मेरे मन के मंदिर में गुरुवर तुम्हारी
कृपानाथ ज्योति सदा जगमगाये
तेरे दर पे आये हैं बन के पुजारी
नहीं भाव भक्ति का कम होने पाए
अब प्रभु कृपा करहुं एही भांति
सब तजि भजन करहुं दिनु राति
हमें देना अनुराग अर्जुन की भांति
शयन में भी जिव्हा रहे गुनगुनाती
सेवा की महिमा समझ हमको आये
ये जीवन सदा सेवा में ही बिताये
कभी भूल कर भूल होने ना पाए
कभी भाव सेवा का मन से ना जाये
मन में कभी ना अहंकार आये
तेरे चरणों का ध्यान खोने ना पाए
रहे श्वाश चलती तन में तभी तक
हर एक श्वाश गुणगान तेरा ही गाये
विश्वास मन का ये जाने ना पाए
गुरुवर के हम हैं गुरुवर हमारे
तुम्हारे अलावा गुरूजी जगत में
नहीं कोई नैया हमारी उतारे
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