Friday, 6 December 2024

मैं बापू के नाम का दीवाना हो गया

मैं बापू के नाम का दीवाना हो गया, दीवाना हो गया
ना छेड़ो मुझे दुनिया वालों .....

सदगुरु की संगत से क्या क्या सुख मिलता है
मानो या ना मानो पर मन का गुल खिलता है
मैं गुरु रुपी शमां का परवाना हो गया, परवाना हो गया
ना छेड़ो मुझे दुनिया वालों .....

आएं जब बापू अपने भक्तों की नगरिया
लगे जैसे ग्वालों में आये सांवरिया
"शुभ" हरि ॐ धुन में मस्ताना हो गया, मस्ताना हो गया
ना छेड़ो मुझे दुनिया वालों .....

महँगीबा माँ ने हम सब पर उपकार किया
जन्म दिया गुरुवर को जग का उद्धार किया
ब्रह्म का भूमण्डल पर आना हो गया, आना हो गया
करो दर्शन करो दुनिया वालों .....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Thursday, 5 December 2024

तुम भक्तों के हो भगवान, हे महावीर हनुमान

तुम भक्तों के हो भगवान, हे महावीर हनुमान
तुम राम दूत अविराम, हे राम भक्त हनुमान

प्रभु राम तुम्हें ह्रदय लगाते, श्री चरणों की सेवा पाते
"शुभ" सेवा ही ध्येय बनाया, ना चाहा सम्मान
हे महावीर हनुमान ......

अजर अमर गुननिधि सुत होहू, करहुं बहुत रघुनायक छोहू
सीता माँ से आशीष पाकर, धन्य हुए बलवान
हे महावीर हनुमान ......

कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होय तात तुम पाहीं
मेरे कष्ट बहुत ही छोटे, उनका करो निदान
हे महावीर हनुमान ......

बाल्यकाल में भोले के संग, पहुंचे अयोध्या करने दर्शन
भोले बाबा बने मदारी, नाचते हैं बलवान
हे महावीर हनुमान ......

भूख लगी तो हो गए व्याकुल, सूर्यदेव को जान के एक फल
नभ में जाकर उनको पकड़ा, मुख में दिया विराम
हे महावीर हनुमान ......

धन्य धन्य हैं अंजनी माता, जन्मा राम भक्त विख्याता
केसरी नंदन तुमको वंदन, करता सारा जहान
हे महावीर हनुमान ......

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Monday, 2 December 2024

लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे


लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

माथे पे लिख दे ज्योति गुरु की
आँखों में उनका दीदार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

जिव्हा पे लिख दे नाम गुरु का
कानो में शब्द झंकार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

हाथो पे लिख दे सेवा गुरु की
तन मन धन उन पे वार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

पैरों पे लिख दे जाना गुरु के द्वार
सारा ही जीवन उनके साथ लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

एक मत लिखना गुरु का बिछड़ना
चाहे तू सारा संसार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 30 November 2024

आएंगे आएंगे बापू आएंगे, हमें पता चला है

आएंगे आएंगे बापू आएंगे, हमें पता चला है 
यहाँ अपने चरण घुमाएंगे, हमें पता चला है 

बापू ने हमसे वादा किया है, तब से उत्सुक मेरा जिया है 
"शुभ" दर्शन वो हमको कराएँगे, हमें पता चला है 
आएंगे आएंगे बापू आएंगे, हमें पता चला है 

कुप्रचार की आंधी थमेगी, घर-घर बापू की गूँज उठेगी 
हम सत्संग फिर से पाएंगे,  हमें पता चला है 

स्वागत करने को उत्सुक साधक, दर्शन पाने को हुए हैं भावुक 
हम राहों में फूल बिछाएंगे, हमें पता चला है 

फिर से बापू का सत्संग मिलेगा, कोटिश भक्तों का ह्रदय खिलेगा 
हम व्यास पीठ को सजायेंगे, हमें पता चला है 

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 1

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥

मैं जब भी कभी भटका, तेरी राह से गुरुवर
मेरी बाँह खींच लाये, मुझे छोड़ा अपने दर पर
इतनी दया कि फिर भी, तुमको समझ ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

“शुभ” दास कि हैं विनती, छूटे ना दर तुम्हारा
चरणों का आसरा दो, बन जाऊं तुमको प्यारा
छूटे ना तेरा दामन, चाहे कोई इसे छुडाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

कुछ मांगने कि चाहत, मेरे दिल में अब नहीं है
जो कुछ किया जो करते, सरकार सब सही है
जितना मिला है तुमसे, वो ही संभल ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

फिर भी जो देना चाहो, सरकार प्यार देना
चरणों कि अपनी भक्ति, दिन रात मुझको देना
भूलूँ तुम्हे कभी ना, चाहे जन्म सौ-सौ आयें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 1

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

कारागार में जन्म लियो है, सृष्टि पर उपकार कियो है
तूने खोल दिया हर एक ताला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

ग्वाल - बाल संग यमुना किनारे, खेलन गयो मोरे कृष्ण मुरारे
तूने कालिया मर्दन कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

गोकुल पर जब विपदा पडी थी, सबकी निगाहें तुम पे गडी थी
तूने गोवर्धन ही उठा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

कंस नाम का था दुराचारी, सारे जहाँ में खौफ था भारी
खौफ ख़तम तूने कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

तेरा किसी ने पार न पाया, हे परमेश्वर जगतपिता

तेरा किसी ने पार न पाया, हे परमेश्वर जगतपिता
तुमको कोई समझ न पाया, हे परमेश्वर जगतपिता
हे परमेश्वर जगतपिता, हे परमेश्वर जगतपिता

कभी ज्ञानी तुम कभी ध्यानी तुम, हर घट में ब्रह्मज्ञानी तुम
चर भी तुम अचर भी तुम, प्रभु चराचर स्वामी तुम
महिमा तेरी गा ना पाया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

नख से लेकर शिख तक मेरे प्रभु तुम्हारा वास है
चाहे कहीं भी रहूँ जगत में, दिल तुम्हारे पास है
सारे जगत में तेरी छाया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

मुझको जैसे हाल रखोगे वैसे ही रह लूँगा मैं
खाने को जो टुकड़ा दोगे, वो प्रसाद खा लूँगा मैं
तेरी कृपा से नर तन पाया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में तेरा रूप अनूप है
सबमें तेरी माया प्रभुजी, कहीं छाया कहीं धूप है
गुरु रूप में खुद चल आया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

जैसे भी हैं हम हैं तुम्हारे, स्वीकारो भव पार करो
पतित अधम भी तारे तुमने, मेरा भी उद्धार करो
द्वार तिहारे बालक आया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

जित देखूं उत तुम नारायण, और नजर न कोई आये
जिसने अंतर्ज्योत जगाई, तुमको विरला सोई पाए
“शुभ” ह्रदय में बैठा पाया, हे परमेश्वर जगतपिता .....

दुस्तर हैं जीवें की राहें, चलना बहुत कठिन है
पग-पग पर कांटें मिलते हैं, बचना बहुत कठिन है
ऐसे में तुमने ही बचाया, हे परमेश्वर जगतपिता .....


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

तुम हो जगत की आत्मा, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

मेरी भक्ति तुम्हीं मेरी शक्ति तुम्हीं, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
तुम हो जगत की आत्मा, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

लगन तुम्हारी जब लग जाए, बंधक जीव मुक्त हो जाए
ज्ञान पिपासु मन हो जाए, संत समागम करे कराए
हो पाप कर्मों का खात्मा, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

राम-राम उठते ही गाए, राम-राम जब सोने जाए
राम राम कह भोग लगाए, राम-राम कह मिले मिलाए
नित रामचरण की चाहना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

जित देखूं उत तुम नारायण, और नजर ना कोई आए
जिसने अंतर ज्योत जगाई, तुमको विरला सोई पाए
“शुभ” हरि दर्शन की कामना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

जो कृपा आपकी पाता है, वह पंगु गिरि चढ़ जाता है
मूक भी सुर में गान करे, बिना नेत्र लिख पाता है
बस दिल से करे जो प्रार्थना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

जगदीश्वर तुम्हीं परमेश्वर तुम्हीं

जगदीश्वर तुम्हीं परमेश्वर तुम्हीं, मेरे तुम्हीं हो पालनहार
गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ, प्रभु जी मेरे मन में समा जाओ

मैं नित-नित टेर लगाता हूँ, मन मंदिर को रोज सजाता हूँ
मेरी पूजा करो स्वीकार, गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ

इस दुनिया से ममता हटने लगे, ईश्वर की तरफ मन लगने लगे
"शुभ" वंदन यही सरकार, गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ

चुन-चुन कर कलियाँ लाता रहूँ, पद पूजन अर्चन करता रहूँ
गुरु भक्ति में रहूँ सरोबार, गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ

हरि ॐ की गूँज से गूंजे गगन, मेरा निर्मल कर दो अंतर्मन
"शुभ" बालक का करो विचार, गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ

शुभ बालक पर भी कृपा करो, खाली झोलियाँ सबकी भरो
गुरु चरणों में सदा रहे प्यार, गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ
गुरूजी मेरे ह्रदय में आ जाओ, प्रभु जी मेरे मन में समा जाओ

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

साखियाँ : आत्मसाक्षात्कार दिवस

पूर्णता का पूर्ण खजाना, आन ह्रदय में समायो
गुरु कृपा हुई मेरे गुरु पर, ब्रह्मज्ञान को पायो

घडी विलक्षण भिन्न थे लक्षण, अद्भुत खेल रचायो
ब्रह्मज्ञान पाकर सतगुरु से, हरि ह्रदय प्रगटायो

सब भक्तों को बहुत बधाई, ऐसा सतगुरु पायो
"शुभ" दर्शन पाकर हम सबने, अपना भाग्य बनायो 

ब्रह्म का ज्ञानी से हुआ मिलन, ब्रह्मज्ञानी अवतारो
आसुमल थे तब तक वो, अब आसाराम कहायो 

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
संपर्क: 9990348664, Twitter: @abhimaitrey

गुरु चरणों में शीश झुका ले

गुरु चरणों में शीश झुका ले, अपने मन को शिवाला बना ले
इधर-उधर क्यों भटके प्राणी, गुरु को इष्ट अपना बना ले

नश्वर तत्वों से ममता हटाकर, ह्रदय सम्राट को अपना बनाकर
अपना सोया मुकद्दर जगा ले, गुरु चरणों में शीश झुका ले

तन मन धन से अर्पित होकर, गुरु मूरत को मन में बसाकर
ज्ञान गंगा में गोता लगा ले, गुरु चरणों में शीश झुका ले

संतों की सेवा को पाकर, जनम जनम के पाप मिटाकर
मुक्ति की ओर कदम बढ़ा ले, गुरु चरणों में शीश झुका ले

सोते जपो चाहे जागते जपना, गुरु मन्त्र को नहीं बिसरना
गुरु दर्शन की लगन बढ़ा ले, गुरु चरणों में शीश झुका ले

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
संपर्क: 9990348664, Twitter: @abhimaitrey

मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ

मैं जिंदा हूं तो, जीने का प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
रामायण के याचक बनकर, वाचन करना सीख लो 
राम नाम की महिमा का, गुणगान करना सीख लो 
मिले भक्त हनुमान, ये विश्वास देता हूँ 
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
जीना उसका जानिए जो राम नाम में लीन हो 
फिर चाहे वो राजा हो, फिर चाहे वो दीन हो 
दी हुई मैं उसकी, "शुभ" सांस लेता हूँ 
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
जीवन का आधार राम हैं, मर्यादा के धाम हैं
विमुख राम से यदि हुए तो, मिले नहीं विश्राम है
मन मंदिर से ही, दृष्टि का काम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
कितना प्यारा धर्म सनातन, प्रेम त्याग आधार है
मर्यादा जहाँ स्वयं राम हैं, कृष्ण प्रेम अवतार हैं
शाश्वत वेद पुराणों का, प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

राम गगन हैं राम धरातल,  कण-कण में श्री राम हैं
राम नवीन हैं राम पुरातन, आदि-अनंता राम हैं
ध्यान में जिनको शिवजी जपें, वो नाम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X: @abhimaitrey

अब सौंप दिया इस जीवन

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में।
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥

मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं।
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥

जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे।
मेरे सब गुण दोष समर्पित हों, करतार तुम्हारे हाथों में॥

यदि मानव का मुझे जनम मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनूँ।
इस पूजक की एक-एक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में॥

 जब संसार का कैदी बनूँ, निष्काम भाव से करम करूँ।
फिर अंत समय में प्राण तजूं, निरंकार तुम्हारे हाथों में॥

मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो।
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में॥

हम तुमको कभी नहीं भजते, फिर भी तुम हमको नहीं तजते।  
अपकार हमारे हाथों में, उपकार तुम्हारे हाथों में।।

दृग बिंदु बनाया करते हैं, इक सेतु विरहा के सागर में। 
जिससे हम पहुंचा करते हैं, उस पार तुम्हारे हाथों में।।

Monday, 8 April 2024

ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा

Le Kanha ka naam amrit barsega
ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा,
बरसेगा रे बरसेगा तू तो ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा,

चिंता सारी मिट जायेगी, जीवन में खुशिया आयेगी,
तेरे हो जावे पूरण  काम अमृत बरसेगा,
ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा

कृष्ण मुरारी की महिमा भारी, संकट काटत अति सुखकारी,
तेरे भर देंगे भंडार अमृत बरसेगा,
ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा

जो चाहो गए मिल जायेगा कभी न तू फिर दुःख पायेगा,
तू भी जपले कृष्ण का नाम अमृत बरसेगा,
ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा

दुनिया तेरे साथ चलेगी, सारी रुकावट पल में हटेगी,
तेरा खूब बढेगा मान अमृत बरसेगा,
ले कान्हा का नाम अमृत बरसेगा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Saturday, 16 March 2024

गुरु रहमत से तर जाएगा

गुरु रहमत से तर जाएगा, जरा इस दर पे आकर तो देख,

तेरा जीवन संवर जाएगा, गुरु रहमत से तर जाएगा….


इनके दर्शन की महिमा बड़ी, इतनी शुभ होती है वो घडी,

तेरा दिल भी यही गाएगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


तू तमन्ना किसी की ना कर, बस ह्रदय में गुरु ध्यान कर,

बिन मांगे तू सब पाएगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


ये दयालु है दाता मेरे, ये तो सबके दिलो में बसे,

इनके दर पे तू सब पाएगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


इनकी करुणा का वर्णन नहीं, ऐसी शांति ना मिलती कहीं,

जो भी आया संवर जाएगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


जरा सत्संग में आकर तो देख, हरि हरि ॐ गाकर तो देख 

तेरा जीवन संवर जायेगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


ले ले दीक्षा तू हो जा निहाल, पहले जैसा रहेगा ना हाल 

मुकद्दर ही बदल जायेगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


गुरु नाम तो जप कर देख, उनके विरह में रो कर तो देख 

दामन खुशियों से भर जायेगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


जग में चर्चा यूँ होगी तेरी, राह आँखें तकेंगी तेरी 

जिस गली से गुजर जायेगा, गुरु शरणी अगर आएगा,

गुरु रहमत से तर जाएगा….


गुरु दर पे आकर तो देख, गुरु दिल में बसा कर तो देख 

तू चौरासी से छूट जायेगा, तेरा बंधन ही कट जायेगा 

गुरु रहमत से तर जाएगा….


संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey