हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
कारागार में जन्म लियो है, सृष्टि पर उपकार कियो है
तूने खोल दिया हर एक ताला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ग्वाल - बाल संग यमुना किनारे, खेलन गयो मोरे कृष्ण मुरारे
तूने कालिया मर्दन कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोकुल पर जब विपदा पडी थी, सबकी निगाहें तुम पे गडी थी
तूने गोवर्धन ही उठा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
कंस नाम का था दुराचारी, सारे जहाँ में खौफ था भारी
खौफ ख़तम तूने कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
कारागार में जन्म लियो है, सृष्टि पर उपकार कियो है
तूने खोल दिया हर एक ताला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ग्वाल - बाल संग यमुना किनारे, खेलन गयो मोरे कृष्ण मुरारे
तूने कालिया मर्दन कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोकुल पर जब विपदा पडी थी, सबकी निगाहें तुम पे गडी थी
तूने गोवर्धन ही उठा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
कंस नाम का था दुराचारी, सारे जहाँ में खौफ था भारी
खौफ ख़तम तूने कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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