बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे
सेवा करो – सेवा करो – सेवा करो , गुरुवर के दुलारे
मैं मेरी को छोड दो, प्रभु से रिश्ता जोड़ दो
बाधाएं जो आ जाएँ, उनका रास्ता मोड दो
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
सेवा कर जीवन महकाओ, जीवन अपना दिव्य बनाओ
सत्संग सुमिरन खूब कमाओ, औरो को दर्शन करवाओ
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
महके जीवन “पुष्प” की भांति, ध्यान गुरु का रहे दिन राती
“शुभ” दर्शन की याद है आती, गुरु परंपरा यही सिखाती
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
एक भरोसा राम का है, बाकी जग किस काम का है?
ऐसी मस्ती मिलती कहाँ?, ये असर हरि नाम का है
बढते चलो - बढते चलो - बढते चलो, गुरुवर के प्यारे....
No comments:
Post a Comment