तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
किसने जानी तेरी माया, किसने भेद तुम्हारा पाया,
हारे ऋषी मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू ही जल में तू ही थल में, तू ही मन में तू ही वन में,
तेरा रूप अनुप महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तू हर गुल में तू बुलबुल में, तू हर डाल के हर पातन में,
तू हर दिल में मूर्तिमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
तूने राजा रंक बनाये, तूने भिक्षुक राज बिठाये,
तेरी लीला अजब महान, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
झूठे जग की झूठी माया, मूर्ख इसमें क्यु भरमाया,
कर जीवन का शुभ कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान ।।
Shubh Bhajan Sangrah
Thursday, 9 April 2026
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो, श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग, शुभ कर्म करते रहिए।।
जिन्दगी की डोर सौंप, हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे, झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद, राम राम कहिए।।
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से, दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे, राम रस गहिए।।
Thursday, 2 April 2026
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसे कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
2 अप्रैल 2026
सियाराम का दुलारा, बजरंग बली हमारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
सुत मानती हैं माँ जानकी, तुमपे कृपा है श्री राम की
ह्रदय बसाकर भगवान को, माला जपो प्रभु के नाम की
सेवक ना तुमसे कोई, ब्रह्माण्ड ढूँढा सारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
युग-युग में तेरा आवागमन, सब वासनाओं का करते शमन
हमको भी भक्ति का दान दो, चरणों में तेरे है "शुभ" नमन
अंतर-तमस मिटाकर, मेरे मन करो उजियारा
संकट कटै मिटै सब, जहाँ नाम हो तुम्हारा
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
तर्ज: तेरे नाम का दीवाना, तेरे घर को ढूंढता है
Wednesday, 1 April 2026
हे मारुति शिव अवतारी
श्री हनुमान जयंती के दिन लिखी गयी रचना
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
2-अप्रैल-2026
हे मारुति शिव अवतारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तेरी महिमा कैसे गाऊं, बाबा तुमको कैसे मनाऊँ
हे पूज्य देव ब्रह्मचारी, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अजर अमर बलवान, हो सब सद्गुणों की खान
तेरे ह्रदय बसे भगवान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जब इंद्र ने वज्र से मारा, ठोढ़ी पर किया प्रहारा
फिर कहलाये हनुमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
हे चिरंजीवी बजरंगी, युग-युग में प्रभु के संगी
तेरी सेवा बनी पहचान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
जो नाम तुम्हारा ध्यावे, "शुभ" भक्ति ह्रदय जगावे
निश्चित होता कल्याण, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
तुम अष्ट सिद्धि के दाता, नव-निधियों के प्रदाता
नहीं लेश मात्र अभिमान, तेरी महिमा कैसे गाऊँ
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Monday, 30 March 2026
आरती: उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
Saturday, 28 March 2026
मोहे ले चलो गुरूजी के धाम
मोहे ले चलो गुरूजी के धाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
राम भी वो हैं, घनश्याम भी वो हैं
मेरी सुबह और शाम भी वो हैं
जिन्हें कहते हैं बापू आसाराम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
मेरे ह्रदय की व्यथा वो जानें
घट-घट में क्या है पहचानें
ऐसे संत बापू को प्रणाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर मन का अँधियारा मिटावें
ज्ञान ज्योत से उज्जवल बनावें
देते खुद को नहीं विश्राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर पल तेरा नाम जपूँ मैं
क्षण-क्षण तेरा ध्यान धरूँ मैं
"शुभ" मन में पधारो मेरे राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
जप तप सेवा कर्म कराते
सत्संग की गंगा में नहलाते
बापू करते सभी का कल्याण
मेरा मन लागे वहाँ ..........
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/02/2002
मेरा मन लागे वहाँ ..........
राम भी वो हैं, घनश्याम भी वो हैं
मेरी सुबह और शाम भी वो हैं
जिन्हें कहते हैं बापू आसाराम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
मेरे ह्रदय की व्यथा वो जानें
घट-घट में क्या है पहचानें
ऐसे संत बापू को प्रणाम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर मन का अँधियारा मिटावें
ज्ञान ज्योत से उज्जवल बनावें
देते खुद को नहीं विश्राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
हर पल तेरा नाम जपूँ मैं
क्षण-क्षण तेरा ध्यान धरूँ मैं
"शुभ" मन में पधारो मेरे राम
मेरा मन लागे वहाँ ..........
जप तप सेवा कर्म कराते
सत्संग की गंगा में नहलाते
बापू करते सभी का कल्याण
मेरा मन लागे वहाँ ..........
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/02/2002
मुख से बापू का गुणगान गाले
मुख से बापू का गुणगान गाले,
चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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