Saturday, 28 January 2023

मेरे सांवरे सलोने कन्हैया

मेरे सांवरे सलोने कन्हैया, तेरा जलवा कहाँ पर नही है
तेरा जलवा कहाँ पर नही है, तेरा जलवा कहाँ पर नही है

कान वालो ने जाकर सुना है, आँख वालो ने जाकर के देखा ।
उनकी आँखो मे परदा पड़ा है, जिसने जलवा ये देखा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

लोग पीते है पी पी के गिरते, हम पीते है गिरते नही है ।
हम तो पीते है सत्संग का प्याला, ये अँगुरो की मदिरा नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

मन्दिर जाऊँ मैं सांझ सवेरे, अलख जगाऊ मैं नाम की तेरे ।
दुनिया वालो से अब क्या डरना, हम को दुनिया की परवाह नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

सुबह शाम है जिस ने पुकारा, तेरे नाम का लेकर सहारा ।
सच्चे भाव से जिसने पुकारा, तेरे आने मे देर नही है ॥
मेरे सांवरे सलोने कन्हैया.....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरी मटकी में मार गया ढेला

मेरी मटकी में मार गया ढेला
मेरा श्याम बड़ा अलबेला

कभी राधा के संग,कभी रुकमण के संग
कभी रास रचाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी गंगा के तीर, कभी यमुना के तीर
कभी सरयू में नहाए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी चंदा के संग, कभी सूरज के संग
कभी तारों के संग खेल खेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी ग्वालों के संग,कभी गोपियों के संग
कभी गउए चराए अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

कभी संतों के साथ, कभी भक्तों के साथ
कभी कीर्तन में नाचे अकेला, मेरा श्याम बड़ा अलबेला.....

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

ब्रज के नंदलाला राधा के सांवरिया

ब्रज के नंदलाला राधा के सांवरिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया

मीरा पुकारे आजा गिरधर गोपाला
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला
कौन मिटाये उसे जिसे तूने राख लिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

जब तेरे गोकुल में छाया दुःख भारी
एक इशारे में विपदा सब टारी
मुड़ गया गोवर्धन जिधर को मोड़ दिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

देख रहे हो तुम मेरे दुःख सारे
अब दर्शन दे दो नैनों के प्यारे
अधर पे मुरली हो काँधे पे कावरिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

नैनों में श्याम बसे मन में बनवारी
सुध बिसराय गयी मुरली की धुन प्यारी
मेरे मन मंदिर में रास रचाओ रसिया
सब दुःख दूर हुए जब से तेरा नाम लिया ......

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

भजन: मन जपा कर राम लक्ष्मण जानकी

मन जपा कर राम लक्ष्मण जानकी, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

मन के मंदिर में बिठा रघुबीर को, वो समझते हैं भगत की पीर को
राम के बिना जिंदगी किस काम की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

निम्नलिखित पंक्तियाँ लिखने का "शुभ" को सौभाग्य मिला ......

मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा ही रहूँ, मांगे बिन मिलता सभी कुछ क्या कहूँ
हो रहा जो है कृपा भगवान् की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

सेवा का जो भाव हनुमत को मिला, उसका कुछ हिस्सा हमें भी दो दिला
याचना है भक्ति की "शुभ" ध्यान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

जो निरन्तर जपते हैं श्री राम को, ह्रदय अंदर है रखा श्री धाम को
अहंकार ना ना इच्छा सन्मान की, प्रेम से जय बोल दो हनुमान की

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ

मैं जिंदा हूं तो, जीने का प्रमाण देता हूँ ।
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

रामायण के याचक बनकर, वाचन करना सीख लो
राम नाम की महिमा का, गुणगान करना सीख लो
मिले भक्त हनुमान, ये विश्वास देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

जीना उसका जानिए जो राम नाम में लीन हो
फिर चाहे वो राजा हो, फिर चाहे वो दीन हो
दी हुई उसकी "शुभ" सांस लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

जीवन का आधार राम हैं, मर्यादा के धाम हैं
विमुख राम से यदि हुए तो, मिले नहीं विश्राम है
मन मंदिर से ही, दृष्टि का काम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

कितना प्यारा धर्म सनातन, प्रेम त्याग आधार है
मर्यादा जहाँ स्वयं राम हैं, कृष्ण प्रेम अवतार हैं
शाश्वत वेद पुराणों का, प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

राम गगन हैं राम धरातल, कण-कण में श्री राम हैं
राम नवीन हैं राम पुरातन, आदि-अनंता राम हैं
ध्यान में जिनको शिवजी जपें, वो नाम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

रचियता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

साखियाँ

किसी को काम की इच्छा, किसी को चाम की इच्छा 

किसी को दाम की इच्छा, किसी को खुद नाम की इच्छा 

मजे में रहे सदा "शुभ" वो, जिसे हरि नाम की इच्छा 


ज्ञान की चलती - फिरती मूरत, योग सिद्धि के दाता ।

कुछ ना कुछ वो पा जाता, जो द्वार तिहारे आता ।।


हम बडभागी दास तुम्हारे, मिला है भक्ति दान ।

शरण तिहारी छूटे ना, चाहे मिले मान-अपमान ।।


सुख रूप के अथाह सागर, मुक्ति का द्वार अनोखा |

परिवर्तन क्षण भर में कर दे, ऐसा सेवक ना दूजा देखा ||


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

राम चरण मन लागा रे मेरा

राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा
मैं कितना बड़भागा कि मेरा, राम चरण मन लागा

राम नाम का ओढ़ दुशाला, मन मंदिर कर लिया उजाला
अब अँधियारा ना करना प्रभु, सोया मन अब जागा रे जागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

हे प्रभु सुन लो अर्जी हमारी, हम आये हैं शरण तुम्हारी
अपनी शरण ठिकाना देना, हर पल ये वर माँगा रे माँगा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

ऐसा वर दो मुझ को सियावर, लहर-लहर गूंजे मेरा स्वर
कोयल जैसा गीत सुनाये, तुम्हरी कृपा से कागा रे कागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

प्रीत का बंधन तोड़ ना देना, बीच राह में छोड़ ना देना
मुख मोड़ा तो टूट जायेगा, सांसों वाला धागा रे धागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

जो आ जाये हैं उनकी भी, जो ना आ पाए उनकी भी
मनोकामना पूरी करना, मंगल मन अनुरागा रे लागा
राम चरण मन लागा रे मेरा, राम चरण मन लागा

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"



Twitter: @abhimaitrey