Monday, 30 March 2026

आरती: उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती
कृपा आपकी भव से है तारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

ब्रह्मनाद विष्णु शंख भोले का डमरू
बोले सदा सृष्टि में सर्वोच्च हैं गुरु
वेद पुराणों में भी है यही लिखा
ज्ञानियों विज्ञानिओं ने है यही कहा
गुरु मुख से बोलती है माँ भारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

काम क्रोध मोह माया लोभ सताये
ज्ञान का प्रकाश सबसे मुक्ति दिलाये
सतगुरु कृपा है तो कहे का है डर
सतगुरु के नाम का अनोखा है असर
गुरु कृपा ही पापों को है संहारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

देव दनुज यक्ष मनुज सब की भावना
जानते हैं आप करते पूर्ण कामना
आपकी नजर से कोई भेद ना छुपे
आप अगर चाहें तो काल रथ रुके
आपकी दया दृष्टि दुःख निवारती
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

मन में बसा कर तेरी मूर्ति
उतारूँ मैं गुरुवर तेरी आरती

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