हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
सर्व कला भरपूर हो स्वामी, सकल घटा के अंतर्यामी
तू ही घट-घट में बसने वाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
मित्र सुदामा को गले लगाया, नयन नीर से चरण धुलाया
तूने दिव्य उदाहरण रच डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
राम जनम जब तुमने लिया था, हनुमत अपना सेवक किया था
तूने रावन को ही मिटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Sunday, 12 October 2025
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 4
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
भक्त नरसी का भात भराया, भक्त के कारन दौड़ा आया
तू भाई बना भात लाया रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
विश्वगुरु तुझे ये जग कहता, सच्चिदानंद तेरे नाम को जपता
तू ही हम सबका है रखवाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
अनगिन तेरे उपकार कन्हैया, कौन सका है उतार कन्हैया?
तुझे भक्तों ने वश में कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
“शुभ” को अपना दास बना लो, अन्तः करण में वास बना लो
तुझे अर्पण करूँ भाव माला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
भक्त नरसी का भात भराया, भक्त के कारन दौड़ा आया
तू भाई बना भात लाया रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
विश्वगुरु तुझे ये जग कहता, सच्चिदानंद तेरे नाम को जपता
तू ही हम सबका है रखवाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
अनगिन तेरे उपकार कन्हैया, कौन सका है उतार कन्हैया?
तुझे भक्तों ने वश में कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
“शुभ” को अपना दास बना लो, अन्तः करण में वास बना लो
तुझे अर्पण करूँ भाव माला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 3
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
भरी सभा द्रोपदी पुकारे, लाज बचाओ भ्राता प्यारे
तूने चीर अनंत बढ़ा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रणभेरी जब बजने लगी थी, कौरव-पांडव सेना लड़ी थी
तूने गीता अमृत दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ध्रुव की कथा विलक्षण भारी, देती शिक्षा भक्ति की न्यारी
तूने नभ स्थान ही दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
पुष्प-कुञ्ज चरणों में चढ़ाएं, "शुभ" दर्शन तेरे प्रभु हम पायें
करो इतनी कृपा हे जगपाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
भरी सभा द्रोपदी पुकारे, लाज बचाओ भ्राता प्यारे
तूने चीर अनंत बढ़ा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रणभेरी जब बजने लगी थी, कौरव-पांडव सेना लड़ी थी
तूने गीता अमृत दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ध्रुव की कथा विलक्षण भारी, देती शिक्षा भक्ति की न्यारी
तूने नभ स्थान ही दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
पुष्प-कुञ्ज चरणों में चढ़ाएं, "शुभ" दर्शन तेरे प्रभु हम पायें
करो इतनी कृपा हे जगपाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 2
हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
सखियन की आँखों के तारे, मात यशोदा नन्द दुलारे
बड़े लाड-प्यार से है पाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
छछियन भरी मटकी पे नाचे, छोटे पग में नुपुर साजे
तूने हर एक मन को हर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ज़हर का प्याला राणा जी ने भेजा, पिया ज़हर मीरा ने ना सोचा
तूने विष को अमृत कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
शिशुपाल दिए जा रहा गाली, गिनती सौ तक गिन रहे खाली
फिर धड से शीश हटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
सखियन की आँखों के तारे, मात यशोदा नन्द दुलारे
बड़े लाड-प्यार से है पाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
छछियन भरी मटकी पे नाचे, छोटे पग में नुपुर साजे
तूने हर एक मन को हर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ज़हर का प्याला राणा जी ने भेजा, पिया ज़हर मीरा ने ना सोचा
तूने विष को अमृत कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
शिशुपाल दिए जा रहा गाली, गिनती सौ तक गिन रहे खाली
फिर धड से शीश हटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 3
तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
हरि नाम का खजाना, भीतर दिखा रहे हो
जिसे ढूंढते हैं बाहर, ख़ुद में बता रहे हो
बिन सदगुरु के बन्दे, इसको ना साध पाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
तेरे दरश का प्यासा, मनवा ये रो रहा है
कैसे संभालूँ इसको, सुध अपनी खो रहा है
नैनों से बहते मोती, छुपते नहीं छुपाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
"शुभ" दोनों हाथ फैले, सदगुरु तुम्हारे आगे
नश्वर की नाही इच्छा, भक्ति प्रभु की मांगे
ऐसी अवस्था ला दो, हम ब्रह्मज्ञान पायें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
मेरी हैसियत ही क्या थी, जो तुम ना साथ होते
जीवन ये जा रहा था, कभी हँसते कभी रोते
समता के पाठ तुमने, अदभुत दिए सिखाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
हरि नाम का खजाना, भीतर दिखा रहे हो
जिसे ढूंढते हैं बाहर, ख़ुद में बता रहे हो
बिन सदगुरु के बन्दे, इसको ना साध पाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
तेरे दरश का प्यासा, मनवा ये रो रहा है
कैसे संभालूँ इसको, सुध अपनी खो रहा है
नैनों से बहते मोती, छुपते नहीं छुपाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
"शुभ" दोनों हाथ फैले, सदगुरु तुम्हारे आगे
नश्वर की नाही इच्छा, भक्ति प्रभु की मांगे
ऐसी अवस्था ला दो, हम ब्रह्मज्ञान पायें
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
मेरी हैसियत ही क्या थी, जो तुम ना साथ होते
जीवन ये जा रहा था, कभी हँसते कभी रोते
समता के पाठ तुमने, अदभुत दिए सिखाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 2
तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
हमने तो है ये माना, तुझमे मेरी रजा है
जिस हाल में तू राखे, उसमे हमें मजा है
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥
हमने तो है ये माना, तुझमे मेरी रजा है
जिस हाल में तू राखे, उसमे हमें मजा है
तकलीफ छोटी देकर, बड़े कष्टों से बचाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
तेरी करूँ मैं सेवा, अब आस ये ही रखता
मुक्ति मिले कुछ ऐसा, दिखला दो "शुभ" रस्ता
जीवन-मरण का झंझट, अब रास नाही आये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
मेरी चपल गति को, गुरुवर विराम दे दो
सब वासना मिटा कर, अपना ही ध्यान दे दो
मेरा मन मेरे ही, वश में नाही आए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
प्रभु प्रीत का ये मीठा, अनुभव हुआ है प्यारा
बेकार जाता जीवन, तुमने प्रभु संवारा
अन्तर का तम मिटाकर, जगमग ज्योत जगाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
तेरी करूँ मैं सेवा, अब आस ये ही रखता
मुक्ति मिले कुछ ऐसा, दिखला दो "शुभ" रस्ता
जीवन-मरण का झंझट, अब रास नाही आये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
मेरी चपल गति को, गुरुवर विराम दे दो
सब वासना मिटा कर, अपना ही ध्यान दे दो
मेरा मन मेरे ही, वश में नाही आए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
प्रभु प्रीत का ये मीठा, अनुभव हुआ है प्यारा
बेकार जाता जीवन, तुमने प्रभु संवारा
अन्तर का तम मिटाकर, जगमग ज्योत जगाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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