सुन लो अरज हमारी मेरे बांके बिहारी
बांके बिहारी मेरे मदन मुरारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी
हे नटखट तेरे नयन सयाने
देख देख हम हुए दीवाने
हो गयी तुम संग यारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी
हे छलिया तेरे छल में फँस गए
अधर रसीले जब भी हँस गए
मोहे हंसने की लगी बीमारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी
जादू भरी तेरी मुरली की तानें
पत्थर दिल भी लगते हैं गानें
सुध बुध खो जाये सारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी
"शुभ" तेरा गुणगान है करता
चरण शरण का ध्यान है धरता
सब पर कृपा तुम्हारी मेरे बांके बिहारी
बलि बलि जाऊँ बलिहारी मेरे बांके बिहारी
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey
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