Saturday, 30 November 2024

मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ

मैं जिंदा हूं तो, जीने का प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
रामायण के याचक बनकर, वाचन करना सीख लो 
राम नाम की महिमा का, गुणगान करना सीख लो 
मिले भक्त हनुमान, ये विश्वास देता हूँ 
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
जीना उसका जानिए जो राम नाम में लीन हो 
फिर चाहे वो राजा हो, फिर चाहे वो दीन हो 
दी हुई मैं उसकी, "शुभ" सांस लेता हूँ 
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
जीवन का आधार राम हैं, मर्यादा के धाम हैं
विमुख राम से यदि हुए तो, मिले नहीं विश्राम है
मन मंदिर से ही, दृष्टि का काम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
कितना प्यारा धर्म सनातन, प्रेम त्याग आधार है
मर्यादा जहाँ स्वयं राम हैं, कृष्ण प्रेम अवतार हैं
शाश्वत वेद पुराणों का, प्रमाण देता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।

राम गगन हैं राम धरातल,  कण-कण में श्री राम हैं
राम नवीन हैं राम पुरातन, आदि-अनंता राम हैं
ध्यान में जिनको शिवजी जपें, वो नाम लेता हूँ
मेरे रोम रोम में बसे, राम का नाम लेता हूँ ।।
 
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X: @abhimaitrey

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