बनाई है किस्मत तेरे पास आके
मुझे तुमने दे दी नयी जिंदगानी
तेरे नाम का आसरा मिल गया है
है करतार तेरी बड़ी मेहरबानी
तुम्हीं को मैं आनंदघन चाहता हूँ
जगत का नहीं कोई धन चाहता हूँ
ना रह जाये मुझमें कोई मोह माया
प्रभु तुममें तल्लीन मन चाहता हूँ
करूँ अब वही जोकि तुम चाहते हो
मैं चाहों का अपनी दमन चाहता हूँ
जहाँ चित्त हो चंचल जगत के सुखों में
वहां पर में उसका शमन चाहता हूँ
ना पूछो ये मुझसे मैं क्या देखता हूँ
मैं तेरी नजर में हरि देखता हूँ
ख़ुशी और गमी सब बराबर है मुझको
मैं सबमें ही तेरी रजा देखता हूँ
मिटे जिस तरह से ये भवदुःख बंधन
मैं ऐसा ही साधन भजन चाहता हूँ
नहीं दिख रहा है कोई अब किनारा
गुरु अब तुम्हारी शरण चाहता हूँ
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