दर्श प्रभु के जो भी पाता, भव बंधन से वो तर जाता
ब्रह्मज्ञानी करें उद्धार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
वाणी मधुर है चाल मधुर है, भक्तों में तेरा प्यार मधुर है
करें मधुमय सारा संसार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
भक्ति बढ़ाते वचन तुम्हारे, श्रद्धा टिके जो तुमको निहारे
बस मिलता रहे तेरा प्यार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
करुणामयी है स्वाभाव तुम्हारा, दीन - दुखी सब पायें सहारा
मेरे ह्रदय बसो सरकार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
हम ना कभी तेरी राह से भटकें, माता के गर्भ में फिर से ना लटकें
खुले मुक्ति का "शुभ" द्वार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
ज्योत ज्ञान की जले ह्रदय में, तिमिर का ना हो वास हिय में
दिल बन जाए गुरुद्वार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
मैं तेरा प्रभु तू है मेरा, नाम रतन का जपते फेरा
बहे कीर्तन की मधुर बयार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
जग की चर्चा रास ना आती, तुमसे लगनी जब लग जाती
“शुभ” चर्चा ही हो हर बार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
पढ़-पढ़ जो ना समझ में आया, तुमने सहज में वो समझाया
हमें लगता है चमत्कार, करो दर्शन हो जाओ भव पार ....
रचियता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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