मन जपा कर राम लक्ष्मण जानकी, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की
मन के मंदिर में बिठा रघुबीर को, वो समझते हैं भगत की पीर को
राम के बिना जिंदगी किस काम की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की
निम्नलिखित पंक्तियाँ लिखने का "शुभ" को सौभाग्य मिला ......
मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा ही रहूँ, मांगे बिन मिलता सभी कुछ क्या कहूँ
हो रहा जो है कृपा भगवान् की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की
सेवा का जो भाव हनुमत को मिला, उसका कुछ हिस्सा हमें भी दो दिला
याचना है भक्ति की "शुभ" ध्यान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की
जो निरन्तर जपते हैं श्री राम को, ह्रदय अंदर है रखा श्री धाम को
अहंकार ना ना इच्छा सन्मान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
No comments:
Post a Comment