खोलो दया का द्वार मेरे स्वामी अब, खोलो दया का द्वार....
अंतर्यामी कहलाते हो, दया करो मेरे स्वामी -२
बाँह पकड़ लो, तार दो मुझको-२ नैया पड़ी मझधार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु कहाते, शिव स्वरुप में तुम प्रगटाते
ऋषि मुनि ज्ञानी भजते हैं -२, तेरी महिमा अपार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
“शुभ” तेरे दर पर आता रहेगा, प्रभु महिमा को गाता रहेगा
जब तक श्वास यह चलती रहेगी -२ पाता रहूँ तेरा प्यार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
तीन लोक तेरे गूंजे जयकारे, हम आये प्रभु द्वार तिहारे
आत्मज्ञान की मस्ती भर दो, दास करे ये पुकार
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
संत शरण में जाकर जग ने, अपना भाग्य बनाया
सुन-२ कर "शुभ" महिमा गुरु की, द्वार तिहारे आया
भव से पार करोगे मुझको, ऐसा मुझे विश्वास
मेरे स्वामी अब खोलो दया का द्वार....
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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