Sunday, 12 October 2025

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला - Part 2

हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२

सखियन की आँखों के तारे, मात यशोदा नन्द दुलारे
बड़े लाड-प्यार से है पाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

छछियन भरी मटकी पे नाचे, छोटे पग में नुपुर साजे
तूने हर एक मन को हर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

ज़हर का प्याला राणा जी ने भेजा, पिया ज़हर मीरा ने ना सोचा
तूने विष को अमृत कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

शिशुपाल दिए जा रहा गाली, गिनती सौ तक गिन रहे खाली
फिर धड से शीश हटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

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