स्वीकारो गुरुदेव चरण में वंदन है
जब-जब भी प्रभु तुमने पुकारा
आ ना सका मैं द्वार तिहारा
बंधन है गुरुदेव, जगत का बंधन है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है
जब-जब भी मैंने तुमको पुकारा
तरह-तरह का लिया सहारा
चंचल है गुरुदेव, ये मन बड़ा चंचल है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है
रोम रोम में नाम सुमिरता
एक पल भी प्रभु तुम्हें न बिसरता
गदगद है गुरुदेव ये मन बड़ा गदगद है
वंदन है गुरुदेव चरण में वंदन है
संकलनकर्ता एवं रचनाकार: अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey
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