सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
सद्गुरु बनके मेरा तू आया प्रभु
जी करे तुझको जी भर के देखा करूँ
सारी उम्र मैं तेरी पूजा करूँ
वेदों पुराणों का सार तुम्हीं से
पाया जो हमने वो पाया तुम्ही से
ब्रह्मज्ञानी हो तुम, अंतर्यामी हो तुम
तेरी महिमा सदा मैं गाऊं प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
चरणों में तेरे हम शीश झुकाएं
प्रेम और सभक्ति से "शुभ" गीत गायें
तेरी राह चलूँ, जो कहे वो करूँ
मेरा हर कर्म हो, तेरा पूजन प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
अज्ञानता का तम मिटाया तुम्ही ने
सत्य का दीपक जलाया तुम्ही ने
भाव पार करें, बेडा पार करें
शरण में तेरी जो आया प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
माया के बंधन तुमने हैं तोड़े
सत्संग सुनकर सत्य से जोड़े
भ्रम दूर भागते, आत्मज्ञान जगाते
ईश्वर को ह्रदय में दिखाते प्रभु
सबके दिल में है तू ही समाया प्रभु
नोट: इस भजन का मुखड़ा किसी अन्य रचनाकार का है परन्तु सभी अन्तरे
लिखने का सौभाग्य मुझे मिला है।
रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey
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