Tuesday, 11 March 2025

शिव भोले और गिरधारी

शिव भोले और गिरधारी, दोनो हैं जग हितकारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक दुख से छुड़ाते, एक पार लगाते

मोहन तो मधुबन में मिलते काशी में कैलाशी
अधम उधारन कहलाते है वो घट घट के बासी
एक पहने है पीताम्बर, एक ओढ़े है बाघम्बर
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक जगत से तारे, एक भव सिंधु तारे

द्रोपदी की सुन टेर कन्हैया आकर चीर बढ़ाये
काल बली का वध करने को शिव त्रिसूल उठाये
एक चक्र सुदर्शन धारी, एक भोले हैं भंडारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
जब भक्त बुलाते, दोनो दौड़े दौड़े आते

प्रेम के भूखे हैं वो भक्तों भोले और नटनागर
भक्ति भाव से मिलते है, भक्तों को वो करुणाकर
एक राधा के बनवारी, एक गौरा के त्रिपुरारी
अंतर क्या दोनो के प्रेम में बोलो
एक योगी महा ज्ञानी, एक औघड़ महा दानी

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

पाँव में घूंघरु बांध के नाचे
राम जी का नाम इसे प्यारा लागे
राम ने भी देखो इसे खुब पहचाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्रीराम का
लगता हैं पहरा वहाँ वीर हनुमान का
राम के चरण में हैं इनका ठिकाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

नाच नाच देखो श्रीराम को रिझाये
हनुमत रात दिन नाचता ही जाये
भक्तों में भक्त बडा दुनियाँ ने माना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना...

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा
तेरे द्वारे का है अजब नजारा

तुम बिन कोई ना हमको भाये
गुरुवर हम तेरा ही गुण गायें
कर दो बेडा पार हमारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

मिलती रहे गुरु सत्संग सेवा
इससे बड़ी नहीं कोई मेवा
सत्संग ही बस एक सहारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

भक्ति भाव के वचन सुना दो
ज्ञान गंगा में हमें डुबा दो
लाखों को तुमने पार उतारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

दर्शन बिन रहें अंखिया प्यासी
नैनों में छायी रही उदासी
दर्श को तरस रहा जग सारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

नियम मेरा गुरु कभी ना छूटे
चाहे दुनिया ये मुझसे रूठे
"शुभ" चरणों का मैं दास तुम्हारा
प्यारा लगे गुरु द्वार तुम्हारा

कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे
देव हमारे गुरुदेव हमारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रह्लाद भगत को
खम्ब फाड़ हिरण्याकश्यप मारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु भगत विभीषण
लंका जारि निशाचर मारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु द्रुपदसुता को
खींचत चीर दुशासन हारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु मीराबाई को
जहर के प्याले अमृत कर डाले
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु नरसी भगत को
भात भरन प्रभु आप पधारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

जैसे मिले प्रभु बलि राजा को
चार मास द्वारे पर ठारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

भक्तों को अपने कबहुँ मिलोगे
टप-टप टपके नयन हमारे
कबहुँ मिलोगे गुरुदेव हमारे

Tuesday, 25 February 2025

शिव भजन - हे त्रिपुरारी - भाग 3

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
प्रभु जय हो तुम्हारी, भोले जय हो तुम्हारी

हे भीमेश्वर हे विश्वेश्वर
तुम सर्वव्यापी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे सत्य सनातन हे देव पुरातन
तुम हो ”शुभ”कारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे त्रिलोचन हे भस्मीभूतन
तुम मंगलकारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे अटल वैरागी हे सिद्ध योगी
तेरी नंदी सवारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे चंद्रशेखर हे भोले महेश्वर
तुम गंगाधारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"

शिव भजन - हे त्रिपुरारी - भाग 2

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
प्रभु जय हो तुम्हारी, भोले जय हो तुम्हारी

हे स्वयं अकिंचन हे दुःख भंजन
तुम कल्याणकारी , प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे भूतनाथ हे सदा सनाथ
तुम विस्मयकारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे सहज वचन हर हे जलज नयन वर
तुम पापहारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

हे औढरदानी हे अकथ कहानी
तेरी महिमा न्यारी, प्रभु जय हो तुम्हारी
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"
X (twitter): @abhimaitrey

Saturday, 22 February 2025

तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा

तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा

अधरन तेरी मुस्कान है, शरणं हुआ ये जहान है
गुंजन हुआ "शुभ" गान है, आये धरा पर भगवान हैं
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

योगेश्वर धर्म प्रणेता, लोक लाडिले ब्रह्मवेत्ता
युग प्रवर्तक, ह्रदय विजेता, भाव की माला दास ये देता
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

मैं दीन हूँ तुम दीनानाथ, भक्तों के रहते हो साथ
सुनकर प्रभु करुण पुकार, धरती पर लीन्ह अवतार
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

तपती धरा का ताप मिटाने, निर्मम जनों को निर्मल बनाने
तमस हटाकर प्रकाश जगाने, धर्म सुवास चहुंओर फैलाने
तुम इष्ट हो परमात्मा, गुरुवर मेरे मेरी आत्मा .....

रचयिता : अभिषेक मैत्रेय "शुभ"