Tuesday, 28 November 2023

भजन : मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं

Mere kanha ter dar pe aaun

मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं,
आके गाऊं वहां पे राधा-राधा

जब भक्तों ने कान्हा पुकारा --- कान्हा.....
तुमने आकर दिया है सहारा --- सहारा
अब बारी भी आयी है मेरी -2
काटो मेरी सकल भवबाधा
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....

यूँ तो बने तुम गोकुल के ग्वाले --- ग्वाले.....
हर जिंदगी थी तेरे हवाले --- हवाले
सब छोड़ के तुमको जपूँ  मैं 
अब हरि से मिला दो हे राधा - 2 
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....

तेरे नाम की दीवानी थी मीरा --- मीरा.....
उसकी काटी थी हर एक पीड़ा --- पीड़ा
"शुभ" झुमाया उसने जगत को - 2
गाती फिरती थी कृष्ण-राधा
मेरे कान्हा तेरे दर पे आऊं .....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Friday, 8 September 2023

लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे

Likhne wale tu hoke dayal likh de

लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

माथे पे लिख दे ज्योति गुरु की
आँखों में उनका दीदार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

जिव्या पे लिख दे नाम गुरु का
कानो में शब्द झंकार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

हाथो पे लिख दे सेवा गुरु की
तन मन धन उन पे वार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

पैरों में लिख दे जाना गुरु के द्वार
सारा जीवन ही तू उनके साथ लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

एक मत लिखना गुरु का बिछड़ना
चाहे तू सारा संसार लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे
मेरे ह्रदय अन्दर सद्गुरु का प्यार लिख दे

संकलनकर्ता: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

उठ जाग मुसाफिर भोर भई

Uth jaag musafir bhor bhayi

उठ जाग मुसाफिर भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है ।
जो जागत है सोई पावत है,
जो सोवत है सो खोवत है ॥

उठ नींद से अखियाँ खोल जरा,
और अपने प्रभु में ध्यान लगा ।
यह प्रीत करन की रीत नहीं,
प्रभु जागत है तू सोवत है ॥
जो जागत है सोई पावत है,
जो सोवत है सो खोवत है ...

जो कल करना सो आज कर ले,
जो आज करे सो अब कर ले ।
जब चिड़िया ने चुग खेत लिया,
फिर पछताए क्या होवत है ॥
जो जागत है सोई पावत है,
जो सोवत है सो खोवत है ...

नादान भुगत अपनी करनी,
ऐ पापी पाप में चैन कहाँ ।
जब पाप की गठड़ी शीश धरी,
अब शीश पकड़ क्यूँ रोवत है ॥
जो जागत है सोई पावत है,
जो सोवत है सो खोवत है ...

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं

Kisi ke kaam jo aaye, usse insaan kahte hain

किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

यह दुनियाँ एक उलझन है, कहीं धोखा कहीं ठोकर।
कोई हँस-हँस के जीता है, कोई जीता है रो-रोकर॥
जो गिरकर फिर सँभल जाये, उसे इन्सान कहते हैं॥
किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

अगर गलती रुलाती है, तो राहें भी दिखाती है।
मनुज गलती का पुतला है, यह अक्सर हो ही जाती है॥
जो कर ले ठीक गलती को, उसे इन्सान कहते हैं॥
किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

कभी धनवान है कितना, कभी इन्सान निर्धन है।
कभी सुख है, कभी दुःख है, इसी का नाम जीवन है॥
जो मुश्किल में न घबराये, उसे इन्सान कहते हैं॥
किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

यूँ भरने को तो दुनियाँ में, पशु भी पेट भरते हैं।
लिये इन्सान का दिल जो, वो नर परमार्थ करते हैं॥
पथिक जो बाँट कर खाये, उसे इन्सान कहते हैं॥
किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" Twitter: @abhimaitrey

Thursday, 7 September 2023

मेरे नयनों में बस जाओ श्याम

Mere nayano me bas jao shyam

मेरे नयनों में बस जाओ श्याम,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे दिल में जगह बनाओ श्याम,आन मिलो अब आन मिलो

मेरी अँखियाँ पंथ निहार रही,आन मिलो अब आन मिलो
कृष्णा- कृष्णा पुकार रहीं,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे दिल के हो दिलदार तुम्हीं,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे प्रियवर प्राणाधार तुम्हीं,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

हम टकुर-२ तुम्हें देखते हैं,आन मिलो अब आन मिलो
हम रोज संदेशा भेजते हैं,आन मिलो अब आन मिलो
तुम क्यों नहीं झलक दिखाते हो,आन मिलो अब आन मिलो
या हमें देख छिप जाते हो,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

तुम कान्हा कृष्ण मुरारी हो,आन मिलो अब आन मिलो
तुम गोवर्धन गिरधारी हो,आन मिलो अब आन मिलो
तुम छलिया भीष्म पितामह के,आन मिलो अब आन मिलो
तुम मित्र हो संत सुदामा के,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

मैंने ऐसा कौन सा पाप किया,आन मिलो अब आन मिलो
तुने चाहा जब तेरा जाप किया,आन मिलो अब आन मिलो
फिर मेरी क्यों नहीं सुनते हो,आन मिलो अब आन मिलो
फिर इतनी देर क्यों करते हो,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

सुना है हर घट रहते हो,आन मिलो अब आन मिलो
फिर मुझको क्यों नहीं दिखते हो?आन मिलो अब आन मिलो
मेरी वाणी में क्या आह नहीं,आन मिलो अब आन मिलो
या तुम्हें मेरी परवाह नहीं,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

तुमसे मेरी शिकायत है,आन मिलो अब आन मिलो
या कहदो मेरी आदत है,आन मिलो अब आन मिलो
मुझे तेरे बगैर है जीना नहीं,आन मिलो अब आन मिलो
तू ना सही तेरी याद सही,आन मिलो अब आन मिलो
मेरे नयनों में बस जाओ श्याम....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X(twitter): @abhimaitrey

Wednesday, 6 September 2023

हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे

Hue avatarit hain aaj Kanhaiya hamare

हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे
कन्हैया हमारे, नन्द बाबा दुलारे
नन्द बाबा दुलारे, यशोदा के प्यारे
हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे

देखो मेरे छलिया की शान निराली, सत्संग की भर -भर देते प्याली
करें भक्तों का उद्धार कन्हैया हमारे, हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे ...

कैसा मंगल दिवस है आया, भक्तों ने बड़ी धूम से मनाया
कीर्तन की बहती बयार कन्हैया हमारे, हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे ...

जन्म लिया कारागार में जिसने, बंधन मुक्त किये हैं उसने
हुआ धरती पर अवतार कन्हैया हमारे, हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे ...

ज्ञान गगन के सूर्य कन्हैया, शील शांत माधुर्य कन्हैया
सोलह कला के अवतार कन्हैया हमारे, हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे ...

"शुभ" जगत में आनंद छाया, मंगलाचरण सारे विश्व में गाया
कलिकाल में तारणहार कन्हैया हमारे, हुए अवतरित हैं आज कन्हैया हमारे ...

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Tuesday, 22 August 2023

बड़ा अद्भुत नजारा तेरे धाम का

Main to diwana Prabhu Ram ka

बड़ा अद्भुत नजारा तेरे धाम का
मैं तो दीवाना प्रभु राम का
अनमोल तुमने बना दिया
मैं तो नहीं था किसी काम का

दुनिया प्रभु तेरी अजब निराली
कहीं पर अँधेरा कहीं पर दिवाली
कहीं सुबह का नजारा कहीं शाम का
मैं तो दीवाना प्रभु राम का .......

कहीं उत्सव कहीं मातम छाया
हर घट बसती है तेरी माया
कहीं गूंजे जयकारा प्रभु नाम का
मैं तो दीवाना प्रभु राम का .......

तेरी दी हुई सांस मैं लेता
सांस सांस "शुभ" नाम मैं लेता
नहीं लेना समय विश्राम का
मैं तो दीवाना प्रभु राम का .......

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Saturday, 19 August 2023

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ, मुझको दर्शन दे देना - माता

Aankhen band karu ya kholu

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ, मुझको दर्शन दे देना ll
दर्शन दे देना, मात मुझे दर्शन दे देना ll
ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ .....

मैं नाचीज़ हूँ बन्दा तेरा, "तू सबकी माता है" ll (मईया)
तेरे हाथ में सारी दुनियाँ, "मेरे हाथ में क्या है" ll
तुझको देखूँ जिसमे ऐसा, दर्पण दे देना ll
ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ .....

मेरे अन्दर तेरी ज्योति, "रिश्ता है सदियों का" ll (मईया)
जैसे इक नाता होता है, "सागर से नदियों का" ll
करूँ साधना तेरी ऐसा, साधन दे देना ll
ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ .....

हम सब हैं भक्तन माँ तेरे, "तू है मात हमारी" ll (मईया)
एक ही बिनती सुन लो मईया, "हम सब शरण तुम्हारी" ll
तेरे दर पे आते रहें हम, शक्ति दे देना ll
ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ .....

एक प्रार्थना तुमसे मईया, "मन में आते रहना" ll (मईया)
हर इक साँस में मईया अपनी, "झलक दिखते रहना" ll
अंत समय जब प्राण तजूं तब, दर्शन दे देना ll
ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ .....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" X (twitter): @abhimaitrey

हे भवानी तू चाहे ना बिगड़ी बना

हे भवानी तू चाहे ना बिगड़ी बना, हम तो दर तेरे आते रहेंगे
माँ मंदिर की देहलीज पर बैठ कर, प्यार से गाते रहेंगे

तू भी रखना यकीन हमने कहना नहीं, आसमा से ना और ना ज़मीन से
करदे वादा अटल है इशाराअटल, खैर लेनी तो लेनी यही से
तू हमे देख कर चाहे मुँह मोड़ ले, हम तो फिर भी बुलाते रहेंगे
हे भवानी तू चाहे ना बिगड़ी बना, हम तो दर तेरा आते रहेंगे

हम भले या बुरे तेरे कदमो तले, लेके आये है इस ज़िंदगी को,
चाहे मसलो हमे चाहे कुचलो हमें, शायद मर ही जाये ख़ुशी से
इस निगाहो में माँ तेरी सूरत बसी, मैया तुमको रिझाते रहेंगे
हे भवानी तू चाहे ना बिगड़ी बना, हम तो दर तेरे आते रहेंगे

हाय थके हैं माँ फिर भी पक्के है माँ, कर दिया खुद को तेरे हवाले
कैसा दुनिया का दर अब है कैसा फ़िक्र, पास रखले या दिल में छुपा ले
कहता निर्दोष तेरा है तुझसे ये माँ, तेरा दीदार पाते रहेंगे
हे भवानी तू चाहे ना बिगड़ी बना, हम तो दर तेरे आते रहेंगे

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"



Twitter: @abhimaitrey

Wednesday, 19 July 2023

भक्त का ब्रह्म से (कृष्ण-सुदामा मिलन)

भक्त का ब्रह्म से, हो रहा है मिलन
है ये अद्भुत घडी, है ये अद्भुत मिलन

जिव्हा गाने लगे, अश्रु बहने लगें
अश्रु बहने लगें, श्वास जपने लगे
हर घडी हो प्रणव, धुन का ही मनन
है ये अद्भुत घडी, है ये अद्भुत मिलन

"शुभ" सुदामा द्वारे है, याचक बना
याचक बना, नाम जापक बना
दास को हे प्रभु, रखना अपनी शरण
है ये अद्भुत घडी, है ये अद्भुत मिलन

कृष्ण ने जब सुना, सुदामा द्वारे खड़े
मित्र द्वारे खड़े, कान्हा दौड़ पड़े
देख मित्र की दशा, किया करुण रुदन
है ये अद्भुत घडी, है ये अद्भुत मिलन

कृष्ण लेकर सुदामा को, महल चले
लेकर महल चले, पुष्प बरसन लगे
अश्रु धार से कन्हैया, धो रहे हैं चरण
है ये अद्भुत घडी, है ये अद्भुत मिलन

चाहे संसार के, सारे सुख हैं मिलें
सारे सुख हैं मिलें, पर टिक ना सकें
कहीं मद हो गया, तो कहीं है जलन
ना ही भक्ति करी, ना किया है भजन
फिर भला कैसे हो, ब्रह्म से ही मिलन

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X: @abhimaitrey

Saturday, 24 June 2023

अवतार लेकर आते हैं भगवान हे प्राणी

जब – जब भी धरती पर हुई है धर्म की हानि
अवतार लेकर आते हैं भगवान हे प्राणी....

एक समय का जिक्र करें, जब कंस ने हाहाकार किया
मार दिया निर्मल शिशुओं को, बहन पे अत्याचार किया
हुआ कृष्ण अवतार, रोकी उसकी मनमानी -२
अवतार लेकर आते हैं भगवान हे प्राणी....

एक बालक प्रहलाद हुआ, जो भक्त था भगवान का
हिरण्याकुश ने किया प्रताड़ित, भोग्य बना अपमान का
हुआ नरसिह अवतार, और मारा अभिमानी -२
अवतार लेकर आते हैं भगवान हे प्राणी....

“शुभ” सेवक की गुरु चरणों में, विनती बारम्बार है
सत्संग – दर्शन मिले निरंतर, अर्ज यही हर बार है
क्षमा करो इस दास की, मेरे सतगुरु नादानी -२
अवतार लेकर आते हैं भगवान हे प्राणी....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

भक्त का ब्रह्म से, होगा जब भी मिलन

भक्त का ब्रह्म से, होगा जब भी मिलन
होगी अद्भुत घडी, होगा अद्भुत मिलन

जिव्हा गाने लगे, अश्रु बहने लगें
अश्रु बहने लगें, श्वास जपने लगे
हर घडी हो प्रणव, धुन का ही मनन
होगी अद्भुत घडी, होगा अद्भुत मिलन

"शुभ" द्वारे तिहारे है, याचक बना
याचक बना, नाम जापक बना
दास को हे प्रभु, रखना अपनी शरण
होगी अद्भुत घडी, होगा अद्भुत मिलन

चाहे संसार के, सारे सुख हैं मिलें
सारे सुख हैं मिलें, पर टिक ना सकें
कहीं मद हो गया, तो कहीं है जलन
ना ही भक्ति करी, ना किया है भजन

फिर भला कैसे हो, ब्रह्म से ही मिलन

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

करुणा करो आओ दर्शन तो दे दो राम

पलक पांवड़े हम, बिछा कर के बैठे हैं
करुणा करो आओ दर्शन तो दे दो राम

ब्रह्मज्ञानी की सेवा से हटकर
शरण ना मिलेगी त्रिलोक भटक कर
दयनीय दशा से, बचा दो राम
करुणा करो आओ दर्शन तो दे दो राम

सृष्टि तुम्हारी हम भी तुम्हारे हैं
दृष्टि हमारी देखें तेरे सहारे है
चंचल मन को, निश्चल कर दो राम
करुणा करो आओ दर्शन तो दे दो राम

कल्पित जग का दूर करो यह भ्रम
हे अविनाशी अचिंत्य पारब्रह्म
दिव्य संस्कारों का सृजन मुझमें कर दो राम
करुणा करो आओ दर्शन तो दे दो राम

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Wednesday, 26 April 2023

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है
स्वीकारो गुरुदेव चरण में वंदन है

जब-जब भी प्रभु तुमने पुकारा
आ ना सका मैं द्वार तिहारा
बंधन है गुरुदेव, जगत का बंधन है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

जब-जब भी मैंने तुमको पुकारा
तरह-तरह का लिया सहारा
चंचल है गुरुदेव, ये मन बड़ा चंचल है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

रोम रोम में नाम सुमिरता
एक पल भी प्रभु तुम्हें न बिसरता
गदगद है गुरुदेव ये मन बड़ा गदगद है

वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है

संकलनकर्ता एवं रचनाकार: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Tuesday, 25 April 2023

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा
मैं कितना बड़भागा कि मेरा, राम चरण मन लागा

राम नाम का ओढ़ दुशाला, मन मंदिर कर लिया उजाला
अब अँधियारा ना करना प्रभु, सोया मन अब जागा रे जागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

हे प्रभु सुन लो अर्जी हमारी, हम आये हैं शरण तुम्हारी
अपनी शरण ठिकाना देना, हर पल ये वर माँगा रे माँगा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

ऐसा वर दो मुझ को सियावर, लहर-लहर गूंजे मेरा स्वर
कोयल जैसा गीत सुनाये, तुम्हरी कृपा से कागा रे कागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

प्रीत का बंधन तोड़ ना देना, बीच राह में छोड़ ना देना
मुख मोड़ा तो टूट जायेगा, सांसों वाला धागा रे धागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

जो आ जाये हैं उनकी भी, जो ना आ पाए उनकी भी
मनोकामना पूरी करना, मंगल मन अनुरागा रे लागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना
प्रभु के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

लोक शिक्षण हेतु प्रभु अवतार होत
जिनकी करुणा से भूमि दुखवार होत
सह सकत न दीनन करुण क्रंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

रोम-रोम काम कोटिक गुलाम है
सिया प्राणप्रिया प्रियतम श्री राम हैं
जिनकी समता में कोटिक रवि चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

सारी दुनिया में अप्रतिम प्रभाव है
किन्तु कोमल अति सरल स्वभाव है
जिनको द्वार है काहू के हित वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

राजगद्दी मिले या वनवास हो
जिनके हिय में हरष ना हरास हो
होय दिव्य मुख चंद्रकाहू अनंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिनका दीनन के प्रति सहज प्यार है
ऐसो और कौन जग में उदार है
करे दीनन के दुःख को निकंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

नाथ पतित को पावन बनावते
दीन दुर्बल प्रभु के मन भावते
जिन्हें भावे ना कपट छल छंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

दीन शबरी को माँ तुल्य मानते
गीध को भी पिता सा सनमानते
जिन्हें व्यापे जगत के दुःख वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिन्हें सेवक हैं पुकारते सुहावते
भक्त प्रेमी हैं जिन्हें भावते
जिन्हें आलस प्रमाद है पसंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

अपने शत्रु का करते जो भी हित हैं
भालू वानर निषाद जिनके मित्र हैं
तपत हिय हित है शीतल जिन चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Saturday, 1 April 2023

प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा

प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

केसर के तिलक लगाए मेरे राम जी,
लाल सिन्दूर हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

ऊँचे सिंघासन पे बैठे मेरे राम जी,
चरनो में बैठे हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

पीला पीताम्बर पहने मेरे रामजी ,
लाल लंगोट हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

मेवा और मिश्री का भोग मेरे राम जी,
लड्डूअन का भोग हनुमाना बोलो जय सिया रामा,
प्रेम से बोलो हनुमाना बोलो जय सिया रामा…

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"



Twitter: @abhimaitrey

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में,
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

काल सदा अपने रस डोले,
ना जाने कब सर चढ़ बोले।
हर का नाम जपो निसवासर,
अगले समय पर समय ही ना॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

भूषन से सब अंग सजावे,
रसना पर हरी नाम ना लावे।
देह पड़ी रह जावे यही पर,
फिर कुंडल और नगीना क्या॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

तीरथ है हरि नाम तुम्हारा,
फिर क्यूँ फिरता मारा मारा।
अंत समय हरि नाम ना आवे,
फिर काशी और मदीना क्या॥
हरि नाम नहीं तो जीना क्या….

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई,
जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है l

पता जब लगा मेरी हस्ती का मुझको,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

सभी में सभी में फकत मैं ही मैं हूँ,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

ना दुःख है ना सुख है ना शोक है कुछ भी,
अजब है यह मस्ती पीया कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

अरे मैं हूँ आनंद आनंद मेरा
मस्ती ही मस्ती और कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

भ्रम है द्वन्द है जो तुमको हुआ है
हटाया जो उसको खफा कुछ नहीं है
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...


संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

Saturday, 18 February 2023

श्री गणेश जी का भजन

शिवनंदन दीनदयाल हो तुम,  गणराज तुम्हारी जय होवे,

गणराज तुम्हारी जय होवे,  महाराज तुम्हारी जय होवे,
शिव नंदन दीन दयाल हो तुम,  गणराज तुम्हारी जय होवे।।

 

इक छत्र तुम्हारे सिर सोहे,
एकदंत तुम्हारा मन मोहे,
शुभ लाभ सभी के दाता हो,
गणराज तुम्हारी जय होवे,
शिव नंदन दीन दयाल हो तुम,  गणराज तुम्हारी जय होवे।।

 

ब्रम्हा बन कर्ता हो तुम ही,
विष्णु बन भर्ता हो तुम ही,
शिव बन करके संहार हो तुम,
गणराज तुम्हारी जय होवे,
शिव नंदन दीन दयाल हो तुमगणराज तुम्हारी जय होवे।।

 

हर डाल में तुम हर पात में तुम,
हर फूल में तुम हर मूल में तुम,
संसार में बस एक सार हो तुम,
गणराज तुम्हारी जय होवे,
शिव नंदन दीन दयाल हो तुमगणराज तुम्हारी जय होवे।।

 

शिवनंदन दीनदयाल हो तुम,
गणराज तुम्हारी जय होवे,
शिव नंदन दीन दयाल हो तुम,
गणराज तुम्हारी जय होवे।।

 

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरे तन में भी राम, मेरे मन में भी राम

मेरे तन में भी राम, मेरे मन में भी राम
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे

जैसे चंदा में राम जैसे सूरज में राम
अम्बर तारो में समाया तेरा नाम रे
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे
मेरे तन में भी राम……….

जैसे भीलनी के राम जैसे मीरा के श्याम
नर नारी में समाया तेरा नाम रे
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे
मेरे तन में भी राम……….

जैसे सीता के राम जैसे राधा के श्याम
पत्ते पत्ते में समाया तेरा नाम रे
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे
मेरे तन में भी राम……….

जैसे सरयू में राम जैसे यमुना में श्याम
कण कण में समाया तेरा नाम रे
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे
मेरे तन में भी राम……….

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

आये प्रभु जी सजा है दरबार

आये प्रभु जी सजा है दरबार, करो दर्शन हो जाओ भव पार -2

दर्श प्रभु के जो भी पाता, भव बंधन से वो तर जाता
ब्रह्मज्ञानी करें उद्धार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

वाणी मधुर है चाल मधुर है, भक्तों में तेरा प्यार मधुर है
करें मधुमय सारा संसार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

भक्ति बढ़ाते वचन तुम्हारे, श्रद्धा टिके जो तुमको निहारे
बस मिलता रहे तेरा प्यार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

करुणामयी है स्वाभाव तुम्हारा, दीन - दुखी सब पायें सहारा
मेरे ह्रदय बसो सरकार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

हम ना कभी तेरी राह से भटकें, माता के गर्भ में फिर से ना लटकें
खुले मुक्ति का "शुभ" द्वार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

ज्योत ज्ञान की जले ह्रदय में, तिमिर का ना हो वास हिय में
दिल बन जाए गुरुद्वार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

मैं तेरा प्रभु तू है मेरा, नाम रतन का जपते फेरा
बहे कीर्तन की मधुर बयार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

जग की चर्चा रास ना आती, तुमसे लगनी जब लग जाती
“शुभ” चर्चा ही हो हर बार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

पढ़-पढ़ जो ना समझ में आया, तुमने सहज में वो समझाया
हमें लगता है चमत्कार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....

रचियता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला

रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला
कदम कदम पर रक्षा करता, घर घर करे उजाला उजाला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥

निशदिन तेरा ध्यान लगाऊं, जपूं आपकी की माला
धूप दीप नित ज्योत जगाऊ, पड़े ना यम से पाला रे पाला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥

मन मंदिर में वास करो प्रभु, ओ अंजनी के लाला
पापों का मेरे नाश करो तुम, बनके दीनदयाला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥

लाल सुरत मेरे मन को मोहे, शीश पे मुकुट विशाला
कानन कुंडल तिलक विशाला, गल मोतियन की माला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥

राम सिया तेरे मन में मोहे, अजर अमर तेरी माया
घर घर होवे पूजा तेरी, सिया सुध लाने वाला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥

लक्ष्मण मूर्छित बड़े धरनी पर, वैध बुला कर लाया
आज्ञा पा संजीवन लाने, पवन वेग से चाला
रखवाला प्रतिपाला मेरा लाल लंगोटे वाला॥


संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

दोनों अलग- अलग हैं - काव्य रचना

जय श्री राम 

 

उम्र में बड़ापन और उम्र में बड़प्पन 

दोनों अलग- अलग हैं 

 

वाणी में मधुरता और वाणी में चतुरता 

दोनों अलग- अलग हैं 

 

सेवा का मान होना और सेवा में मान होना 

दोनों अलग- अलग हैं 

 

व्यवहार में सरसता, यदि जीवन में आ जाये 

छोटी आयु में भी, बड़प्पन की झलक आये 

 

रचनाकार: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 28 January 2023

मेरे सांवरे सलोने कन्हैया

मेरे सांवरे सलोने कन्हैया, तेरा जलवा कहाँ पर नही है
तेरा जलवा कहाँ पर नही है, तेरा जलवा कहाँ पर नही है

कान वालो ने जाकर सुना है, आँख वालो ने जाकर के देखा ।
उनकी आँखो मे परदा पड़ा है, जिसने जलवा ये देखा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

लोग पीते है पी पी के गिरते, हम पीते है गिरते नही है ।
हम तो पीते है सत्संग का प्याला, ये अँगुरो की मदिरा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

मन्दिर जाऊँ मैं सांझ सवेरे, अलख जगाऊ मैं नाम की तेरे ।
दुनिया वालो से अब क्या डरना, हम को दुनिया की परवाह नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

सुबह शाम है जिस ने पुकारा, तेरे नाम का लेकर सहारा ।
सच्चे भाव से जिसने पुकारा, तेरे आने मे देर नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरी मटकी में मार गया ढेला

मेरी मटकी में मार गया ढेला
मेरा श्याम बड़ा अलबेला

कभी राधा के संग,कभी रुकमण के संग
कभी रास रचाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी गंगा के तीर, कभी यमुना के तीर
कभी सरयू में नहाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी चंदा के संग, कभी सूरज के संग
कभी तारों के संग खेल खेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी ग्वालों के संग,कभी गोपियों के संग
कभी गउए चराए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी संतों के साथ, कभी भक्तों के साथ
कभी कीर्तन में नाचे अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

ब्रज के नंदलाला राधा के सांवरिया

ब्रज के नंदलाला राधा के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया

मीरा पुकारे आजा गिरधर गोपाला
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला
कौन मिटाये उसे जिसे तूने राख लिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

जब तेरे गोकुल में छाया दुःख भारी
एक इशारे में विपदा सब टारी
मुड़ गया गोवर्धन जिधर को मोड़ दिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

देख रहे हो तुम मेरे दुःख सारे
अब दर्शन दे दो नैनों के प्यारे
अधर पे मुरली हो काँधे पे कावरिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

नैनों में श्याम बसे मन में बनवारी
सुध बिसराय गयी मुरली की धुन प्यारी
मेरे मन मंदिर में रास रचाओ रसिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

भजन: मन जपा कर राम लक्ष्मण जानकी

मन जपा कर राम लक्ष्मण जानकी, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

मन के मंदिर में बिठा रघुबीर को, वो समझते हैं भगत की पीर को
राम के बिना जिंदगी किस काम की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

निम्नलिखित पंक्तियाँ लिखने का "शुभ" को सौभाग्य मिला ......

मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा ही रहूँ, मांगे बिन मिलता सभी कुछ क्या कहूँ
हो रहा जो है कृपा भगवान् की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

सेवा का जो भाव हनुमत को मिला, उसका कुछ हिस्सा हमें भी दो दिला
याचना है भक्ति की "शुभ" ध्यान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

जो निरन्तर जपते हैं श्री राम को, ह्रदय अंदर है रखा श्री धाम को
अहंकार ना ना इच्छा सन्मान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ

मैं जिंदा हूं तो, जीने का प्रमाण देता हूँ ।
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

रामायण के याचक बनकर, वाचन करना सीख लो
राम नाम की महिमा का, गुणगान करना सीख लो
मिले भक्त हनुमान, ये विश्वास देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

जीना उसका जानिए जो राम नाम में लीन हो
फिर चाहे वो राजा हो, फिर चाहे वो दीन हो
दी हुई उसकी "शुभ" सांस लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

जीवन का आधार राम हैं, मर्यादा के धाम हैं
विमुख राम से यदि हुए तो, मिले नहीं विश्राम है
मन मंदिर से ही, दृष्टि का काम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

कितना प्यारा धर्म सनातन, प्रेम त्याग आधार है
मर्यादा जहाँ स्वयं राम हैं, कृष्ण प्रेम अवतार हैं
शाश्वत वेद पुराणों का, प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

राम गगन हैं राम धरातल, कण-कण में श्री राम हैं
राम नवीन हैं राम पुरातन, आदि-अनंता राम हैं
ध्यान में जिनको शिवजी जपें, वो नाम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

रचियता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

साखियाँ

किसी को काम की इच्छा, किसी को चाम की इच्छा 

किसी को दाम की इच्छा, किसी को खुद नाम की इच्छा 

मजे में रहे सदा "शुभ" वो, जिसे हरि नाम की इच्छा 


ज्ञान की चलती - फिरती मूरत, योग सिद्धि के दाता ।

कुछ ना कुछ वो पा जाता, जो द्वार तिहारे आता ।।


हम बडभागी दास तुम्हारे, मिला है भक्ति दान ।

शरण तिहारी छूटे ना, चाहे मिले मान-अपमान ।।


सुख रूप के अथाह सागर, मुक्ति का द्वार अनोखा |

परिवर्तन क्षण भर में कर दे, ऐसा सेवक ना दूजा देखा ||


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

राम चरण मन लागा रे मेरा

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा
मैं कितना बड़भागा कि मेरा, राम चरण मन लागा

राम नाम का ओढ़ दुशाला, मन मंदिर कर लिया उजाला
अब अँधियारा ना करना प्रभु, सोया मन अब जागा रे जागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

हे प्रभु सुन लो अर्जी हमारी, हम आये हैं शरण तुम्हारी
अपनी शरण ठिकाना देना, हर पल ये वर माँगा रे माँगा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

ऐसा वर दो मुझ को सियावर, लहर-लहर गूंजे मेरा स्वर
कोयल जैसा गीत सुनाये, तुम्हरी कृपा से कागा रे कागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

प्रीत का बंधन तोड़ ना देना, बीच राह में छोड़ ना देना
मुख मोड़ा तो टूट जायेगा, सांसों वाला धागा रे धागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

जो आ जाये हैं उनकी भी, जो ना आ पाए उनकी भी
मनोकामना पूरी करना, मंगल मन अनुरागा रे लागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"



Twitter: @abhimaitrey