Tuesday, 21 July 2026

तुम भक्तों के हो भगवान्

तुम भक्तों के हो भगवान्, मेरे सतगुरु आशाराम
तेरे चरणों में चारों धाम, मेरे सतगुरु आशाराम
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम

ज्योत ज्ञान की तुम हो जगाते, अज्ञान सब दूर भगाते
तेरे मार्ग पर चलते रहें हम, अब तो करो कल्याण
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

काम क्रोध मद लोभ छुडाते, भोग वासना से हमें बचाते
तेरी भक्ति में लीन रहें हम, दे दो ये वरदान
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

गुरु शरण में जो आ जाते, भव बंधन से वो तर जाते
"सेवक" आये शरण तिहारी, कृपा करो भगवान्
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

महिमा तुम्हारी कैसे गाऊं?, लीला का मैं पार ना पाऊं
वाणी मेरी टूटी-फूटी, कर ना सकूं गुणगान
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

"शुभ" दर्शन बिन रहा ना जाये, याद प्रभु की निशदिन आये
नयनों से मेरे नीर छलकता, कैसे लूं इनको थाम?
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

ब्रह्मज्ञान का अमृत पाया, पाकर सारे जग में लुटाया
हमको भी मिल गए हैं छींटे, पाकर हुए निहाल
तुम भक्तों के हो भगवान्....
तुम्हें पूजूं में आठों याम, मेरे सतगुरु आशाराम .......

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ" एवं रामबीर चौधरी

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