मेरी भक्ति तुम्हीं मेरी शक्ति तुम्हीं, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
तुम हो जगत की आत्मा, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
लगन तुम्हारी जब लग जाए, बंधक जीव मुक्त हो जाए
ज्ञान पिपासु मन हो जाए, संत समागम करे कराए
हो पाप कर्मों का खात्मा, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
राम-राम उठते ही गाए, राम-राम जब सोने जाए
राम राम कह भोग लगाए, राम-राम कह मिले मिलाए
नित रामचरण की चाहना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
जित देखूं उत तुम नारायण, और नजर ना कोई आए
जिसने अंतर ज्योत जगाई, तुमको विरला सोई पाए
“शुभ” हरि दर्शन की कामना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
जो कृपा आपकी पाता है, वह पंगु गिरि चढ़ जाता है
मूक भी सुर में गान करे, बिना नेत्र लिख पाता है
बस दिल से करे जो प्रार्थना, मेरे पारब्रह्म परमात्मा
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey
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