Sunday, 14 December 2025

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

चाहे तीरथ में जाकर दर्शन करो
मनचाही से जितना सुमिरन करो
प्रभु आये नहीं चिंतन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

लाख गंगा नहा तन साफ़ किये
मात गंगा ने पाप सब माफ़ किये
जब  मन ना लगेगा सुमिरन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

धन दौलत कमाना बुरी बात नहीं
रिश्तों को निभाना बुरी बात नहीं
आये अहंकार जिस मन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

जिसने सत्संग का नित्य सहारा लिया
हरि चरणों में उसे आसरा मिल गया
प्रभु वास करें "शुभ" मन में
उसका ही मन लगेगा भजन में

जिसके सत्संग नहीं है जीवन में
उसका मन क्या लगेगा भजन में

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

No comments:

Post a Comment