समय समय पर होत है, समय समय की बात
एक समय का दिन बड़ा, और एक समय की रात
सदा रंक नहीं रहे सदा, मृदंग ना बाजे ताल
सदा धूप नहीं छाँव, और सदा इंद्र नहीं गाज
सदा यौवन नहीं धीर नहीं, सदा ना काला केश
बेताल कहे विक्रम सुनो, सदा ना राजा देश
समय का पहिया चलता है
इस पहिये के साथ किसी का भाग्य बदलता है
समय का पहिया चलता है
लख घोडा लख पालकी लख, सिर पर छतर धरे
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र देखो, नीच घर नीर भरे
उस राजा का लाल भी देखो .....
बिन कफ़न के जलता है
समय का पहिया चलता है
भरी सभा में द्रुपत सुता को लाया अभिमानी
भीष्म द्रोण लाखो समझाए, एक नहीं मानी
वह दुर्योधन समर भूमि में .....
तिल तिल मरता है
समय का पहिया चलता है
तुलसी नर की क्या बड़ाई, समय बड़ा बलवान
समय के चलते अवध छोड़ खुद, वन वन भटके राम
चार चार सुत पर दशरथ खुद .....
विरह में मरता है
समय का पहिया चलता है
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