आ राम की शरण में और राम राम कर
बंधन यदि लगे दुनिया के लोक लाज
इतिहास देख ले क्या देता ये समाज
सेवा को ध्येय बनाकर निष्काम काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर
जीवन है ये उधारी देना पड़े हिसाब
इच्छाएं पूरी करने को देखे बड़े ख्वाब
ना काम आये दौलत हरि नाम जाप कर
आ राम की शरण में और राम राम कर
कर गर्व अपने ऊपर तू जन्मा सनातन
देवों की संस्कृति है ये सबसे पुरातन
गुरुओं के "शुभ" वचनों को आत्मसात कर
आ राम की शरण में और राम राम कर
होता है जो अक्सर वो भाता नहीं है
भा जाए जो प्रभु को "शुभ" वही काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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