Thursday, 18 December 2025

जन्मदिन पर बधाई

आओ मिल गाएं देवें बधाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

दादा दादी देखो लाड लड़ावैं
मन ही मन राजी हुए जावैं
गीत गवाएं बांटें मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

नाना नानी का मन हर्षाया
सुंदर सा उपहार दिलाया
दिया उपहार बांटें मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

मात पिता फूले ना समावैं
घर में भगवत कीर्तन करावैं
बांटें प्रसाद में फल और मिठाई
खुशियां मनाएं देवें बधाई

उज्ज्वल भविष्य हो बालक का
ध्यान धरे नित जग पालक का
प्रभु पथ का "शुभ" बने अनुयायी
खुशियां मनाएं देवें बधाई

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Sunday, 14 December 2025

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

चाहे तीरथ में जाकर दर्शन करो
मनचाही से जितना सुमिरन करो
प्रभु आये नहीं चिंतन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

लाख गंगा नहा तन साफ़ किये
मात गंगा ने पाप सब माफ़ किये
जब  मन ना लगेगा सुमिरन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

धन दौलत कमाना बुरी बात नहीं
रिश्तों को निभाना बुरी बात नहीं
आये अहंकार जिस मन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

जिसने सत्संग का नित्य सहारा लिया
हरि चरणों में उसे आसरा मिल गया
प्रभु वास करें "शुभ" मन में
उसका ही मन लगेगा भजन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Wednesday, 10 December 2025

काहे को इतना करे अभिमान

अपना अहम् तज बन इंसान
काहे को इतना करे अभिमान
तेरी करनी को देख रहे भगवान
काहे को इतना करे अभिमान

समय चक्र चलता जायेगा
रोके से ना रुक पायेगा
अच्छा बुरा जैसा कर्म करेगा
प्रभु से ना कुछ छुप पायेगा
जान के खुद ना बन नादान
काहे को इतना करे अभिमान

जिनके लिए सब बंधन पाले
सुख उनको खुद खाये निवाले
धर्म कर्म सब ताक पे रखकर
बिन भय कर्म करे मतवाले
संग चले ना दुकान ना मकान
काहे को इतना करे अभिमान

रावण ने अभिमान था पाला
सीता माँ को था हर डाला
प्रभु राम से बैर था पाला
लंका को धूमिल कर डाला
राज मिटा और गया सम्मान
काहे को इतना करे अभिमान

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

Saturday, 6 December 2025

आ राम की शरण में और राम राम कर

आराम यदि चाहता तो एक काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

बंधन यदि लगे दुनिया के लोक लाज
इतिहास देख ले क्या देता ये समाज
सेवा को ध्येय बनाकर निष्काम काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

जीवन है ये उधारी देना पड़े हिसाब
इच्छाएं पूरी करने को देखे बड़े ख्वाब
ना काम आये दौलत हरि नाम जाप कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

कर गर्व अपने ऊपर तू जन्मा सनातन
देवों की संस्कृति है ये सबसे पुरातन
गुरुओं के "शुभ" वचनों को आत्मसात कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

अक्सर जो हम चाहते वो होता नहीं है
होता है जो अक्सर वो भाता नहीं है
भा जाए जो प्रभु को "शुभ" वही काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"


Tuesday, 2 December 2025

ऐसी कृपा करो गुरु मेरे

ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मैं बालक हूँ तुम मेरे दाता 
मैं नादान तुम हो विधाता
तेरा साया रहे सर पे मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मेरे जीवन में था जब अँधेरा
तब पाया सहारा मैंने तेरा
करके रौशनी मिटाये अँधेरे 
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

कई जन्मों से सुध बुध खोई
अपनी पहचान मैंने थी खोई 
आके बंधन तुम्हीं काटो मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

चरणों का दास रहूँ मैं
प्रभु सदा तेरे पास रहूँ मैं
"शुभ" रहे गुरुवर के चेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

इस जग में कोई नहीं अपना
ये जीवन तो है एक सपना
झूठी माया ने डाले डेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

मिले संतों का संग हमेशा
नहीं पनपे काम क्रोध क्लेशा 
इसने कष्ट दिए बहुतेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे
ऐसी कृपा करो गुरु मेरे
साथ यूँ ही रहूँ जन्मों तेरे

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

पूजन मंत्र


नाम संकीर्तनं यस्य सर्व पाप प्रणाशनम्।
प्रणामो दुःख शमनः तम नमामि हरिं परम्।।

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावर दण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकर प्रभृतिभिर्देंवै: सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।स्वस्ति नो ब्रिहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥