Saturday, 28 January 2023

मेरी मटकी में मार गया ढेला

मेरी मटकी में मार गया ढेला
मेरा श्याम बड़ा अलबेला

कभी राधा के संग,कभी रुकमण के संग
कभी रास रचाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी गंगा के तीर, कभी यमुना के तीर
कभी सरयू में नहाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी चंदा के संग, कभी सूरज के संग
कभी तारों के संग खेल खेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी ग्वालों के संग,कभी गोपियों के संग
कभी गउए चराए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी संतों के साथ, कभी भक्तों के साथ
कभी कीर्तन में नाचे अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

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