तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
मैं जब भी कभी भटका, तेरी राह से गुरुवर
मेरी बाँह खींच लाये, मुझे छोड़ा अपने दर पर
इतनी दया कि फिर भी, तुमको समझ ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
“शुभ” दास कि हैं विनती, छूटे ना दर तुम्हारा
चरणों का आसरा दो, बन जाऊं तुमको प्यारा
छूटे ना तेरा दामन, चाहे कोई इसे छुडाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
कुछ मांगने कि चाहत, मेरे दिल में अब नहीं है
जो कुछ किया जो करते, सरकार सब सही है
जितना मिला है तुमसे, वो ही संभल ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
फिर भी जो देना चाहो, सरकार प्यार देना
चरणों कि अपनी भक्ति, दिन रात मुझको देना
भूलूँ तुम्हे कभी ना, चाहे जन्म सौ-सौ आयें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
मैं जब भी कभी भटका, तेरी राह से गुरुवर
मेरी बाँह खींच लाये, मुझे छोड़ा अपने दर पर
इतनी दया कि फिर भी, तुमको समझ ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
“शुभ” दास कि हैं विनती, छूटे ना दर तुम्हारा
चरणों का आसरा दो, बन जाऊं तुमको प्यारा
छूटे ना तेरा दामन, चाहे कोई इसे छुडाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
कुछ मांगने कि चाहत, मेरे दिल में अब नहीं है
जो कुछ किया जो करते, सरकार सब सही है
जितना मिला है तुमसे, वो ही संभल ना पाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
फिर भी जो देना चाहो, सरकार प्यार देना
चरणों कि अपनी भक्ति, दिन रात मुझको देना
भूलूँ तुम्हे कभी ना, चाहे जन्म सौ-सौ आयें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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