हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
सर्व कला भरपूर हो स्वामी, सकल घटा के अंतर्यामी
तू ही घट-घट में बसने वाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
मित्र सुदामा को गले लगाया, नयन नीर से चरण धुलाया
तूने दिव्य उदाहरण रच डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
राम जनम जब तुमने लिया था, हनुमत अपना सेवक किया था
तूने रावन को ही मिटा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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