Sunday, 12 October 2025

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये - Part 2

तुमने ही दया करके, बिगड़े काज बनाये ।
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आए ॥

हमने तो है ये माना, तुझमे मेरी रजा है
जिस हाल में तू राखे, उसमे हमें मजा है
तकलीफ छोटी देकर, बड़े कष्टों से बचाए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

तेरी करूँ मैं सेवा, अब आस ये ही रखता
मुक्ति मिले कुछ ऐसा, दिखला दो "शुभ" रस्ता
जीवन-मरण का झंझट, अब रास नाही आये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

मेरी चपल गति को, गुरुवर विराम दे दो
सब वासना मिटा कर, अपना ही ध्यान दे दो
मेरा मन मेरे ही, वश में नाही आए
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

प्रभु प्रीत का ये मीठा, अनुभव हुआ है प्यारा
बेकार जाता जीवन, तुमने प्रभु संवारा
अन्तर का तम मिटाकर, जगमग ज्योत जगाये
तुम दाता हो दयालु, सबके ही काम आये....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

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