Saturday, 28 March 2026

मुख से बापू का गुणगान गाले

मुख से बापू का गुणगान गाले, 
चल गुरुवर का दर्शन पाले

गुरु चरणों में जब शीश झुकायेगा मन
हरि धाम का आनंद पायेगा मन
वैकुण्ठ यहीं बना ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

बापू बांटें हैं ज्ञान की प्याली सदा
मेरे गुरुवर की हर एक निराली अदा
हम पीकर हुए मतवाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

गुरु की ब्रह्म को भी जरूरत पड़ी
मन माया तू फिर क्यों रहती खड़ी
"शुभ" बापू का सत्संग पाले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

तृष्णा मन की मिटी नाही साड़ी उमर
मौत नजदीक आती कास ले कमर
साजो सामान अपना सजा ले, चल गुरुवर का दर्शन पाले

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

No comments:

Post a Comment