हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा,
तेरे रूप अनेक तू एक ही है
हर देश में तू, हर भेष में तू ,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,
सागर से उठा, बादल बनके,
बादल से गिरा वर्षा बनके,
फिर नहर बनीं, नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार तू एक ही है,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,
चींटी से अणु परमाणु बना,
सब जीव जगत का रूप लिया,
कहीं पर्वत वृक्ष, विशाल बना,
सौन्दर्य तेरा तू एक ही है,
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
हर देश में तू,
यह दिव्य दिखाया है जिसने
वह श्री गुरुदेव की पूर्ण कृपा
तुम व्यापे और ना कोई दिखा
बस मैं और तू दोनों एक ही हैं
संकलनकर्ता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X(twitter): @abhimaitrey
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