Saturday, 6 December 2025

आ राम की शरण में और राम राम कर

आराम यदि चाहता तो एक काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

बंधन यदि लगे दुनिया के लोक लाज
इतिहास देख ले क्या देता ये समाज
सेवा को ध्येय बनाकर निष्काम काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

जीवन है ये उधारी देना पड़े हिसाब
इच्छाएं पूरी करने को देखे बड़े ख्वाब
ना काम आये दौलत हरि नाम जाप कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

कर गर्व अपने ऊपर तू जन्मा सनातन
देवों की संस्कृति है ये सबसे पुरातन
गुरुओं के "शुभ" वचनों को आत्मसात कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

अक्सर जो हम चाहते वो होता नहीं है
होता है जो अक्सर वो भाता नहीं है
भा जाए जो प्रभु को "शुभ" वही काम कर
आ राम की शरण में और राम राम कर

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"


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