संतों की वाणी सुनो, हो जाये कल्याण
ज्ञान खजाना पाना हो, तो संत ज्ञान की खान
भला बुरा जो भी हुआ, गुरु चरणों में डाल
हे साधक संसार में, तेरा बांका हो ना बाल
हरि नाम को सुमिर ले, यही जगत में सार
बिन हरि और गुरु नाम के, भूमि पर हो भार
हे साधक संसार में, तेरा बांका हो ना बाल
हरि नाम को सुमिर ले, यही जगत में सार
बिन हरि और गुरु नाम के, भूमि पर हो भार
बन जाओ छे सूरमा, बनों या मालामाल
सद्गुरु भक्ति नहीं दिल में, तो सबसे बड़े कंगाल
गुरु ही तारक ब्रह्म हैं, गुरु ही शिव का रूप
गुरु के दिल में बना ले जगह, रंक से हो जा भूप
गुरु तत्व से प्यार करो, यही तत्व एक सार
इसी तत्व के हेतु से, होना है भव पार
दया करो मेरे सद्गुरुजी, करो दुखों का नाश
एक यही विनती करे, "शुभ" बालक तेरा दास
रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
सद्गुरु भक्ति नहीं दिल में, तो सबसे बड़े कंगाल
गुरु ही तारक ब्रह्म हैं, गुरु ही शिव का रूप
गुरु के दिल में बना ले जगह, रंक से हो जा भूप
गुरु तत्व से प्यार करो, यही तत्व एक सार
इसी तत्व के हेतु से, होना है भव पार
दया करो मेरे सद्गुरुजी, करो दुखों का नाश
एक यही विनती करे, "शुभ" बालक तेरा दास
रचयिता - अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
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