बापू जी के चरणों में श्रद्धा बढ़ा ले
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
जीवन की नौका को डूबने ना देना
बापू मेरे साईं मेरे, आप थाम लेना
गुरु ज्ञान गंगा में गोता लगा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
छोड़ अभिमान क्यों किसी से बैर करना
ना रहा है ना रहेगा ये शरीर अपना
छोटी जिंदगानी में प्रेम धुन गा ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
सेवा की महिमा को संतों ने गाया
सेवक सदा प्रभु ह्रदय समाया
निस्वार्थ सेवा की आदत बना ले -2
खुद को मिटा ले - खुद को मिटा ले
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
18/03/2002
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