे।
नी ओह आया तारणहारा, मैनू वेख लेण दे॥

गुरां दी महिमा गाई ना जाए, त्रिलोकी इथे झुक जावे।
नी ओ आया पार उतारण, मैनू वेख लेण दे॥

ब्रह्म ज्ञान दी मय पिलावे, जो पी जावे ओह तर जावे।
एह ब्रह्म दा रस स्वरूप, मैनू वेख लेण दे॥

गुरां दी सूरत रब दी सूरत, कर दे मुरादे सब दी पूरण ।
नी ओह रब दा पूरण स्वरूप, मैनू वेख लेण दे॥

गुरां दी चरनी तीरथ सारे, मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे।
नी ओह आया पार उतारण, मैनू वेख लेण दे॥

जनम मरण दे चक्क्कर कटदे, जेहड़े इसदे दर दे झुकदे।
नी ओह रब दा पूरण रूप, मैनू देख लेण दे॥

नाम दी इसने प्याऊ लगाईं, हरी ॐ नाल दुनिया झुमाई।
एहदे नाम दा अमृत पी के, मैनू वेख लेण दे॥

सत्संग एस दा बड़ा निराला, जीवन विच करदा है उजाला।
मेरे रब दा ज्योति स्वरूप, मैनू वेख लेण दे॥

प्रीत है उसदी बड़ी अनोखी, नाम दी दौलत कदे ना फुट्दी।
नी ओह आया जग नू झुमावन, मैनू वेख लेण दे॥

घट घट सब दे ज्योत जगावे, मोह माया दे भरम मिटावे।
एह मिठ्ठी निगाह बरसावे, मैनू वेख लेण दे॥

हरि ॐ दी बोली प्यारी, गंगा जी वी बनी पुजारी।
सब तीरथ होए निहाल, मैनू वेख लेण दे॥

प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना - Part 2

प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 
अपने चरणों में हमको रख लो ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

तेरी मेरी प्रीत की है अजब कहानी 
तुमने है जानी या हमने है जानी 
"शुभ" रिश्ता कभी मत तोडना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

जैसा तू चाहे वैसा हमको रखना 
अर्पण तेरा तुझको ना कुछ अपना 
मुझसे कभी ना मुख मोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

मैं तेरे द्वारे सुनकर आया 
जो भी आया उसने है पाया 
खाली मुझे मत मोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

लेकर नाम हुई मीरा दीवानी 
सबने पढ़ी सुनी उनकी कहानी 
ऐसी करके दीवानी मत छोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना 

साधु संतों की संगत देना 
अपने नाम की रंगत देना 
हमें सत्संगति से जोड़ना 
प्रभुजी मेरी छोटी अरज सुन लो ना  

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" 

Tuesday, 11 March 2025

जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में

जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में
झूठा है यह संसार भजन कर दुनिया में

बड़े भाग्य से नर तन पाया
इसमें भी हरि गुण नहीं गाया
किया ना प्रभु से प्यार, भजन बिन दुनिया में
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

माया ने तुझको बहकाया
संग चले ना तेरी काया
क्यों बनता होशियार, भजन बिन दुनिया में
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

धन दौलत और महल खजाने
जिनको मूरख अपना जाने
जायेगा हाथ पसार, भजन बिन दुनिया से
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

क्या लेकर तू आया जग में
क्या लेकर तू जायेगा संग में
रे मत मंद गवार, भजन बिन दुनिया में
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

यम के दूत तुझे लेने को आए
रो रो डरके तू चिल्लाए
तोहे पड़े करारी मार, भजन बिन दुनिया में
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

अपने गुरु की शरण में जाओ
जीवन अपना सफल बनाओ
तब होगा उद्धार, भजन कर दुनिया में
जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में

साखियाँ

साखियाँ

संतों की वाणी सुनो, हो जाये कल्याण
ज्ञान खजाना पाना हो, तो संत ज्ञान की खान

भला बुरा जो भी हुआ, गुरु चरणों में डाल
हे साधक संसार में, तेरा बांका हो ना बाल

हरि नाम को सुमिर ले, यही जगत में सार
बिन हरि और गुरु नाम के, भूमि पर हो भार

बन जाओ छे सूरमा, बनों या मालामाल
सद्गुरु भक्ति नहीं दिल में, तो सबसे बड़े कंगाल

गुरु ही तारक ब्रह्म हैं, गुरु ही शिव का रूप
गुरु के दिल में बना ले जगह, रंक से हो जा भूप

गुरु तत्व से प्यार करो, यही तत्व एक सार
इसी तत्व के हेतु से, होना है भव पार

दया करो मेरे सद्गुरुजी, करो दुखों का नाश
एक यही विनती करे, "शुभ" बालक तेरा दास

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः
मेरे मन की दुविधा दूर करो, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः
सद्ज्ञान का मन में नूर भरो, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

गुरुदेव ही सच्चा साथी है, हम सबका एक हिमायती है-2
गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः -2

भूलों को राह दिखाते हो, अज्ञान को ज्ञान बनाते हो
भगवान से तुम ही मिलाते हो, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

जो गुरु की सेवा करता है, निश्चित वो ज्ञानी बनता है
हर कला में पार उतरता है, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

जो गुरु की निंदा करता है, जो द्वेष भावना रखता है
वो कभी ना पार उतरता है, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

यह मंडल तुम्हें मनाता है, चरणों में शीश झुकाता है
"शुभ" दास तेरा गुण गाता है, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

जब दया दृष्टी हो जाती है, मंजिल खुद ही मिल जाती है
गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः, गुरुदेव नमः गुरुदेव नम:

गुरु भवबंधन कटवाता है, सारे पाप मिटाता है
गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

गुरु हरिदर्शन करवाता है, यम से जा टकराता है
गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः, गुरुदेव नमः गुरुदेव नमः

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा
गिरवरधारी रे दूर करो दुःख मेरा

जनम जनम का मैं हूँ भटका
बेड़ा आज भवर में अटका
पार करो बनवारी रे, दूर करो दुःख मेरा
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

सुना है जो तेरी शरण में आवे
उसके दुखड़े सब मिट जावे
मैं आई शरण तिहारी रे, दूर करो दुःख मेरा
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

सारी दुनिया की ठुकराई
अब तो तेरी शरण में आई
मेरी लाज रखो बनवारी रे, दूर करो दुःख मेरा
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

शबरी अहिल्या गणिका नारी
सब ही तुमने पार उतारी
आयी मेरी बारी रे, दूर करो दुःख मेरा
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

मोर मुकट पीताम्बर धारी
संग में है श्री राधा प्यारी
दोनों की बलिहारी रे, दूर करो दुःख मेरा
श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

शिव भोले और गिरधारी

शिव भोले और गिरधारी, दोनो हैं जग हितकारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक दुख से छुड़ाते, एक पार लगाते

मोहन तो मधुबन में मिलते काशी में कैलाशी
अधम उधारन कहलाते है वो घट घट के बासी
एक पहने है पीताम्बर, एक ओढ़े है बाघम्बर
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक जगत से तारे, एक भव सिंधु तारे

द्रोपदी की सुन टेर कन्हैया आकर चीर बढ़ाये
काल बली का वध करने को शिव त्रिसूल उठाये
एक चक्र सुदर्शन धारी, एक भोले हैं भंडारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
जब भक्त बुलाते, दोनो दौड़े दौड़े आते

प्रेम के भूखे हैं वो भक्तों भोले और नटनागर
भक्ति भाव से मिलते है, भक्तों को वो करुणाकर
एक राधा के बनवारी, एक गौरा के त्रिपुरारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक योगी महा ज्ञानी, एक औघड़ महा दानी

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

पाँव में घूंघरु बांध के नाचे
राम जी का नाम इसे प्यारा लागे
राम ने भी देखो इसे खुब पहचाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्रीराम का
लगता हैं पहरा वहाँ वीर हनुमान का
राम के चरण में हैं इनका ठिकाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

नाच नाच देखो श्रीराम को रिझाये
हनुमत रात दिन नाचता ही जाये
भक्तों में भक्त बडा दुनियाँ ने माना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा
तेरे द्वारे का है अजब नजारा

तुम बिन कोई ना हमको भाये
गुरुवर हम तेरा ही गुण गायें
कर दो बेडा पार हमारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

मिलती रहे गुरु सत्संग सेवा
इससे बड़ी नहीं कोई मेवा
सत्संग ही बस एक सहारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

भक्ति भाव के वचन सुना दो
ज्ञान गंगा में हमें डुबा दो
लाखों को तुमने पार उतारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

दर्शन बिन रहें अंखिया प्यासी
नैनों में छायी रही उदासी
दर्श को तरस रहा जग सारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

नियम मेरा गुरु कभी ना छूटे
चाहे दुनिया ये मुझसे रूठे
"शुभ" चरणों का मैं दास तुम्हारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे
देव हमारे गुरुदेव हमारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रह्लाद भगत को
खम्ब फाड़ हिरण्याकश्यप मारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु भगत विभीषण
लंका जारि निशाचर मारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु द्रुपदसुता को
खींचत चीर दुशासन हारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु मीराबाई को
जहर के प्याले अमृत कर डाले
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु नरसी भगत को
भात भरन प्रभु आप पधारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु बलि राजा को
चार मास द्वारे पर ठारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

भक्तों को अपने कबहुँ मिलोगे
टप-टप टपके नयन हमारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

Tuesday, 25 February 2025

शिव भजन - हे त्रिपुरारी - भाग 3

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
प्रभु जय हो तुम्हारी, भोले जय हो तुम्हारी

हे भीमेश्वर हे विश्वेश्वर
तुम सर्वव्यापी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे सत्य सनातन हे देव पुरातन
तुम हो ”शुभ”कारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे त्रिलोचन हे भस्मीभूतन
तुम मंगलकारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे अटल वैरागी हे सिद्ध योगी
तेरी नंदी सवारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे चंद्रशेखर हे भोले महेश्वर
तुम गंगाधारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

शिव भजन - हे त्रिपुरारी - भाग 2

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
प्रभु जय हो तुम्हारी, भोले जय हो तुम्हारी

हे स्वयं अकिंचन हे दुःख भंजन
तुम कल्याणकारी , प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे भूतनाथ हे सदा सनाथ
तुम विस्मयकारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे सहज वचन हर हे जलज नयन वर
तुम पापहारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे औढरदानी हे अकथ कहानी
तेरी महिमा न्यारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Saturday, 22 February 2025

तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा

तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा

अधरन तेरी मुस्कान है, शरणं हुआ ये जहान है
गुंजन हुआ "शुभ" गान है, आये धरा पर भगवान हैं
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

योगेश्वर धर्म प्रणेता, लोक लाडिले ब्रह्मवेत्ता
युग प्रवर्तक, ह्रदय विजेता, भाव की माला दास ये देता
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

मैं दीन हूँ तुम दीनानाथ, भक्तों के रहते हो साथ
सुनकर प्रभु करुण पुकार, धरती पर लीन्ह अवतार
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

तपती धरा का ताप मिटाने, निर्मम जनों को निर्मल बनाने
तमस हटाकर प्रकाश जगाने, धर्म सुवास चहुंओर फैलाने
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

शिव भजन - हे त्रिपुरारी - भाग 1

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
प्रभु जय हो तुम्हारी, भोले जय हो तुम्हारी

हे त्रिपुरारी हे विषधारी-२
तुम जग हितकारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे कैलाशी हे सब सुख राशि -२
तुम हो मदहारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे त्रयम्बकेश्वर हे रामेश्वर -२
तुम हो त्रिपुरारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे प्रलयंकर हे प्रेम सुधाकर
तुम नागधारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे नागेश्वर हे घुश्मेश्वर
तेरी नंदी सवारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Friday, 21 February 2025

हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना

हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना 
लागी लगन मत तोड़ना…….

खेती बोआई मैंने तेरे नाम की
मेरे भरोसे मत छोड़ना
हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना 

जल है गहरा नाव पुरानी
बीच भंवर मत छोड़ना
हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना 

तू ही मेरा सेठ है तू ही साहूकार है
ब्याज पे ब्याज मत जोड़ना
हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना 

दासी की विनती सुन लीजो 
मेरी बांह पकड़ मत छोड़ना 
हरि जी मोरी लागी लगन मत तोडना 

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" 


तेरे नाम अनेक तू एक ही है

हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा,
तेरे रूप अनेक तू एक ही है
हर देश में तू, हर भेष में तू ,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,

सागर से उठा, बादल बनके,
बादल से गिरा वर्षा बनके,
फिर नहर बनीं, नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार तू एक ही है,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,

चींटी से अणु परमाणु बना,
सब जीव जगत का रूप लिया,
कहीं पर्वत वृक्ष, विशाल बना,
सौन्दर्य तेरा तू एक ही है,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,

यह दिव्य दिखाया है जिसने
वह श्री गुरुदेव की पूर्ण कृपा
तुम व्यापे और ना कोई दिखा
बस मैं और तू दोनों एक ही हैं

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X(twitter): @abhimaitrey

Sunday, 16 February 2025

देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव

तर्ज - वादा ना तोड़ तू वादा ना तोड़

देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव
हमने मन मन्दिर बनाया
आकर तो देख देवाधिदेव
देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव

तीनों लोक रहते तेरे चरणों में देवा
हमको भी दे दो नाथ चरणों की सेवा
हम भी तर जाएँ बालक तेरे
भव सिंधु से, भव सिंधु से
देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव

औघड़दानी महाज्ञानी शम्भू निराले
सर्पों की माला गले में है डाले
तेरे नाम की जपूँ मैं माला
वरदान दे, वरदान दे
देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव

कैलाश बसते भोले नंदी सवारी
पार्वती मैया "शुभ" लगती हैं प्यारी
कार्तिक गणपत पुत्र तुम्हारे
परिवार में, परिवार में
देवाधिदेव हे महादेव, देवाधिदेव हे महादेव

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

सुन लो अरज हमारी मेरे बांके बिहारी

सुन लो अरज हमारी मेरे बांके बिहारी
बांके बिहारी मेरे मदन मुरारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी

हे नटखट तेरे नयन सयाने
देख देख हम हुए दीवाने
हो गयी तुम संग यारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी

हे छलिया तेरे छल में फँस गए
अधर रसीले जब भी हँस गए
मोहे हंसने की लगी बीमारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी

जादू भरी तेरी मुरली की तानें
पत्थर दिल भी लगते हैं गानें
सुध बुध खो जाये सारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी

"शुभ" तेरा गुणगान है करता
चरण शरण का ध्यान है धरता
सब पर कृपा तुम्हारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु

सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
सद्गुरु बनके मेरा तू आया प्रभु
जी करे तुझको जी भर के देखा करूँ
सारी उम्र मैं तेरी पूजा करूँ

वेदों पुराणों का सार तुम्हीं से
पाया जो हमने वो पाया तुम्ही से
ब्रह्मज्ञानी हो तुम, अंतर्यामी हो तुम
तेरी महिमा सदा मैं गाऊं प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु

चरणों में तेरे हम शीश झुकाएं
प्रेम और सभक्ति से "शुभ" गीत गायें
तेरी राह चलूँ, जो कहे वो करूँ
मेरा हर कर्म हो, तेरा पूजन प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु

अज्ञानता का तम मिटाया तुम्ही ने
सत्य का दीपक जलाया तुम्ही ने
भाव पार करें, बेडा पार करें
शरण में तेरी जो आया प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु

माया के बंधन तुमने हैं तोड़े
सत्संग सुनकर सत्य से जोड़े
भ्रम दूर भागते, आत्मज्ञान जगाते
ईश्वर को ह्रदय में दिखाते प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
नोट: इस भजन का मुखड़ा किसी अन्य रचनाकार का है परन्तु सभी अन्तरे लिखने का सौभाग्य मुझे मिला है।

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Friday, 3 January 2025

गुरु कहने से तर जायेगा - Part 1

गुरु कहने से तर जायेगा, गुरु रहमत से रब पायेगा
गुरु शरणी अगर आएगा, पार भव से उतर जायेगा

जरा सत्संग में आकर तो देख, हरि हरि ॐ गाकर तो देख
तेरा बंधन ही कट जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

तो ले दीक्षा तू होजा निहाल, पहले जैसा रहेगा ना हाल
मुकद्दर ही बदल जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

निगुरा जाने क्या गुरु का नशा, उसका मन तो विषयों में फंसा
वो ना सत्संग में आ पायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

गुरु दर्शन में क्या सुख छिपा, निगुरे प्राणी को ये ना पता
तत्व तेरा निकल जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

गुरु सेवा जिन्हें मिल गयी, उनकी किस्मत ही खुल गयी
वो अनमोल हो जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

गुरु विरहा में रोकर तो देख, हरि विरहा में रोकर तो देख
दामन खुशियों से भर जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा