श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
स्वामी करुनानिधान की, जय बोलो भगवान की
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
सभी दिशा गूंजे जयकारे, रक्षक हैं बजरंग हमारे
सभी दिशा गूंजे जयकारे, रक्षक हैं बजरंग हमारे
संकट काटन हार की, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करहुं गुरुदेव की नाईं
जय जय जय हनुमान गुसाईं, कृपा करहुं गुरुदेव की नाईं
जय हो ज्ञान के खान की, जय बोलो हनुमान की ...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
लंका में जा आग लगाई, रावण की थी सत्ता हिलाई
लंका में जा आग लगाई, रावण की थी सत्ता हिलाई
रामदूत बलवान की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
जिस पर कृपा तेरी हो जाये, उसके संकट पास ना आये
जिस पर कृपा तेरी हो जाये, उसके संकट पास ना आये
"शुभ" करुणा भंडार की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
रोम रोम में राम तुम्हारे, भक्ति बढे जो तुम्हे पुकारे
रोम रोम में राम तुम्हारे, भक्ति बढे जो तुम्हे पुकारे
अंजनी माँ के लाल की, जय बोलो हनुमान की...
श्री राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की ...
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Monday, 1 June 2026
Sunday, 24 May 2026
शिव शिव नमः शिवाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
महाकाल तुम, हो त्रिकाल तुम -2
हे त्रिनेत्र धराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम डमरू धारी, हो त्रिशूल धारी -2
हे नट राजाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम भस्म रमैया, संग गौरा मैया -2
हे कैलाश बसाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तेरा डमरू बाजे, बम भोला नाचे -2
नाचे सभी दिशाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
भूतों के स्वामी, तुम अंतर्यामी -2
हे नन्दीश्वराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम "शुभ" करते, विघ्नों को हरते -2
हे विघ्नहराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
महाकाल तुम, हो त्रिकाल तुम -2
हे त्रिनेत्र धराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम डमरू धारी, हो त्रिशूल धारी -2
हे नट राजाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम भस्म रमैया, संग गौरा मैया -2
हे कैलाश बसाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तेरा डमरू बाजे, बम भोला नाचे -2
नाचे सभी दिशाय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
भूतों के स्वामी, तुम अंतर्यामी -2
हे नन्दीश्वराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
तुम "शुभ" करते, विघ्नों को हरते -2
हे विघ्नहराय
शिव शिव नमः शिवाय
हर हर नमः शिवाय
जय शम्भू जय शम्भू शम्भू
जय शम्भू जय शम्भू
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Friday, 22 May 2026
आन मिलो भगवान हमारे
आन मिलो, सियाराम हमारे
आन मिलो, राधेश्याम हमारे
राम हमारे, श्याम हमारे
आन मिलो, भगवान हमारे
दरश दिये थे, केवट भगत को
दरश दिये थे, केवट भगत को
नाव पे चढ़कर, भाग्य सँवारे
आन मिलो सियाराम हमारे
दरश दिये थे, शबरी माई को
दरश दिये थे, शबरी माई को
बेर खाने, प्रभु द्वार पधारे
आन मिलो सियाराम हमारे
दरश दिये, प्रह्लाद भगत को
दरश दिये, प्रह्लाद भगत को
नरसिंह रूप ले, आप पधारे
आन मिलो सियाराम हमारे
दरश दिये थे, मीरा बाई को
दरश दिये थे, मीरा बाई को
विष को अमृत, करने पधारे
आन मिलो राधेश्याम हमारे
दरश दिये थे, द्रुपदसुता को
दरश दिये थे, द्रुपदसुता को
चीर बढ़ाने, सभा में पधारे
आन मिलो राधेश्याम हमारे
दरश दिये थे, नरसी भगत को
दरश दिये थे, नरसी भगत को
भात भरन, घनश्याम पधारे
आन मिलो राधेश्याम हमारे
दरश दिए, अनगिन भगतों को
दरश दिए, अनगिन भगतों को
"शुभ" दर्शन की, बाट निहारे
आन मिलो, सियाराम हमारे
आन मिलो, राधेश्याम हमारे
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Monday, 11 May 2026
बम-बम भोला, शंकर रखवाला
बम-बम भोला, शंकर रखवाला,
जिस पर तेरी कृपा हो जाए, जपे नाम की माला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
भस्म रमाए, जटा में गंगा,
त्रिनेत्र धारी, हरें भव-जंजाला।
दीन-दुखी का तू है सहारा,
हर लेता दुख विकराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
नीलकंठ तू, विष को पीकर,
जग को दिया अमृत का प्याला।
भोलेनाथ करुणा की धारा,
भक्तों पर प्रेम निराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
कैलाशपति, गिरिजा के स्वामी,
भक्तों के प्रभु अंतर्यामी निराला।
"शुभ" द्वार जो शीश झुकाए,
गिरते को तू संभाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
चंद्र सजे तेरे मस्तक ऊपर,
कंठ समाए विष काला।
काम क्रोध सब दूर भगाए,
तू ही जग का रखवाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
जिस पर तेरी कृपा हो जाए, जपे नाम की माला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
भस्म रमाए, जटा में गंगा,
त्रिनेत्र धारी, हरें भव-जंजाला।
दीन-दुखी का तू है सहारा,
हर लेता दुख विकराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
नीलकंठ तू, विष को पीकर,
जग को दिया अमृत का प्याला।
भोलेनाथ करुणा की धारा,
भक्तों पर प्रेम निराला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
कैलाशपति, गिरिजा के स्वामी,
भक्तों के प्रभु अंतर्यामी निराला।
"शुभ" द्वार जो शीश झुकाए,
गिरते को तू संभाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
चंद्र सजे तेरे मस्तक ऊपर,
कंठ समाए विष काला।
काम क्रोध सब दूर भगाए,
तू ही जग का रखवाला।
बम-बम भोला, शंकर रखवाला॥
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Saturday, 2 May 2026
ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे
ऐसे नखरे दिखाना छोड़ दे,
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
मुझे मालूम है मेरे दिल में बसा
देखूँ कैसे तुझे ज़रा ये भी बता
तेरी याद में रुलाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी माया से जग को मैं देखता
तू खुद ना दिखे मेरी क्या है खता
आजा सामने तरसाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
है ये तेरी कृपा तेरा नाम लिया
"शुभ" भावना भरी तुझे याद किया
या तो यादों में आना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी करुणा से ही मुझे सत्संग मिला
करुणा-वरुणा सिंधु का ज्ञान मिला
सारे भेद छिपाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
मुझे मालूम है मेरे दिल में बसा
देखूँ कैसे तुझे ज़रा ये भी बता
तेरी याद में रुलाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी माया से जग को मैं देखता
तू खुद ना दिखे मेरी क्या है खता
आजा सामने तरसाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
है ये तेरी कृपा तेरा नाम लिया
"शुभ" भावना भरी तुझे याद किया
या तो यादों में आना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
तेरी करुणा से ही मुझे सत्संग मिला
करुणा-वरुणा सिंधु का ज्ञान मिला
सारे भेद छिपाना छोड़ दे
छुप - छुप के सताना छोड़ दे
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
3/May/2026
Wednesday, 15 April 2026
परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शुभकामनायें
एक अभिभावक के हृदय से निकले उद्गार
परिश्रम की "शुभ" राह पर, अपनी पहचान संवार ली।
अब आगे का पथ है विस्तृत, सपनों से भी और विशाल,
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
एकाग्र मन, दृढ़ संकल्प से, लक्ष्य सदा तुम साधना,
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
अब तक थे तुम श्वेत पत्र, इस पर भविष्य लिखा जाएगा,
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Thursday, 9 April 2026
तेरे पूजन को भगवान
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
Thursday, 2 April 2026
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसा कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसा कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तर्ज: तेरे नाम का दीवाना, तेरे घर को ढूंढता है
Wednesday, 1 April 2026
हे मारुति शिव अवतारी
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Monday, 30 March 2026
आरती: उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
Saturday, 28 March 2026
मोहे ले चलो गुरूजी के धाम
मोहे ले चलो गुरूजी के धाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
राम भी वो हैं, घनश्याम भी वो हैं
मेरी सुबह और शाम भी वो हैं
जिन्हें कहते हैं बापू आसाराम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
मेरे ह्रदय की व्यथा वो जानें
घट-घट में क्या है पहचानें
ऐसे संत बापू को प्रणाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर मन का अँधियारा मिटावें
ज्ञान ज्योत से उज्जवल बनावें
देते खुद को नहीं विश्राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर पल तेरा नाम जपूँ मैं
क्षण-क्षण तेरा ध्यान धरूँ मैं
"शुभ" मन में पधारो मेरे राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
जप तप सेवा कर्म कराते
सत्संग की गंगा में नहलाते
बापू करते सभी का कल्याण
मेरा मन लागे वहाँ ..........
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/02/2002
मेरा मन लागे वहाँ ..........
राम भी वो हैं, घनश्याम भी वो हैं
मेरी सुबह और शाम भी वो हैं
जिन्हें कहते हैं बापू आसाराम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
मेरे ह्रदय की व्यथा वो जानें
घट-घट में क्या है पहचानें
ऐसे संत बापू को प्रणाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर मन का अँधियारा मिटावें
ज्ञान ज्योत से उज्जवल बनावें
देते खुद को नहीं विश्राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर पल तेरा नाम जपूँ मैं
क्षण-क्षण तेरा ध्यान धरूँ मैं
"शुभ" मन में पधारो मेरे राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
जप तप सेवा कर्म कराते
सत्संग की गंगा में नहलाते
बापू करते सभी का कल्याण
मेरा मन लागे वहाँ ..........
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/02/2002
मुख से बापू का गुणगान गाले
मुख से बापू का गुणगान गाले,
चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
जय जय गुरुदेव हरे
तुम भक्तों के पालनहार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
कण-कण में तेरा वास रहे, पल-पल तू मेरे साथ रहे
दास विनती करे बार-बार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
बहुत-बहुत तेरी महिमा गायी, फिर भी पूरी नहीं हो पायी
"शुभ" कितने हुए अवतार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
दीक्षा देकर धन्य बनाते, प्रभु प्रेम का गीत सुनाते
करें जनम मरण से पार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
21/01/2002
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
कण-कण में तेरा वास रहे, पल-पल तू मेरे साथ रहे
दास विनती करे बार-बार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
बहुत-बहुत तेरी महिमा गायी, फिर भी पूरी नहीं हो पायी
"शुभ" कितने हुए अवतार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
दीक्षा देकर धन्य बनाते, प्रभु प्रेम का गीत सुनाते
करें जनम मरण से पार, जय जय गुरुदेव हरे
तेरी महिमा बड़ी अपार, जय जय गुरुदेव हरे
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
21/01/2002
मेरी गिनती मेरी विनती
मेरी गिनती मेरी विनती, तुम्ही से ही शुरू होती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
सुखी जीवन के तुम आधार, सदा करते हो भव से पार
चरण धूलि जो आँखों में, लगा लूँ तो बने ज्योति
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
गुरुवर आपने अपने ह्रदय में, "शुभ" जगह दे दी
बड़ी कृपा की वरना मेरी तो, किस्मत थी सोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
करूँ चिंतन सदा तेरा, बने ऐसा ही मन मेरा
ह्रदय बन जाये गुरुद्वारा, वाणी हो जाये गंगोत्री
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
गुरुवर परम हितैषी हैं, ये वेदों ने बताया है
दिया "शुभ" आत्म का आनंद, किया कंकड़ से मोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
01/01/2002
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
सुखी जीवन के तुम आधार, सदा करते हो भव से पार
चरण धूलि जो आँखों में, लगा लूँ तो बने ज्योति
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
गुरुवर आपने अपने ह्रदय में, "शुभ" जगह दे दी
बड़ी कृपा की वरना मेरी तो, किस्मत थी सोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
करूँ चिंतन सदा तेरा, बने ऐसा ही मन मेरा
ह्रदय बन जाये गुरुद्वारा, वाणी हो जाये गंगोत्री
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
गुरुवर परम हितैषी हैं, ये वेदों ने बताया है
दिया "शुभ" आत्म का आनंद, किया कंकड़ से मोती
जहाँ तक जाये मेरी दृष्टि, छवि तेरी प्रकट होती
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
01/01/2002
बापू जी के चरणों में श्रद्धा बढ़ा ले
बापू जी के चरणों में श्रद्धा बढ़ा ले
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
जीवन की नौका को डूबने ना देना
बापू मेरे साईं मेरे, आप थाम लेना
गुरु ज्ञान गंगा में गोता लगा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
छोड़ अभिमान क्यों किसी से बैर करना
ना रहा है ना रहेगा ये शरीर अपना
छोटी जिंदगानी में प्रेम धुन गा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
सेवा की महिमा को संतों ने गाया
सेवक सदा प्रभु ह्रदय समाया
निस्वार्थ सेवा की आदत बना ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/03/2002
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
जीवन की नौका को डूबने ना देना
बापू मेरे साईं मेरे, आप थाम लेना
गुरु ज्ञान गंगा में गोता लगा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
छोड़ अभिमान क्यों किसी से बैर करना
ना रहा है ना रहेगा ये शरीर अपना
छोटी जिंदगानी में प्रेम धुन गा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
सेवा की महिमा को संतों ने गाया
सेवक सदा प्रभु ह्रदय समाया
निस्वार्थ सेवा की आदत बना ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/03/2002
Tuesday, 24 March 2026
बोलो बाबा श्याम, हमारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
वो हर हारे का, सहारा है ... सहारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
जब - जब भी लगे संकट आया
तूने साथ ना अपने कोई पाया
याद करो उसे वो, किनारा है ... किनारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
वैसे हुए बहुत दुनिया में दानी
तेरे दान की महिमा सभी ने मानी
शीश का दानी, निराला है ... निराला है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
श्रद्धा भाव से जो नाम पुकारे
उसके बिगड़े काज सँवारे
मैंने भी नाम, पुकारा है ... पुकारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
खाटू श्याम जो भी जन आता
"शुभ" दर्शन कर भाग्य बनाता
गिरतों को उसने उबारा है ... उबारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
खाटू नरेश की जय
तीन बाण धारी की जय
वो हर हारे का, सहारा है ... सहारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
जब - जब भी लगे संकट आया
तूने साथ ना अपने कोई पाया
याद करो उसे वो, किनारा है ... किनारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
वैसे हुए बहुत दुनिया में दानी
तेरे दान की महिमा सभी ने मानी
शीश का दानी, निराला है ... निराला है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
श्रद्धा भाव से जो नाम पुकारे
उसके बिगड़े काज सँवारे
मैंने भी नाम, पुकारा है ... पुकारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
खाटू श्याम जो भी जन आता
"शुभ" दर्शन कर भाग्य बनाता
गिरतों को उसने उबारा है ... उबारा है
बोलो बाबा श्याम, हमारा है ... हमारा है
खाटू नरेश की जय
तीन बाण धारी की जय
रचयिता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Sunday, 22 March 2026
सेवा करो , गुरुवर के दुलारे
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे
सेवा करो – सेवा करो – सेवा करो , गुरुवर के दुलारे
मैं मेरी को छोड दो, प्रभु से रिश्ता जोड़ दो
बाधाएं जो आ जाएँ, उनका रास्ता मोड दो
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
सेवा कर जीवन महकाओ, जीवन अपना दिव्य बनाओ
सत्संग सुमिरन खूब कमाओ, औरो को दर्शन करवाओ
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
महके जीवन “पुष्प” की भांति, ध्यान गुरु का रहे दिन राती
“शुभ” दर्शन की याद है आती, गुरु परंपरा यही सिखाती
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
एक भरोसा राम का है, बाकी जग किस काम का है?
ऐसी मस्ती मिलती कहाँ?, ये असर हरि नाम का है
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
सेवा करो – सेवा करो – सेवा करो , गुरुवर के दुलारे
मैं मेरी को छोड दो, प्रभु से रिश्ता जोड़ दो
बाधाएं जो आ जाएँ, उनका रास्ता मोड दो
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
सेवा कर जीवन महकाओ, जीवन अपना दिव्य बनाओ
सत्संग सुमिरन खूब कमाओ, औरो को दर्शन करवाओ
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
महके जीवन “पुष्प” की भांति, ध्यान गुरु का रहे दिन राती
“शुभ” दर्शन की याद है आती, गुरु परंपरा यही सिखाती
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
एक भरोसा राम का है, बाकी जग किस काम का है?
ऐसी मस्ती मिलती कहाँ?, ये असर हरि नाम का है
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
खोलो दया का द्वार
खोलो दया का द्वार मेरे स्वामी अब, खोलो दया का द्वार....
अंतर्यामी कहलाते हो, दया करो मेरे स्वामी -२
बाँह पकड़ लो, तार दो मुझको-२ नैया पड़ी मझधार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु कहाते, शिव स्वरुप में तुम प्रगटाते
ऋषि मुनि ज्ञानी भजते हैं -२, तेरी महिमा अपार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
“शुभ” तेरे दर पर आता रहेगा, प्रभु महिमा को गाता रहेगा
जब तक श्वास यह चलती रहेगी -२ पाता रहूँ तेरा प्यार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
तीन लोक तेरे गूंजे जयकारे, हम आये प्रभु द्वार तिहारे
आत्मज्ञान की मस्ती भर दो, दास करे ये पुकार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
संत शरण में जाकर जग ने, अपना भाग्य बनाया
सुन-२ कर "शुभ" महिमा गुरु की, द्वार तिहारे आया
भव से पार करोगे मुझको, ऐसा मुझे विश्वास
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Saturday, 21 March 2026
शान निराली, साँई तेरी शान निराली
शान निराली, साँई तेरी शान निराली,
तीन लोक की, दाता करे रखवाली
कैसे - कैसे अनुभव अपने, दुनिया को बतलायें,
महिमा तेरी गा पायें, वो शब्द कहाँ से लायें,
तेरे नाम की ज्योत से है -२, दुनिया उजियाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मुख मंडल पर आभा ऐसे, जैसे सूरज चमके,
एक झलक से छंट जाते हैं, काले बादल गम के,
भर देते हैं झोली उसकी -२, जो भी आता खाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
ब्रह्मज्ञान का दिया जलाकर, जग उजियारा करते,
सत्संग रुपी गंगाजल से, सबको निर्मल करते,
हर दर पर ना मस्तक टेकें -२ हम बापू के सवाली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
संत शरण जो जन पड़े, वो जन उद्धरणहार,
संत की निंदा नानका ,बहुरि - बहुरि अवतार,
सत्संग रुपी "शुभ" अमृत की -२, भर-भर देते प्याली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मैं मेरी के फंद हटाकर, प्रभु से नाता जोड़ते,
सुनकर के फरियाद भगत की, नंगे पैरों दौड़ते,
हमने पाकर शरण गुरु की -२, किस्मत अपनी जगा ली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तीन लोक की, दाता करे रखवाली
कैसे - कैसे अनुभव अपने, दुनिया को बतलायें,
महिमा तेरी गा पायें, वो शब्द कहाँ से लायें,
तेरे नाम की ज्योत से है -२, दुनिया उजियाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मुख मंडल पर आभा ऐसे, जैसे सूरज चमके,
एक झलक से छंट जाते हैं, काले बादल गम के,
भर देते हैं झोली उसकी -२, जो भी आता खाली,
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
ब्रह्मज्ञान का दिया जलाकर, जग उजियारा करते,
सत्संग रुपी गंगाजल से, सबको निर्मल करते,
हर दर पर ना मस्तक टेकें -२ हम बापू के सवाली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
संत शरण जो जन पड़े, वो जन उद्धरणहार,
संत की निंदा नानका ,बहुरि - बहुरि अवतार,
सत्संग रुपी "शुभ" अमृत की -२, भर-भर देते प्याली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
मैं मेरी के फंद हटाकर, प्रभु से नाता जोड़ते,
सुनकर के फरियाद भगत की, नंगे पैरों दौड़ते,
हमने पाकर शरण गुरु की -२, किस्मत अपनी जगा ली
शान निराली साँई तेरी शान निराली .....
हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Friday, 20 March 2026
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
चाहे बैरी हो जग सारा, चिंता काहे की
वो हारे का सहारा, चिंता काहे की
चाहे जिस भी दिशा में जाओ, मंदिर तेरा मिलता
भक्तों का रहता है मेला, आनंद खूब बरसता
"शुभ" जय जयकार पुकारा, चिंता काहे की
जो भी तेरे दर पे आया, खाली ना लौटाया
मनोकामना करके पूरी, खुशियों से घर आया
सबका तू ही सहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
हारे को तू जीत दिलाए, बिगड़ी बात बनाए
डूबती नैया पार लगाकर, भव से पार लगाए
मेरा श्याम पालनहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
घर घर तेरी ज्योत जगे है, श्याम धुनि को गाया
संकट सारे दूर हुए जब, श्याम नाम अपनाया
छंट गया अँधियारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
ढोल नगाड़े बाज रहे, श्याम ध्वजा लहराये
देख तेरा शृंगार सांवरे, मन ही मन हर्षाये
उठो करो जयकारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
चाहे बैरी हो जग सारा, चिंता काहे की
वो हारे का सहारा, चिंता काहे की
चाहे जिस भी दिशा में जाओ, मंदिर तेरा मिलता
भक्तों का रहता है मेला, आनंद खूब बरसता
"शुभ" जय जयकार पुकारा, चिंता काहे की
जो भी तेरे दर पे आया, खाली ना लौटाया
मनोकामना करके पूरी, खुशियों से घर आया
सबका तू ही सहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
हारे को तू जीत दिलाए, बिगड़ी बात बनाए
डूबती नैया पार लगाकर, भव से पार लगाए
मेरा श्याम पालनहारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
घर घर तेरी ज्योत जगे है, श्याम धुनि को गाया
संकट सारे दूर हुए जब, श्याम नाम अपनाया
छंट गया अँधियारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
ढोल नगाड़े बाज रहे, श्याम ध्वजा लहराये
देख तेरा शृंगार सांवरे, मन ही मन हर्षाये
उठो करो जयकारा, चिंता काहे की
जब बाबा श्याम हमारा, चिंता काहे की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Saturday, 14 March 2026
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
पग-पग जादू भरा है ... माँ
आती है दुनिया मुरादें जहाँ लेकर
खाली ना कोई गया है ... माँ
द्वार तिहारे ध्यानु आया
अपना शीश माँ भेंट चढ़ाया
जीवन फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
वैष्णों माता का सेवक श्रीधर
माता ने भंडारा रखकर
भक्त को मान दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
एक राजा सूरथ की कहानी
खो गया राज पाट और रानी
सबकुछ फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
दूर दूर से भक्त हैं आते
पिण्डी रूप के दर्शन पाते
जब "शुभ" बुलावा गया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
पग-पग जादू भरा है ... माँ
आती है दुनिया मुरादें जहाँ लेकर
खाली ना कोई गया है ... माँ
द्वार तिहारे ध्यानु आया
अपना शीश माँ भेंट चढ़ाया
जीवन फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
वैष्णों माता का सेवक श्रीधर
माता ने भंडारा रखकर
भक्त को मान दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
एक राजा सूरथ की कहानी
खो गया राज पाट और रानी
सबकुछ फिर से दिया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
दूर दूर से भक्त हैं आते
पिण्डी रूप के दर्शन पाते
जब "शुभ" बुलावा गया है ... माँ
ऐसा नजारा देखा तेरे द्वार का
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Thursday, 12 March 2026
माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
माँ जय हो तुम्हारी, माँ जय हो तुम्हारी
हे शैलपुत्री, हे ब्रह्मचारिणी
तेरी महिमा न्यारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे चंद्रघंटा, हे कुष्मांडा
तुम हो भयहारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे स्कंदमाता, हे कात्यायिनी
तुम मात हमारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे कालरात्रि, हे महागौरी
तम हरने वाली, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे सिद्धि दात्री, हे मात भवानी
तुम मंगल कारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
जय माता की, जय माता की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
माँ जय हो तुम्हारी, माँ जय हो तुम्हारी
हे शैलपुत्री, हे ब्रह्मचारिणी
तेरी महिमा न्यारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे चंद्रघंटा, हे कुष्मांडा
तुम हो भयहारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे स्कंदमाता, हे कात्यायिनी
तुम मात हमारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे कालरात्रि, हे महागौरी
तम हरने वाली, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
हे सिद्धि दात्री, हे मात भवानी
तुम मंगल कारी, माँ जय हो तुम्हारी
जय माता की, जय माता की
जय माता की, जय माता की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Friday, 27 February 2026
होली का त्यौहार है आया
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
रंगों की बौछार है लाया, होली का त्यौहार
कान्हा मारे पिचकारी, राधा उड़ाए गुलाल
प्रेम के रंग से रंग गए सारे, सखियाँ ग्वाल-बाल
ऐसे रंग में रंगने को, हर कोई तैयार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
बरसाने में छाई मस्ती, गोकुल में शोर अपार
ढोल मंजीरे बाजे हैं, गूँजे जय-जयकार
नाच रहे सब झूम-झूम कर, भूल गए संसार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
नीले-पीले लाल गुलाबी, रंग अनोखे चार
भक्ति के रंग में जो रंग जाए, उसका बेड़ा पार
मन का मैल मिटाने आई, खुशियों की बौछार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
राधे-राधे गूँजे गलियाँ, गूँजे नंद के द्वार
कान्हा संग में खेल रही है, ब्रज की हर नार
प्रेम-सुधा बरसाने आया, श्याम सलोना यार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
छोड़ो मन की सारी दूरी, मिटा दो हर तकरार
एक रंग में रंग जाएँ हम, यही सच्चा त्यौहार
भक्ति-प्रेम से जग सज जाए, यही "शुभ" उपहार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गाज़ियाबाद
रंगों की बौछार है लाया, होली का त्यौहार
कान्हा मारे पिचकारी, राधा उड़ाए गुलाल
प्रेम के रंग से रंग गए सारे, सखियाँ ग्वाल-बाल
ऐसे रंग में रंगने को, हर कोई तैयार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
बरसाने में छाई मस्ती, गोकुल में शोर अपार
ढोल मंजीरे बाजे हैं, गूँजे जय-जयकार
नाच रहे सब झूम-झूम कर, भूल गए संसार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
नीले-पीले लाल गुलाबी, रंग अनोखे चार
भक्ति के रंग में जो रंग जाए, उसका बेड़ा पार
मन का मैल मिटाने आई, खुशियों की बौछार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
राधे-राधे गूँजे गलियाँ, गूँजे नंद के द्वार
कान्हा संग में खेल रही है, ब्रज की हर नार
प्रेम-सुधा बरसाने आया, श्याम सलोना यार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
छोड़ो मन की सारी दूरी, मिटा दो हर तकरार
एक रंग में रंग जाएँ हम, यही सच्चा त्यौहार
भक्ति-प्रेम से जग सज जाए, यही "शुभ" उपहार
होली का त्यौहार है आया, होली का त्यौहार
अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गाज़ियाबाद
Monday, 5 January 2026
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
हर दिन एक नया दिन है होता, हर दिन नयी शुरुआत
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
मिलने वाली हर वस्तु का, करना होता त्याग
जान के ना अनजान हो प्राणी, जगा ले कुछ वैराग
आया खली हाथ था और जायेगा खाली हाथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
पल पल बीत रहा हर पल जो, वो वापस ना आयेगा
सब कुछ निर्भर है कर्मों पर, जो बोया वो पायेगा
फेंक के गठरी पाप कर्मों की, पुण्य करो दिन रात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
चाहे जितने रिश्ते बनाओ, चाहे बनाओ परिवार
जीवन की जब शाम ढले, तो सब नाते बेकार
करी कमाई स्वारथ की, ना जाएगी साथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
सच्ची कमाई प्रभु नाम की, रहे जन्मों तक साथ
ऐसी कमाई वालों का फिर, प्रभु ना छोड़ें हाथ
बीता समय ना लौट के आये, अब तो संजो बात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
मिलने वाली हर वस्तु का, करना होता त्याग
जान के ना अनजान हो प्राणी, जगा ले कुछ वैराग
आया खली हाथ था और जायेगा खाली हाथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
पल पल बीत रहा हर पल जो, वो वापस ना आयेगा
सब कुछ निर्भर है कर्मों पर, जो बोया वो पायेगा
फेंक के गठरी पाप कर्मों की, पुण्य करो दिन रात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
चाहे जितने रिश्ते बनाओ, चाहे बनाओ परिवार
जीवन की जब शाम ढले, तो सब नाते बेकार
करी कमाई स्वारथ की, ना जाएगी साथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
सच्ची कमाई प्रभु नाम की, रहे जन्मों तक साथ
ऐसी कमाई वालों का फिर, प्रभु ना छोड़ें हाथ
बीता समय ना लौट के आये, अब तो संजो बात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Subscribe to:
Posts (Atom)