Tuesday, 25 April 2023

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना

राम रघुवर रघुनाथ रघुनन्दना
प्रभु के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

लोक शिक्षण हेतु प्रभु अवतार होत
जिनकी करुणा से भूमि दुखवार होत
सह सकत न दीनन करुण क्रंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

रोम-रोम काम कोटिक गुलाम है
सिया प्राणप्रिया प्रियतम श्री राम हैं
जिनकी समता में कोटिक रवि चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

सारी दुनिया में अप्रतिम प्रभाव है
किन्तु कोमल अति सरल स्वभाव है
जिनको द्वार है काहू के हित वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

राजगद्दी मिले या वनवास हो
जिनके हिय में हरष ना हरास हो
होय दिव्य मुख चंद्रकाहू अनंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिनका दीनन के प्रति सहज प्यार है
ऐसो और कौन जग में उदार है
करे दीनन के दुःख को निकंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

नाथ पतित को पावन बनावते
दीन दुर्बल प्रभु के मन भावते
जिन्हें भावे ना कपट छल छंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

दीन शबरी को माँ तुल्य मानते
गीध को भी पिता सा सनमानते
जिन्हें व्यापे जगत के दुःख वंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

जिन्हें सेवक हैं पुकारते सुहावते
भक्त प्रेमी हैं जिन्हें भावते
जिन्हें आलस प्रमाद है पसंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

अपने शत्रु का करते जो भी हित हैं
भालू वानर निषाद जिनके मित्र हैं
तपत हिय हित है शीतल जिन चंदना
हरि के चरनन में कोटि-कोटि वंदना

संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
Twitter: @abhimaitrey

No comments:

Post a Comment