जिसका आदि ना अंत, वो जग में अनंत
औघड़ दानी निराला .....
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
रूप भयंकर बना के रहता
भूतो के संग मस्त है रहता
जिसका कोई ना सानी, वो है महादानी
पीवे विष का प्याला .....
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
सावन की रुत आयी रे भैया
गंगाजल ले चले कावड़िया
"शुभ" द्वारे जोभी आये, गंगाजल से नहलाये
काटे कष्ट विकराला ......
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
कैलाश पर्वत पे उसका बसेरा
भस्म रमा जोगी डाले है डेरा
वो है गजब बैरागी, नहीं ऐसा कोई त्यागी
जग में देव निराला ......
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
गले में बाबा लिपटे भुजंगा
जटा से बहती पावन गंगा
नंदी सेवा में रहते, भक्त बोल बम कहते
"शुभ" जपे बंबं की माला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
डमरू वाला शिव डमरू वाला
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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