Saturday, 1 August 2026

भोले की फौज करती है मौज

भोले की फौज...! करती है मौज...!
बाबा के दीवानों की, मौज हर रोज़...!
बम-बम गूँजे जयकारे, झूमे सारी फौज।
भोले की फौज... करती है मौज।।

भगवा रंग में रंगी है टोली,
बम-बम बोले भोला-भोली।
कदम-कदम पर लगे भंडारे,
सेवा करती भक्तों की टोली।।
बम-बम गूँजे जयकारे, झूमे सारी फौज।
भोले की फौज... करती है मौज।।

सिर पर कांवड़, दिल में श्रद्धा,
चेहरे पर चमक निराली
पैर थकें तो थकने देना,
भोले भरेंगे सबकी झोली
बम-बम गूँजे जयकारे, झूमे सारी फौज।
भोले की फौज... करती है मौज।।

डम-डम बोले शिव का डमरू,
धम धम बजे ढोल
आगे-आगे नंदी बाबा
भक्त रहे हैं बोल
बम-बम गूँजे जयकारे, झूमे सारी फौज
भोले की फौज... करती है मौज

भक्ति का रंग चढ़ा निराला,
मन हुआ है मतवाला
महाकाल के प्रेम में डूबा,
कांवड़िया किस्मत वाला

काँधे पर "शुभ" कांवड़ रख ले ,
जपले शंभू का नाम
कठिन डगर भी सरल बनेगी,
बनेंगे बिगड़े काम
भोले की फौज...! करती है मौज...!
बम-बम गूँजे जयकारे, झूमे सारी फौज।
भोले की फौज... करती है मौज।।

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Friday, 24 July 2026

प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे
राम प्यारा कोई रे, प्रभु प्यारा कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

जब से मैने तुमको पाया
तुमने अपने गले से लगाया
तेरे जैसा मान बढ़ाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

तू मुझको प्राणों से प्यारा
मैने सबकुछ तुमको वारा
तेरे जैसा लाड़ लड़ाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

घर घर तेरा नाम जपाऊं
तेरी महिमा सबको सुनाऊँ
तेरे जैसा साथ निभाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

शिवजी महिमा जिनकी गाते
गुरुगीता में वचन सुनाते
भक्तों सा उन्हें प्यारा नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, गुरु प्यारा कोई रे

"शुभ" दर्शन दे दो मेरे गुरुवर
हमको मिल जाये सेवा का अवसर
तुम सम दीन दयाला नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे
राम प्यारा कोई रे, घनश्याम प्यारा कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे
 
जब से मैने तुमको पाया
तुमने अपने गले से लगाया
तेरे जैसा मान बढ़ाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

तू मुझको प्राणों से प्यारा
मैने सबकुछ तुमको वारा
तेरे जैसा लाड़ लड़ाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

घर घर तेरा नाम जपाऊं
तेरी महिमा सबको सुनाऊँ
तेरे जैसा साथ निभाया नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

शिवजी महिमा जिनकी गाते
कागभुशुण्डि जी कथा सुनाते
हनुमत सा उन्हें प्यारा नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

"शुभ" दर्शन दे दो रघुनंदन
हाथ जोड़ करूँ चरणों में वंदन
तुम सम दीन दयाला नहीं कोई रे
प्रेम से जपे नाम, राम प्यारा कोई रे

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Tuesday, 21 July 2026

गुरुदेवा रे! आया मैं तेरे द्वार रे

गुरुदेवा रे! आया मैं तेरे द्वार रे, प्रभु कर देना उद्धार रे


मन को बहुत मनाया मैंने, पर ये मुझसे ना माने
जग है सपना ना कोई अपना , इतनी बात ना जाने
"शुभ" मेरे कर दो विचार रे
गुरुदेवा रे! आया मैं तेरे द्वार रे, प्रभु कर देना उद्धार रे ....


लगन लगे तुमसे मेरे दाता, ऐसी कृपा कर देना
व्यसनों से रहूँ दूर हमेशा, भक्ति रस भर देना
तेरी दया पे मुझे विश्वास रे
गुरुदेवा रे! आया मैं तेरे द्वार रे, प्रभु कर देना उद्धार रे ....


जन्म मरण के साथी मेरे, साथ निभाते रहना
जब राहों में भटक मैं जाऊं, सही राह पर करना
मुझे तुझपे भरोसा अपार रे
गुरुदेवा रे! आया मैं तेरे द्वार रे, प्रभु कर देना उद्धार रे

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"




तुम भक्तों के हो भगवान्

तुम भक्तों के हो भगवान्, मेरे सतगुरु आशाराम
तेरे चरणों में चारों धाम, मेरे सतगुरु आशाराम
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम

ज्योत ज्ञान की तुम हो जगाते, अज्ञान सब दूर भगाते
तेरे मार्ग पर चलते रहें हम, अब तो करो कल्याण
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

काम क्रोध मद लोभ छुडाते, भोग वासना से हमें बचाते
तेरी भक्ति में लीन रहें हम, दे दो ये वरदान
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

गुरु शरण में जो आ जाते, भव बंधन से वो तर जाते
"सेवक" आये शरण तिहारी, कृपा करो भगवान्
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

महिमा तुम्हारी कैसे गाऊं?, लीला का मैं पार ना पाऊं
वाणी मेरी टूटी-फूटी, कर ना सकूं गुणगान
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

"शुभ" दर्शन बिन रहा ना जाये, याद प्रभु की निशदिन आये
नयनों से मेरे नीर छलकता, कैसे लूं इनको थाम?
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

ब्रह्मज्ञान का अमृत पाया, पाकर सारे जग में लुटाया
हमको भी मिल गए हैं छींटे, पाकर हुए निहाल
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" एवं रामबीर चौधरी

आरती बड दादा की कीजे


आरती बड दादा की कीजे, 
अपने मनोरथ पूरण कीजे ....

वृक्ष अनुपम तुम हो बाबा, 
चमत्कार परिपूर्ण हो बाबा
प्रेम से जो परिकम्मा कीजे, 
अपने मनोरथ पूरण कीजे ....

गुरु कृपा तुम पर बरसी है, 
शक्ति विलक्षण तुमको दी है
बिगड़े काज बना तुम दीजे, 
अपने मनोरथ पूरण कीजे ....

"शुभ" दर्शन जो तुम्हरे पाता, 
कर परिकम्मा ध्यान लगाता
गुरु कृपा से पूरा भीजे, 
अपने मनोरथ पूरण कीजे ....


रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Sunday, 12 July 2026

गुरुदेव कृपा कीजिए

गुरुदेव कृपा कीजिए -2
मुझे शरण बिठा लीजिए -2

मुझमें तो अभिमान भरा है
सब रोगों में ये रोग बड़ा है
मेरा अहम मिटा दीजिए
गुरुदेव कृपा कीजिए....

मैने सुना तुम दीनदयालु हो
भक्तजनों पर सदा कृपालु हो
मुझे दास बना लीजिए
गुरुदेव कृपा कीजिए....

रिश्ते नाते सब छूट जाते
अंत समय यमदूत जो आते
निज धाम बुला लीजिए
गुरुदेव कृपा कीजिए....

याद तुम्हारी हर पल आए
ऐसा "शुभ" अवसर बन जाये
ऐसा योग्य बना दीजिए
गुरुदेव कृपा कीजिए....

ॐ रं रं रामाय नमः
ॐ हुं हुं हनुमते नमः
गुरुदेव कृपा कीजिए....

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

सदगुरु प्यारे, देव निराले

सदगुरु प्यारे, देव निराले
तुम बिन मेरा कौन सहारा....
मुझको तू अपनाले
सदगुरु प्यारे, देव निराले

कभी सुख की सुबह होती
कभी दुख की शाम घनेरी
तेरा द्वारा मिला है जबसे
बदली किस्मत मेरी
डगमग होती जीवन नैय्या
तुम बिन कौन संभाले....
सदगुरु प्यारे, देव निराले....

माया का बंधन था गहरा
सदा रहा मैं जकड़ा
छूट गए सारे बंधन जबसे
तूने हाथ है पकड़ा
तुझमें "शुभ" विश्वास अटल
मेरे बंधन काटने वाले
सदगुरु प्यारे, देव निराले....

दर्शन को तेरे आती दुनिया
लाभ वही ले पाता
सच्चे मन से ध्यान धरे
"शुभ" मन से है बुलाता
मैं भी तेरा याचक हूँ
मुझको भी दर पे बुला ले
सदगुरु प्यारे, देव निराले .....

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 11 July 2026

हम आए गुरु जी के द्वार

हम आए गुरु जी के द्वार, जहाँ सत्संग की बहती बयार
बड़ा पावन द्वारा है ये, सद्ज्ञान का होता प्रसार

गुरुद्वार की महिमा स्वयं, भगवान सुनाते हैं
हमें मिला है "शुभ" अवसर, चलो मिलकर गाते हैं
जप तप नित करते रहो, होगा निश्चित उद्धार
बड़ा पावन द्वारा है ये, सद्ज्ञान का होता प्रसार


चिंता यदि है मन में, उसे त्याग के चिंतन कर
जब ब्रह्मज्ञानी हैं संग में, फिर काहे को लागे डर
ऐसे सदगुरु मिले हमको, जो हैं करुणा के भण्डार
बड़ा पावन द्वारा है ये, सद्ज्ञान का होता प्रसार


यहाँ सत्संग में मिलता हमें, संयम सदाचार का ज्ञान
सेवा सत्कर्मों से, मिट जाता है अभिमान
पकड़ के हाथ हमारा, सदगुरु करें भव पार
बड़ा पावन द्वारा है ये, सद्ज्ञान का होता प्रसार

रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरे सद्गुरु , अब आ जाओ

तर्ज: मेरे नयना सावन भादों, फिर भी मेरा मन प्यासा 

मेरे सद्गुरु , अब आ जाओ
तुम बिन कौन सहारा --- २
तेरे बिन जीवन है अधूरा
दिल से तुम्हें पुकारा
तुम बिन कौन सहारा --- २

जब मन तमस है छाया , तुमने दीप जलाया 
भटके हुए मेरे इस जीवन को, सच्चा मार्ग दिखाया
मैं ही समझ ना पाया .......
तेरी वाणी अमृत जैसी, भव से करे किनारा
तुम बिन कौन सहारा

तू ही ब्रह्मा तू ही विष्णु, तू ही है महादेवा
तेरे द्वारे देव पधारें, करते नित "शुभ" सेवा
ओ प्यारे गुरुदेवा ........
तुमसे है कण कण में जीवन, तुमसे जगत पसारा
तुम बिन कौन सहारा

तेरे लिए वैकुण्ठ भी क्या है, क्या बंधन संसारा
जहाँ करुणा की दृष्टि तू डाले, वही बसे सुख सारा
सब विधि खेल तुम्हारा .......
तेरे जैसा कोई दयालु, ढूंढ लिया जग सारा
तुम बिन कौन सहारा

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 9 July 2026

कांवड़िया क्या हाल है

भोले तेरा क्या हाल है, कांवड़िया क्या हाल है
गंगाजल काँधे पे उठाकर -2, हुआ तू मालामाल है .....
भोले तेरा क्या हाल है, कांवड़िया क्या हाल है

चिंता क्यों तुझे करनी है, बाबा में श्रद्धा रखनी है
भक्त तू महाकाल का है -2, जग में जो बेमिसाल है
भोले तेरा क्या हाल है, कांवड़िया क्या हाल है

मंजिल कितनी भी दूर सही, बाबा से तू दूर नहीं
"शुभ" इच्छा से नाम जपे जा -2, मेला ये हर साल है
भोले तेरा क्या हाल है, कांवड़िया क्या हाल है

पैरों के छाले देख ना रुकना, देख के दूरी तू ना थकना
बम बम भोले जपते जाना -2, मिट जाये सारे बबाल हैं
भोले तेरा क्या हाल है, कांवड़िया क्या हाल है

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"


Wednesday, 8 July 2026

सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
दूल्हे रघुराई जी दूल्हे रघुराई
आज जनकपुर बाजै बधाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

चहुँ दिशा आनंद है छाया
जनकपुर ने उत्सव मनाया
अवधपुरी ने उत्सव मनाया
भूल गए सब कोई चतुराई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

खुशियों की कोई सीमा नहीं है
कोई छोटा कोई बड़ा नहीं है
कोई निर्धन धनवान नहीं है  
सब मिलकर के बांटे मिठाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

ऋषि-मुनि देव सभी हरषाए
ब्रह्मा विष्णु शंकर भी आए
मिलकर सबने पुष्प बरसाए
देवों ने जय-जयकार लगाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

फूलों से सजी नगर की गलियाँ
झूम उठीं सखियाँ अलबेलियाँ
गूँज उठीं जयकारों से गलियाँ
हर मुख पर मुस्कान समाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई

'शुभ' गाए मंगल यह गाथा
राम-सिया का पावन नाता
जिसने प्रेम से नाम है गाया
उस पर कृपा करें रघुराई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
दूल्हे रघुराई जी, दूल्हे रघुराई

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

भोलेनाथ सदाशिव मेरे

मेरा सब कुछ भरोसे तेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे
मैं शरण पड़ा हूं तेरे
अपराध क्षमा करो मेरे

तुम अलख निरंजन भय भंजन
तेरे नाम से पापी करें क्रंदन
जपूं माला मैं शाम सवेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे
मेरा सब कुछ भरोसे तेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे

कण कण में सदाशिव तेरा वास है
तेरे भक्तों का तुझ में विश्वास है
रहें चरणों में सांझ सवेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे
मेरा सब कुछ भरोसे तेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे

"शुभ" दोनों हाथ फैला के खड़ा
मैं याचक तू है कृपालु बड़ा
रखो वरद हस्त सिर मेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे
मेरा सब कुछ भरोसे तेरे
भोलेनाथ सदाशिव मेरे

Thursday, 2 July 2026

डमरू वाला शिव डमरू वाला

जिसका आदि ना अंत, वो जग में अनंत
औघड़ दानी निराला .....
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला

रूप भयंकर बना के रहता
भूतो के संग मस्त है रहता
जिसका कोई ना सानी, वो है महादानी
पीवे विष का प्याला .....
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला

सावन की रुत आयी रे भैया
गंगाजल ले चले कावड़िया
"शुभ" द्वारे जोभी आये, गंगाजल से नहलाये
काटे कष्ट विकराला ......
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला

कैलाश पर्वत पे उसका बसेरा
भस्म रमा जोगी डाले है डेरा
वो है गजब बैरागी, नहीं ऐसा कोई त्यागी
जग में देव निराला ......
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला

गले में बाबा लिपटे भुजंगा
जटा से बहती पावन गंगा
नंदी सेवा में रहते, भक्त बोल बम कहते
"शुभ" जपे बंबं की माला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Wednesday, 1 July 2026

खाटू श्याम जाने को मन डोले

चला चला रे ड्राइवर, गाड़ी हौले हौले....
हौले हौले....
खाटू श्याम जाने को.... मन डोले....
खाटू श्याम जाने को.... मन डोले....

साँवरे का आया बुलावा .... साँवरे का आया बुलावा ....
हुआ बेकरार .....
दर्शन देने को मेरा बाबा, बैठा है तैयार ....
दर्शन देने को मेरा बाबा, बैठा है तैयार ....
चला चला रे ड्राइवर, गाड़ी हौले हौले....
हौले हौले....
खाटू श्याम जाने को.... मन डोले ....

हर पल "शुभ" याद सतावे.... हर पल "शुभ" याद सतावे....
जिया हुआ बेकरार ....
बन ठन कर है बैठा सांवरा, लेउं नजर उतार ....
बन ठन कर है बैठा सांवरा, लेउं नजर उतार ....
चला चला रे ड्राइवर, गाड़ी हौले हौले....
हौले हौले....
खाटू श्याम जाने को.... मन डोले ....


दानी बहुत हुए हैं जग में.... दानी बहुत हुए हैं जग में ....
तेरा दान निराला .....
होकर राजी कन्हैया ने, श्याम नाम दे डाला ....
होकर राजी कन्हैया ने, श्याम नाम दे डाला ....
चला चला रे ड्राइवर, गाड़ी हौले हौले....
हौले हौले....
खाटू श्याम जाने को.... मन डोले....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 29 June 2026

खाटू वाले तू संग मेरे चल

खाटू वाले तू संग मेरे चल 
मुश्किलों में भी मिलता है हल
मेरे दिल में ये आस जगी 
थम जाएगी तब हलचल 

जब भी मेरा मन घबराता 
दर्शन को तेरे दौड़ा आता 
खाटू वाले तू संग मेरे चल 
मुश्किलों में भी मिलता है हल

श्याम धणी है हारे का सहारा 
चिंता मिटाये लगाए किनारा
खाटू वाले तू संग मेरे चल 
मुश्किलों में भी मिलता है हल

ज्योत जगाय जो कीर्तन कराये 
बाहर पकड़ ले और पार लगाए 
खाटू वाले तू संग मेरे चल 
मुश्किलों में भी मिलता है हल

शुभ तेरे द्वार का सेवक हुआ है 
श्रद्धा बढ़ी है निर्मल हुआ है 
खाटू वाले तू संग मेरे चल 
मुश्किलों में भी मिलता है हल
मेरे दिल में ये आस जगी 
थम जाएगी तब हलचल 

रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 18 June 2026

सांवरा सेठ खाटू वाला

श्याम धणी की जय-जयकार, गूंजे सारा धाम रे
सांवरा सेठ को दिल से पुकारे, लेता हर कोई नाम रे
हारे का सहारा बाबा, सबका पालनहार रे
खाटू वाले श्याम के जैसा, देखा नहीं दातार रे


जिसका कोई नहीं जग में, उसका तू बन जाता है
रोते-रोते आने वाला, हँसता घर को जाता है
तेरे जैसा मिला ना दानी, ढूँढा हर एक गाम रे
श्याम धणी की जय-जयकार, गूंजे सारा धाम रे॥

ढोल बाजे, नगाड़ा बाजे, बाजे मुरली की तान है
ग्यारस का जब लागे मेला, उसकी गजब की शान है
श्याम प्रेमी "शुभ" उत्सव में, झूमे सारी शाम रे
श्याम धणी की जय-जयकार, गूंजे सारा धाम रे॥

मोरछड़ी की छाँव में बाबा, सारे संकट कटते हैं
हारे के सहारे बनकर, झोलियां सबकी भरते हैं
तेरी कृपा के चर्चे होते, सुबह दोपहर शाम रे
श्याम धणी की जय-जयकार, गूंजे सारा धाम रे॥

रिंगस से लेकर खाटू तक, भक्तों की कतार है
श्याम नाम की धुन में डूबा, सारा ये संसार है
जय श्री श्याम के नारों से, गूंजे चारों धाम रे
श्याम धणी की जय-जयकार, गूंजे सारा धाम रे॥

बोलो शीश के दानी की जय
खाटू नरेश की जय
हारे के सहारे की जय
सांवरा सेठ की जय
लखदातार की जय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 11 June 2026

भज मन राधे गोविन्द

हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द
दीन बंधू दुःख हारे , भज मन राधे गोविन्द
गोविन्द गोविन्द राधे, गोविन्द गोविन्द
हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द

तुम दीन बंधू हितकारी, सुन लो अरज हमारी
हे छलिया मुरली वाले, भज मन राधे गोविन्द
हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द

तुम गोवर्धन गिरधारी, करो भक्तों की रखवारी
हे लाज बचाने वाले, भज मन राधे गोविन्द
हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द

तुम कालिया मर्दन करते, नृत्य नाग पर करते
हे नाग नाथने वाले, भज मन राधे गोविन्द
हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द

तुम सबपे करुणा करते, "शुभ" ध्यान तुम्हारा करते
हे खेल खिलाने वाले, भज मन राधे गोविन्द
हे माधव हरे मुरारे, भज मन राधे गोविन्द

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Tuesday, 9 June 2026

श्री गणेश स्तुति - वक्रतुंड गजानन देवा

वक्रतुंड गजानन देवा, विघ्न विनाशक प्यारे।
गौरीनंदन, शिवसुत प्रभु, भक्तों के रखवाले॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

जय गणपति, जय गणनायक, जय मंगलकारी।
जय लंबोदर, जय एकदंत, जय विघ्नहारी॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

सिद्धिविनायक, बुद्धिप्रदाता, कृपा करो भगवान।
गजवदन, गिरिजा के नंदन, सुन लो मेरी तान॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

हे विनायक, हे गणाध्यक्ष, हे प्रथम पूज्य दयाला।
हे धूम्रवर्ण, हे भालचंद्र, भर दो सुख की माला॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

हे हेरम्ब, हे गजानन, हे उमासुत प्यारे।
हे महागणपति, हे गणराज, संकट हरने वाले॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

संकटनाशन, मंगलमूर्ति, रिद्धि-सिद्धि के स्वामी।
करुणा बरसाओ दीन जनों पर, अंतर्यामी॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

जय जय गणपति देव दयाला, जय गणराया।
तेरे नाम से "शुभ" हो हर कार्य, ऐसा वर पाया॥
बोलो गणपति बप्पा मोरया !
मंगल मूर्ति मोरया !!

(जयकारा)
गणपति गणेश की जय
विघ्नहर्ता गणेश की जय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 8 June 2026

हे लाल लंगोटे वाले

हे लाल लंगोटे वाले, हे राम भक्त मतवाले ...
हे लाल लंगोटे वाले, हे राम भक्त मतवाले ...
सब संकट काटो  SSS , भव पार लगा दो SSS हां SSS
सब संकट काटो  SSS, भव पार लगा दो 

तुम अंजनी माँ के लाला हो, तुम केसरीनंदन बाला हो ...
तुम अन्धकार को दूर करो, तुम करते जग उजियाला हो ...
मेरी बिगड़ी बना दो SSS , भव पार लगा दो SSS हाँ SSS
सब संकट काटो  SSS, भव पार लगा दो॥

तेरे ह्रदय विराजे राम सिया, दामन जिसका भी थाम लिया ...
उसकी डगमग नैया को भी, भवसागर से पार किया ...
मुझे राह दिखा दो SSS, भव पार लगा दो SSS हाँ SSS
सब संकट काटो SSS, भव पार लगा दो॥

तुम बूटी लेकर आए थे, लक्ष्मण के प्राण बचाए थे ...
रघुवर के "शुभ" सेवक बनकर, भक्तों के कष्ट मिटाए थे ...
मेरी अरजी संभालो SSS, भव पार लगा दो SSS हाँ SSS
सब संकट काटो SSS, भव पार लगा दो॥

तुम राम नाम के रसिया हो, भक्तों के मन बसिया हो ...
कलियुग में तेरे जैसा प्रभु, कोई नहीं खिवैया हो ...
मेरी लाज बचा लो SSS, भव पार लगा दो SSS हाँ SSS
सब संकट काटो SSS, भव पार लगा दो॥

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Sunday, 7 June 2026

जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा

जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा ।
जब मन ना धरेगा धीर, तो मनन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

बचपन खेल-कूद में बीता, यौवन माया में खोया ।
धन-दौलत के पीछे भागा, प्रभु नाम न संजोया॥
जब साँस ना हो अधीर, तो सुमिरन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा,
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

आज मिला है समय अमोलक, नाम प्रभु का गा ले ।
राधे-श्याम की शरण में आकर, जीवन सफल बना ले॥
जब डोलेगी तकदीर, तो चिंतन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

श्री राधा दया की सागर, श्री श्याम कृपा के धाम ।
जो इनके द्वार पे आया, पाया सुख और विश्राम॥
जब काँपन लगे शरीर, तो जपन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

अभी जप ले राधे-राधे, अभी जप ले  "शुभ"  घनश्याम ।
क्या जाने कब रुक जाएँ, जीवन की साँसें तमाम॥
जब अंतिम होगी पीर, तो कीर्तन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 1 June 2026

जय बोलो हनुमान की

श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
स्वामी करुनानिधान की, जय बोलो भगवान की
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

सभी दिशा गूंजे जयकारे, रक्षक हैं बजरंग हमारे
सभी दिशा गूंजे जयकारे, रक्षक हैं बजरंग हमारे
संकट काटन हार की, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करहुं गुरुदेव की नाईं
जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करहुं गुरुदेव की नाईं
जय हो ज्ञान के खान की, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

लंका में जा आग लगाई, रावण की थी सत्ता हिलाई
लंका में जा आग लगाई, रावण की थी सत्ता हिलाई
रामदूत बलवान की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

जिस पर कृपा तेरी हो जाये, उसके संकट पास ना आये
जिस पर कृपा तेरी हो जाये, उसके संकट पास ना आये
"शुभ" करुणा भंडार की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

रोम रोम में राम तुम्हारे, भक्ति बढे जो तुम्हे पुकारे
रोम रोम में राम तुम्हारे, भक्ति बढे जो तुम्हे पुकारे
अंजनी माँ के लाल की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Sunday, 24 May 2026

शिव शिव नमः शिवाय

शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

महाकाल तुम, हो त्रिकाल तुम -2
हे त्रिनेत्र धराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

तुम डमरू धारी, हो त्रिशूल धारी -2
हे नट राजाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

तुम भस्म रमैया, संग गौरा मैया -2
हे कैलाश बसाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

तेरा डमरू बाजे, बम भोला नाचे -2
नाचे सभी दिशाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

भूतों के स्वामी, तुम अंतर्यामी -2
हे नन्दीश्वराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

तुम "शुभ" करते, विघ्नों को हरते -2
हे विघ्नहराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय

जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Friday, 22 May 2026

आन मिलो भगवान हमारे

आन मिलो, सियाराम हमारे
आन मिलो, राधेश्याम हमारे
राम हमारे, श्याम हमारे
आन मिलो, भगवान हमारे

दरश दिये थे, केवट भगत को 
दरश दिये थे, केवट भगत को 
नाव पे चढ़कर, भाग्य सँवारे 
आन मिलो सियाराम हमारे

दरश दिये थे, शबरी माई को 
दरश दिये थे, शबरी माई को 
बेर खाने, प्रभु द्वार पधारे 
आन मिलो सियाराम हमारे

दरश दिये, प्रह्लाद भगत को
दरश दिये, प्रह्लाद भगत को
नरसिंह रूप ले, आप पधारे 
आन मिलो सियाराम हमारे

दरश दिये थे, मीरा बाई को 
दरश दिये थे, मीरा बाई को 
विष को अमृत, करने पधारे 
आन मिलो राधेश्याम हमारे

दरश दिये थे, द्रुपदसुता को
दरश दिये थे, द्रुपदसुता को
चीर बढ़ाने, सभा में पधारे 
आन मिलो राधेश्याम हमारे

दरश दिये थे, नरसी भगत को
दरश दिये थे, नरसी भगत को
भात भरन, घनश्याम पधारे
आन मिलो राधेश्याम हमारे

दरश दिए, अनगिन भगतों को 
दरश दिए, अनगिन भगतों को 
"शुभ" दर्शन की, बाट निहारे 
आन मिलो, सियाराम हमारे
आन मिलो, राधेश्याम हमारे

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 11 May 2026

बम-बम भोला, शंकर रखवाला

बम-बम भोला, शंकर रखवाला,
जिस पर तेरी कृपा हो जाए, जपे नाम की माला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥

भस्म रमाए, जटा में गंगा,
त्रिनेत्र धारी, हरें भव-जंजाला।
दीन-दुखी का तू है सहारा,
हर लेता दुख विकराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥

नीलकंठ तू, विष को पीकर,
जग को दिया अमृत का प्याला।
भोलेनाथ करुणा की धारा,
भक्तों पर प्रेम निराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥

कैलाशपति, गिरिजा के स्वामी,
भक्तों के प्रभु अंतर्यामी निराला।
"शुभ" द्वार जो शीश झुकाए,
गिरते को तू संभाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥

चंद्र सजे तेरे मस्तक ऊपर,
कंठ समाए विष काला।
काम क्रोध सब दूर भगाए,
तू ही जग का रखवाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥

रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 2 May 2026

ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे


ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे, 
छुप - छुप के सताना छोड़ दे

मुझे मालूम है मेरे दिल में बसा
देखूँ कैसे तुझे ज़रा ये भी बता
तेरी याद में रुलाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे

तेरी माया से जग को मैं देखता
तू खुद ना दिखे मेरी क्या है खता
आजा सामने तरसाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे

है ये तेरी कृपा तेरा नाम लिया
"शुभ" भावना भरी तुझे याद किया
या तो यादों में आना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे

तेरी करुणा से ही मुझे सत्संग मिला
करुणा-वरुणा सिंधु का ज्ञान मिला
सारे भेद छिपाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे

रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
3/May/2026

Wednesday, 15 April 2026

परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शुभकामनायें


एक अभिभावक के हृदय से निकले उद्गार

विद्यार्थी जीवन की पहली सीढ़ी, तुमने हँसकर पार की,
परिश्रम की "शुभ" राह पर, अपनी पहचान संवार ली।

अब आगे का पथ है विस्तृत, सपनों से भी और विशाल,
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।

एकाग्र मन, दृढ़ संकल्प से, लक्ष्य सदा तुम साधना,
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।

सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।

जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।

"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।

अब तक थे तुम श्वेत पत्र, इस पर भविष्य लिखा जाएगा,
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।

नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।


रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 9 April 2026

तेरे पूजन को भगवान

तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।

सीताराम सीताराम सीताराम कहिए

सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।

मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।

किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।

जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।

आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।

Thursday, 2 April 2026

श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2 अप्रैल 2026

सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा

सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसा कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा

युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा


 

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

तर्ज: तेरे नाम का दीवाना, तेरे घर को ढूंढता है 

Wednesday, 1 April 2026

हे मारुति शिव अवतारी

श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना 
2-अप्रैल-2026

हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 30 March 2026

आरती: उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

Saturday, 28 March 2026

मोहे ले चलो गुरूजी के धाम

मोहे ले चलो गुरूजी के धाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........

राम भी वो हैं, घनश्याम भी वो हैं
मेरी सुबह और शाम भी वो हैं
जिन्हें कहते हैं बापू आसाराम
मेरा मन लागे वहाँ ..........

मेरे ह्रदय की व्यथा वो जानें
घट-घट में क्या है पहचानें
ऐसे संत बापू को प्रणाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........

हर मन का अँधियारा मिटावें
ज्ञान ज्योत से उज्जवल बनावें
देते खुद को नहीं विश्राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........

हर पल तेरा नाम जपूँ मैं
क्षण-क्षण तेरा ध्यान धरूँ मैं
"शुभ" मन में पधारो मेरे राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........

जप तप सेवा कर्म कराते
सत्संग की गंगा में नहलाते
बापू करते सभी का कल्याण
मेरा मन लागे वहाँ ..........

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/02/2002

मुख से बापू का गुणगान गाले

मुख से बापू का गुणगान गाले, 
चल गुरुवर का दर्शन पाले

गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

जय जय गुरुदेव हरे

तुम भक्तों के पालनहार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे

कण-कण में तेरा वास रहे, पल-पल तू मेरे साथ रहे
दास विनती करे बार-बार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे

बहुत-बहुत तेरी महिमा गायी, फिर भी पूरी नहीं हो पायी
"शुभ" कितने हुए अवतार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे

दीक्षा देकर धन्य बनाते, प्रभु प्रेम का गीत सुनाते
करें जनम मरण से पार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
21/01/2002

मेरी गिनती मेरी विनती

मेरी गिनती मेरी विनती, तुम्ही से ही शुरू होती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती

सुखी जीवन के तुम आधार, सदा करते हो भव से पार
चरण धूलि जो आँखों में, लगा लूँ तो बने ज्योति
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती

गुरुवर आपने अपने ह्रदय में, "शुभ" जगह दे दी
बड़ी कृपा की वरना मेरी तो, किस्मत थी सोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती

करूँ चिंतन सदा तेरा, बने ऐसा ही मन मेरा
ह्रदय बन जाये गुरुद्वारा, वाणी हो जाये गंगोत्री
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती

गुरुवर परम हितैषी हैं, ये वेदों ने बताया है
दिया "शुभ" आत्म का आनंद, किया कंकड़ से मोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
01/01/2002

बापू जी के चरणों में श्रद्धा बढ़ा ले

बापू जी के चरणों में श्रद्धा बढ़ा ले
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले

जीवन की नौका को डूबने ना देना
बापू मेरे साईं मेरे, आप थाम लेना
गुरु ज्ञान गंगा में गोता लगा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले

छोड़ अभिमान क्यों किसी से बैर करना
ना रहा है ना रहेगा ये शरीर अपना
छोटी जिंदगानी में प्रेम धुन गा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले

सेवा की महिमा को संतों ने गाया
सेवक सदा प्रभु ह्रदय समाया
निस्वार्थ सेवा की आदत बना ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/03/2002

Tuesday, 24 March 2026

बोलो बाबा श्याम, हमारा है

बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
वो हर हारे का, सहारा है ... सहारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है

जब - जब भी लगे संकट आया
तूने साथ ना अपने कोई पाया
याद करो उसे वो, किनारा है ... किनारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है

वैसे हुए बहुत दुनिया में दानी
तेरे दान की महिमा सभी ने मानी
शीश का दानी, निराला है ... निराला है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है

श्रद्धा भाव से जो नाम पुकारे
उसके बिगड़े काज सँवारे
मैंने भी नाम, पुकारा है ... पुकारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है

खाटू श्याम जो भी जन आता
"शुभ" दर्शन कर भाग्य बनाता
गिरतों को उसने उबारा है ... उबारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है

खाटू नरेश की जय
तीन बाण धारी की जय

रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ" 







Sunday, 22 March 2026

सेवा करो , गुरुवर के दुलारे

बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे
सेवा करो – सेवा करो – सेवा करो , गुरुवर के दुलारे

मैं मेरी को छोड दो, प्रभु से रिश्ता जोड़ दो
बाधाएं जो आ जाएँ, उनका रास्ता मोड दो
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....

सेवा कर जीवन महकाओ, जीवन अपना दिव्य बनाओ
सत्संग सुमिरन खूब कमाओ, औरो को दर्शन करवाओ
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....

महके जीवन “पुष्प” की भांति, ध्यान गुरु का रहे दिन राती
“शुभ” दर्शन की याद है आती, गुरु परंपरा यही सिखाती
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....

एक भरोसा राम का है, बाकी जग किस काम का है?
ऐसी मस्ती मिलती कहाँ?, ये असर हरि नाम का है
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....

खोलो दया का द्वार

खोलो दया का द्वार मेरे स्वामी अब, खोलो दया का द्वार....
अंतर्यामी कहलाते हो, दया करो मेरे स्वामी -२
बाँह पकड़ लो, तार दो मुझको-२ नैया पड़ी मझधार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु कहाते, शिव स्वरुप में तुम प्रगटाते
ऋषि मुनि ज्ञानी भजते हैं -२, तेरी महिमा अपार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....

“शुभ” तेरे दर पर आता रहेगा, प्रभु महिमा को गाता रहेगा
जब तक श्वास यह चलती रहेगी -२ पाता रहूँ तेरा प्यार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....

तीन लोक तेरे गूंजे जयकारे, हम आये प्रभु द्वार तिहारे 
आत्मज्ञान की मस्ती भर दो, दास करे ये पुकार 
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....

संत शरण में जाकर जग ने, अपना भाग्य बनाया 
सुन-२ कर "शुभ" महिमा गुरु की, द्वार तिहारे आया 
भव से पार करोगे मुझको, ऐसा मुझे विश्वास 
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 21 March 2026

शान निराली, साँई तेरी शान निराली

शान निराली, साँई तेरी शान निराली,
तीन लोक की, दाता करे रखवाली

कैसे - कैसे अनुभव अपने, दुनिया को बतलायें,
महिमा तेरी गा पायें, वो शब्द कहाँ से लायें,
तेरे नाम की ज्योत से है -२, दुनिया उजियाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....

मुख मंडल पर आभा ऐसे, जैसे सूरज चमके,
एक झलक से छंट जाते हैं, काले बादल गम के,
भर देते हैं झोली उसकी -२, जो भी आता खाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....

ब्रह्मज्ञान का दिया जलाकर, जग उजियारा करते,
सत्संग रुपी गंगाजल से, सबको निर्मल करते,
हर दर पर ना मस्तक टेकें -२ हम बापू के सवाली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....

संत शरण जो जन पड़े, वो जन उद्धरणहार,
संत की निंदा नानका ,बहुरि - बहुरि अवतार,
सत्संग रुपी "शुभ" अमृत की -२, भर-भर देते प्याली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....

मैं मेरी के फंद हटाकर, प्रभु से नाता जोड़ते,
सुनकर के फरियाद भगत की, नंगे पैरों दौड़ते,
हमने पाकर शरण गुरु की -२, किस्मत अपनी जगा ली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Friday, 20 March 2026

जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की

जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
चाहे बैरी हो जग सारा, चिंता काहे की
वो हारे का सहारा, चिंता काहे की

चाहे जिस भी दिशा में जाओ, मंदिर तेरा मिलता
भक्तों का रहता है मेला, आनंद खूब बरसता
"शुभ" जय जयकार पुकारा, चिंता काहे की

जो भी तेरे दर पे आया, खाली ना लौटाया
मनोकामना करके पूरी, खुशियों से घर आया
सबका तू ही सहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की

हारे को तू जीत दिलाए, बिगड़ी बात बनाए
डूबती नैया पार लगाकर, भव से पार लगाए
मेरा श्याम पालनहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की

घर घर तेरी ज्योत जगे है, श्याम धुनि को गाया
संकट सारे दूर हुए जब, श्याम नाम अपनाया
छंट गया अँधियारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की

ढोल नगाड़े बाज रहे, श्याम ध्वजा लहराये
देख तेरा शृंगार सांवरे, मन ही मन हर्षाये
उठो करो जयकारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"







Saturday, 14 March 2026

ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का

ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
पग-पग जादू भरा है ... माँ
आती है दुनिया मुरादें जहाँ लेकर
खाली ना कोई गया है ... माँ

द्वार तिहारे ध्यानु आया
अपना शीश माँ भेंट चढ़ाया
जीवन फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का

वैष्णों माता का सेवक श्रीधर
माता ने भंडारा रखकर
भक्त को मान दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का

एक राजा सूरथ की कहानी
खो गया राज पाट और रानी
सबकुछ फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का

दूर दूर से भक्त हैं आते
पिण्डी रूप के दर्शन पाते
जब "शुभ" बुलावा गया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 12 March 2026

माँ जय हो तुम्हारी

जय माता की, जय माता की
माँ जय हो तुम्हारी, माँ जय हो तुम्हारी

हे शैलपुत्री, हे ब्रह्मचारिणी
तेरी महिमा न्यारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की

हे चंद्रघंटा, हे कुष्मांडा
तुम हो भयहारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की

हे स्कंदमाता, हे कात्यायिनी
तुम मात हमारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की

हे कालरात्रि, हे महागौरी
तम हरने वाली, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की

हे सिद्धि दात्री, हे मात भवानी
तुम मंगल कारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की

जय माता की, जय माता की

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Friday, 27 February 2026

होली का त्यौहार है आया

होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
रंगों की बौछार है लाया, होली का त्यौहार

कान्हा मारे पिचकारी, राधा उड़ाए गुलाल
प्रेम के रंग से रंग गए सारे, सखियाँ ग्वाल-बाल
ऐसे रंग में रंगने को, हर कोई तैयार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार

बरसाने में छाई मस्ती, गोकुल में शोर अपार
ढोल मंजीरे बाजे हैं, गूँजे जय-जयकार
नाच रहे सब झूम-झूम कर, भूल गए संसार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार

नीले-पीले लाल गुलाबी, रंग अनोखे चार
भक्ति के रंग में जो रंग जाए, उसका बेड़ा पार
मन का मैल मिटाने आई, खुशियों की बौछार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार

राधे-राधे गूँजे गलियाँ, गूँजे नंद के द्वार
कान्हा संग में खेल रही है, ब्रज की हर नार
प्रेम-सुधा बरसाने आया, श्याम सलोना यार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार

छोड़ो मन की सारी दूरी, मिटा दो हर तकरार
एक रंग में रंग जाएँ हम, यही सच्चा त्यौहार
भक्ति-प्रेम से जग सज जाए, यही "शुभ" उपहार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार


अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गाज़ियाबाद

Monday, 5 January 2026

प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

हर दिन एक नया दिन है होता, हर दिन नयी शुरुआत
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

मिलने वाली हर वस्तु का, करना होता त्याग
जान के ना अनजान हो प्राणी, जगा ले कुछ वैराग
आया खली हाथ था और जायेगा खाली हाथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

पल पल बीत रहा हर पल जो, वो वापस ना आयेगा
सब कुछ निर्भर है कर्मों पर, जो बोया वो पायेगा
फेंक के गठरी पाप कर्मों की, पुण्य करो दिन रात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

चाहे जितने रिश्ते बनाओ, चाहे बनाओ परिवार
जीवन की जब शाम ढले, तो सब नाते बेकार
करी कमाई स्वारथ की, ना जाएगी साथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

सच्ची कमाई प्रभु नाम की, रहे जन्मों तक साथ
ऐसी कमाई वालों का फिर, प्रभु ना छोड़ें हाथ
बीता समय ना लौट के आये, अब तो संजो बात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"