मेरे सांवरे सलोने कन्हैया, तेरा जलवा कहाँ पर नही है
तेरा जलवा कहाँ पर नही है, तेरा जलवा कहाँ पर नही है
कान वालो ने जाकर सुना है, आँख वालो ने जाकर के देखा ।
उनकी आँखो मे परदा पड़ा है, जिसने जलवा ये देखा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....
लोग पीते है पी पी के गिरते, हम पीते है गिरते नही है ।
हम तो पीते है सत्संग का प्याला, ये अँगुरो की मदिरा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....
मन्दिर जाऊँ मैं सांझ सवेरे, अलख जगाऊ मैं नाम की तेरे ।
दुनिया वालो से अब क्या डरना, हम को दुनिया की परवाह नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....
सुबह शाम है जिस ने पुकारा, तेरे नाम का लेकर सहारा ।
सच्चे भाव से जिसने पुकारा, तेरे आने मे देर नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....
संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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