तर्ज: मेरे नयना सावन भादों, फिर भी मेरा मन प्यासा
तुम बिन कौन सहारा --- २
तेरे बिन जीवन है अधूरा
दिल से तुम्हें पुकारा
तुम बिन कौन सहारा --- २
जब मन तमस है छाया , तुमने दीप जलाया
भटके हुए मेरे इस जीवन को, सच्चा मार्ग दिखाया
मैं ही समझ ना पाया .......
तेरी वाणी अमृत जैसी, भव से करे किनारा
तुम बिन कौन सहारा
तू ही ब्रह्मा तू ही विष्णु, तू ही है महादेवा
तेरे द्वारे देव पधारें, करते नित "शुभ" सेवा
ओ प्यारे गुरुदेवा ........
तुमसे है कण कण में जीवन, तुमसे जगत पसारा
तुम बिन कौन सहारा
तेरे लिए वैकुण्ठ भी क्या है, क्या बंधन संसारा
जहाँ करुणा की दृष्टि तू डाले, वही बसे सुख सारा
सब विधि खेल तुम्हारा .......
तेरे जैसा कोई दयालु, ढूंढ लिया जग सारा
तुम बिन कौन सहारा
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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