हर दिन एक नया दिन है होता, हर दिन नयी शुरुआत
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
मिलने वाली हर वस्तु का, करना होता त्याग
जान के ना अनजान हो प्राणी, जगा ले कुछ वैराग
आया खली हाथ था और जायेगा खाली हाथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
पल पल बीत रहा हर पल जो, वो वापस ना आयेगा
सब कुछ निर्भर है कर्मों पर, जो बोया वो पायेगा
फेंक के गठरी पाप कर्मों की, पुण्य करो दिन रात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
चाहे जितने रिश्ते बनाओ, चाहे बनाओ परिवार
जीवन की जब शाम ढले, तो सब नाते बेकार
करी कमाई स्वारथ की, ना जाएगी साथ
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
सच्ची कमाई प्रभु नाम की, रहे जन्मों तक साथ
ऐसी कमाई वालों का फिर, प्रभु ना छोड़ें हाथ
बीता समय ना लौट के आये, अब तो संजो बात
प्रभु के दिए इस जीवन को, समझो "शुभ" सौगात
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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