अहम् शुन्य जिस दिन ये वृत्ति बनेगी
प्रभु से मिलन की ये युक्ति मिलेगी
ना अपना है कोई ना कोई पराया
सबके सुमंगल की दृष्टि बनेगी
सद्भाव मन में सदा "शुभ" रखना
वाणी का संयम सदा "शुभ" रखना
सदाचार का मार्ग निश्चित कठिन है
प्रभु हाथ मेरा सदा थाम रखना
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"