हर चित्त में बसेरा कर डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
गोपाला – गोपाला, नन्द लाला -२
भरी सभा द्रोपदी पुकारे, लाज बचाओ भ्राता प्यारे
तूने चीर अनंत बढ़ा डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रणभेरी जब बजने लगी थी, कौरव-पांडव सेना लड़ी थी
तूने गीता अमृत दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
ध्रुव की कथा विलक्षण भारी, देती शिक्षा भक्ति की न्यारी
तूने नभ स्थान ही दे डाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
पुष्प-कुञ्ज चरणों में चढ़ाएं, "शुभ" दर्शन तेरे प्रभु हम पायें
करो इतनी कृपा हे जगपाला रे गोपाला
तू अनेकों नाम रूपों वाला रे गोपाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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