Saturday, 28 January 2023

साखियाँ

किसी को काम की इच्छा, किसी को चाम की इच्छा 

किसी को दाम की इच्छा, किसी को खुद नाम की इच्छा 

मजे में रहे सदा "शुभ" वो, जिसे हरि नाम की इच्छा 


ज्ञान की चलती - फिरती मूरत, योग सिद्धि के दाता ।

कुछ ना कुछ वो पा जाता, जो द्वार तिहारे आता ।।


हम बडभागी दास तुम्हारे, मिला है भक्ति दान ।

शरण तिहारी छूटे ना, चाहे मिले मान-अपमान ।।


सुख रूप के अथाह सागर, मुक्ति का द्वार अनोखा |

परिवर्तन क्षण भर में कर दे, ऐसा सेवक ना दूजा देखा ||


रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Twitter: @abhimaitrey

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