एक अभिभावक के हृदय से निकले उद्गार
परिश्रम की "शुभ" राह पर, अपनी पहचान संवार ली।
अब आगे का पथ है विस्तृत, सपनों से भी और विशाल,
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
अनुशासन हो संग तुम्हारे, बन जाएगा जीवन कमाल।
एकाग्र मन, दृढ़ संकल्प से, लक्ष्य सदा तुम साधना,
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
ज्ञान दीप की ज्योति से अपने, जीवन पथ को साधना।
सात्विकता की मधुर सुगंध से, आचरण सदा महकाना,
विनम्रता और सच्चाई से, हर दिल में स्थान बनाना।
जब भी आए कठिनाई कोई, साहस से आगे बढ़ना,
हार न मानो किसी भी क्षण, बस आगे ही बढ़ते रहना।
"शुभ"आशीष यही है सबको, ऊँचाइयों को छू जाओ,
अपने कर्मों की उज्ज्वल छाया से, जग में नाम कमाओ।
अब तक थे तुम श्वेत पत्र, इस पर भविष्य लिखा जाएगा,
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
व्यर्थ समय ना जाने देना, जो बीता ना लौट के आएगा।
नव स्वप्नों की इस उड़ान में, शुभकामनाएँ देता अपार,
तुमसे ही है देश का कल, तुमसे ही भविष्य साकार।
रचनाकार : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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