Saturday, 22 November 2025

मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले
नाम जपने की आदत बना ले

कौन धड़कन को तेरी चलाये रे मन
कौन सोये हुए को जगाये रे मन
कौन खाये हुए को पचाये
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

पुण्य तेरा बढे जब सत्संग मिले
राम रहमत करे तब सतगुरु मिले
रब से मिलने की रीति सिखाले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

भक्ति करके भी कुछ ना मिलेगा रे मन
जो तू मनमानी अपनी करेगा रे मन
आके सत्संग में संशय मिटा ले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले

पूज्य बापू को सतगुरु बना ले रे मन
गुरु चरणों में मस्तक झुका ले रे मन
जो खोया उसी को तू पाले
नाम जपने की आदत बना ले
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले
कीर्तन श्रंखला

1. राघनंदन राघव राम हरे सियाराम हरे सियाराम हरे

2. 

गुरु कहने से तर जायेगा - Part 2

गुरु कहने से तर जायेगा, गुरु रहमत से रब पायेगा
गुरु शरणी अगर आएगा, पार भव से उतर जायेगा

गुरु वाणी को घर-घर पहुंचा, ज्ञान गंगा में सबको नहला
तभी खुद से तू मिल जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

जरा इस दर पे आकर तो देख, कभी सर को झुका कर तो देख
तेरा जीवन संवर जायेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

इनके दर्शन की महिमा बड़ी, इतनी "शुभ" होती वो घडी
तेरा दिल भी यही गाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

तू तमन्ना किसी की ना कर, बस ह्रदय में गुरु ध्यान कर
बिन मांगे तू सब पाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

ये दयालु है दाता मेरे, ये तो सबके दिलो में बसे
इनके दर पे तू सब पाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

इनकी करुणा का वर्णन नहीं, ऐसी शांति ना मिलती कहीं
जो भी आया संवर जाएगा, गुरु कहने से तर जायेगा

खुश रहने की आदत बना, सब जीवो का कर तू भला,
हर कोई तुझको ही चाहेगा, गुरु कहने से तर जायेगा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

पधारो भोग लगाओ सरकार


पधारो भोग लगाओ सरकार -2
हे अविनाशी घट-घट वासी
भोग करो स्वीकार  
पधारो भोग लगाओ सरकार -2

भक्तों ने "शुभ" भाव से परोसा
मन में सबके है पूर्ण भरोसा
प्रभु विनती करोगे स्वीकार
पधारो भोग लगाओ सरकार

राम रूप आना श्याम रूप आना
शिव रूप आना ब्रह्म रूप आना
प्रभु जीमों संग परिवार
पधारो भोग लगाओ सरकार

माता रूप आना भ्राता रूप आना
बन्धु रूप आना बाल रूप आना
चाहे निराकार साकार
पधारो भोग लगाओ सरकार

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 17 November 2025

निर्वाण षट्कम

मनोबुद्ध्यहङ्कार चित्तानि नाहं
न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे ।
न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥१॥

न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुः
न वा सप्तधातुः न वा पञ्चकोशः ।
न वाक्पाणिपादं न चोपस्थपायु
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥२॥

न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ
मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः ।
न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥३॥

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं
न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञाः ।
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥४॥

न मृत्युर्न शङ्का न मे जातिभेदः
पिता नैव मे नैव माता न जन्मः ।
न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्यं
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥५॥

अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो
विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् ।
न चासङ्गतं नैव मुक्तिर्न मेयः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥६॥

Saturday, 15 November 2025

समय का पहिया चलता है

समय समय पर होत है, समय समय की बात
एक समय का दिन बड़ा, और एक समय की रात
सदा रंक नहीं रहे सदा, मृदंग ना बाजे ताल
सदा धूप नहीं छाँव, और सदा इंद्र नहीं गाज
सदा यौवन नहीं धीर नहीं, सदा ना काला केश
बेताल कहे विक्रम सुनो, सदा ना राजा देश

समय का पहिया चलता है
इस पहिये के साथ किसी का भाग्य बदलता है
समय का पहिया चलता है

लख घोडा लख पालकी लख, सिर पर छतर धरे
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र देखो, नीच घर नीर भरे
उस राजा का लाल भी देखो .....
बिन कफ़न के जलता है
समय का पहिया चलता है

भरी सभा में द्रुपत सुता को लाया अभिमानी
भीष्म द्रोण लाखो समझाए, एक नहीं मानी
वह दुर्योधन समर भूमि में .....
तिल तिल मरता है
समय का पहिया चलता है

तुलसी नर की क्या बड़ाई, समय बड़ा बलवान
समय के चलते अवध छोड़ खुद, वन वन भटके राम
चार चार सुत पर दशरथ खुद .....
विरह में मरता है
समय का पहिया चलता है