दूल्हे रघुराई जी दूल्हे रघुराई
आज जनकपुर बाजै बधाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
चहुँ दिशा आनंद है छाया
जनकपुर ने उत्सव मनाया
अवधपुरी ने उत्सव मनाया
भूल गए सब कोई चतुराई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
खुशियों की कोई सीमा नहीं है
कोई छोटा कोई बड़ा नहीं है
कोई निर्धन धनवान नहीं है
सब मिलकर के बांटे मिठाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
ऋषि-मुनि देव सभी हरषाए
ब्रह्मा विष्णु शंकर भी आए
मिलकर सबने पुष्प बरसाए
देवों ने जय-जयकार लगाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
फूलों से सजी नगर की गलियाँ
झूम उठीं सखियाँ अलबेलियाँ
गूँज उठीं जयकारों से गलियाँ
हर मुख पर मुस्कान समाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
'शुभ' गाए मंगल यह गाथा
राम-सिया का पावन नाता
जिसने प्रेम से नाम है गाया
उस पर कृपा करें रघुराई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
दूल्हे रघुराई जी, दूल्हे रघुराई
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
सब मिलकर के बांटे मिठाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
ऋषि-मुनि देव सभी हरषाए
ब्रह्मा विष्णु शंकर भी आए
मिलकर सबने पुष्प बरसाए
देवों ने जय-जयकार लगाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
फूलों से सजी नगर की गलियाँ
झूम उठीं सखियाँ अलबेलियाँ
गूँज उठीं जयकारों से गलियाँ
हर मुख पर मुस्कान समाई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
'शुभ' गाए मंगल यह गाथा
राम-सिया का पावन नाता
जिसने प्रेम से नाम है गाया
उस पर कृपा करें रघुराई
सिया बनी दुल्हन, दूल्हे रघुराई
दूल्हे रघुराई जी, दूल्हे रघुराई
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
No comments:
Post a Comment