Sunday, 7 June 2026

जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा

जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा ।
जब मन ना धरेगा धीर, तो मनन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

बचपन खेल-कूद में बीता, यौवन माया में खोया ।
धन-दौलत के पीछे भागा, प्रभु नाम न संजोया॥
जब साँस ना हो अधीर, तो सुमिरन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा,
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

आज मिला है समय अमोलक, नाम प्रभु का गा ले ।
राधे-श्याम की शरण में आकर, जीवन सफल बना ले॥
जब डोलेगी तकदीर, तो चिंतन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

श्री राधा दया की सागर, श्री श्याम कृपा के धाम ।
जो इनके द्वार पे आया, पाया सुख और विश्राम॥
जब काँपन लगे शरीर, तो जपन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

अभी जप ले राधे-राधे, अभी जप ले  "शुभ"  घनश्याम ।
क्या जाने कब रुक जाएँ, जीवन की साँसें तमाम॥
जब अंतिम होगी पीर, तो कीर्तन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥
फिर भजन कहाँ से होगा, फिर मनन कहाँ से होगा ।
जब जर्जर होवे शरीर, तो भजन कहाँ से होगा॥

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

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